जेसीबी से चकरोड मिटाकर कब्जे का आरोप, किसानों की जीवनरेखा पर संकट!
सार्वजनिक रास्ता खेत में मिलाने का दावा, तार फेंसिंग की तैयारी से ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
तहसील उरई क्षेत्र के ग्राम रगेदा में सार्वजनिक चकरोड पर कथित कब्जे का मामला सामने आने से ग्रामीणों और किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
गांव निवासी रामपाल पुत्र रामलखन ने संयुक्त मजिस्ट्रेट उरई को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि गांव के जाहर सिंह यादव पुत्र खेमराज यादव ने चकरोड संख्या-102 पर जेसीबी मशीन चलवाकर उसे समतल कर अपने खेत में मिला लिया है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अब उक्त भूमि पर तार फेंसिंग कर स्थायी कब्जा करने की तैयारी की जा रही है।
शिकायतकर्ता के अनुसार चकरोड संख्या-102 वर्षों से ग्रामीणों और किसानों के खेतों तक पहुंचने का मुख्य सार्वजनिक मार्ग रहा है।
इसी रास्ते से किसान ट्रैक्टर, बैलगाड़ी और कृषि उपकरण लेकर अपने खेतों तक पहुंचते हैं।
यदि इस मार्ग पर कब्जा हो जाता है तो दर्जनों किसानों का आवागमन बाधित हो सकता है, जिससे खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि 1 जुलाई 2026 को जेसीबी मशीन लगवाकर सार्वजनिक चकरोड को मिटा दिया गया और उसे खेत में मिला लिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित व्यक्ति प्रभावशाली होने के कारण ग्रामीण खुलकर विरोध करने से डर रहे हैं।
यही वजह है कि न्याय की उम्मीद में मामला संयुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष पहुंचाया गया है।
रामपाल ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व विभाग की टीम भेजकर तत्काल मौके की पैमाइश कराई जाए।
यदि शिकायत सही पाई जाती है तो चकरोड संख्या-102 को अतिक्रमण मुक्त कराकर पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए तथा सार्वजनिक मार्ग को नुकसान पहुंचाने और अवैध कब्जा करने के मामले में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के चकरोड केवल रास्ते नहीं बल्कि किसानों की जीवनरेखा होते हैं। इन मार्गों के सहारे ही किसान अपने खेतों तक पहुंचते हैं।
यदि सार्वजनिक भूमि पर कब्जे की घटनाएं बढ़ती हैं तो इससे न केवल खेती-किसानी प्रभावित होगी बल्कि गांवों में विवाद और तनाव की स्थिति भी पैदा हो सकती है। अब पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर ग्रामीणों की निगाहें टिकी हुई हैं।
नोट: इस समाचार में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा संयुक्त मजिस्ट्रेट को दिए गए प्रार्थना पत्र पर आधारित हैं।
मामले की सत्यता और आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी।
अब आपकी राय...
अगर किसी गांव के सार्वजनिक चकरोड पर कब्जे के आरोप लगते हैं, तो क्या प्रशासन को तत्काल मौके पर पहुंचकर पैमाइश कर कार्रवाई करनी चाहिए?
क्या सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?
क्या ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई जरूरी है?
आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
क्या गांव के सार्वजनिक चकरोड बचाने के लिए प्रशासन को और सख्त कदम उठाने चाहिए?
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Kalpi, Jalaun | Jul 7, 2026