#सेवा_संकल्प_अभियान
#कहानी_बदलाव_की
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मिर्च बीज उत्पादन से बदली आर्थिक तस्वीर, 15 महिलाओं को मिला रोजगार
________________
गोगावां की लता लक्ष्मी नारायण बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल, समूह को एक सीजन में 4.20 लाख रुपये की आय
________________
एफपीओ से जुड़कर महिलाओं ने सीखा मिर्च बीज उत्पादन का कार्य, मजदूरी के साथ लाभ में भी मिल रहा हिस्सा
________________
खरगोन 17 अक्टूबर 2026। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में गोगावां एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) से जुड़ी महिलाओं ने सफलता की नई कहानी लिखी है। गोगावां निवासी श्रीमती लता लक्ष्मी नारायण के नेतृत्व और सदगुरु महिला स्वयं सहायता समूह की सहभागिता से मिर्च बीज उत्पादन का कार्य महिलाओं की आय बढ़ाने और रोजगार उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।
बचत तक सीमित समूह अब बना आजीविका का मजबूत माध्यम
गोगावां एफपीओ से जुड़ने से पहले सदगुरु महिला स्वयं सहायता समूह की गतिविधियां मुख्य रूप से बचत और राशि जमा करने तक सीमित थीं। समूह की महिलाएं खेतों में मजदूरी एवं अन्य कृषि कार्य करके आजीविका चलाती थीं। उन्हें प्रतिदिन लगभग 200 रुपये तक की मजदूरी मिलती थी। सीमित कौशल और प्रशिक्षण के अभाव में उनकी आय कम एवं अनिश्चित रहती थी।
प्रशिक्षण के बाद शुरू किया मिर्च बीज उत्पादन
गोगावां एफपीओ से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया और शंकर मिर्च के बीज उत्पादन का कार्य शुरू किया। इस पहल से महिलाओं को नियमित रोजगार के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिला। एफपीओ के माध्यम से महिलाओं को प्रतिदिन 300 रुपये मजदूरी दी जाती है। एक सीजन में 60 दिवस कार्य करने पर प्रत्येक महिला को 18 हजार रुपये मजदूरी प्राप्त होती है।
समूह की 15 महिलाओं को एक सीजन में कुल 2 लाख 70 हजार रुपये मजदूरी के रूप में प्राप्त होते हैं। इसके अतिरिक्त मिर्च बीज उत्पादन से होने वाले लाभ में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के माध्यम से समूह को लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इस प्रकार एक सीजन में समूह की कुल आय 4 लाख 20 हजार रुपये तक पहुंच रही है।
अन्य योजनाओं से भी मिला सहयोग
महिलाओं की आजीविका को मजबूत करने में उद्यानिकी विभाग एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से प्राप्त सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। लता लक्ष्मी नारायण ने तीन शेडनेट हाउस स्थापित करने के लिए 3 लाख रुपये का ऋण भी लिया है। इससे कृषि आधारित गतिविधियों को आगे बढ़ाने और उत्पादन के अवसरों में वृद्धि करने में सहायता मिल रही है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता से सामाजिक स्थिति में भी सुधार
मिर्च बीज उत्पादन के कार्य से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को मजदूरी के साथ लाभ में हिस्सेदारी का अवसर मिल रहा है। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान मिल रहा है। महिलाएं अब केवल बचत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामूहिक प्रयास, प्रशिक्षण और कृषि आधारित उद्यम के माध्यम से अपनी आजीविका को आगे बढ़ा रही हैं।
श्रीमती लता लक्ष्मी नारायण एवं सदगुरु महिला स्वयं सहायता समूह की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, महिला उद्यमिता और सामूहिक आजीविका का प्रेरक उदाहरण है। यह सफलता दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग मिलने पर स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
#JansamparkMP #khargone #सेवा_संकल्प_अभियान