जिन घरों में सुबह तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, आज वहां परिवारों की आंखों में आंसू हैं… जिन खेतों में मेहनत से फसलें उगाई गई थीं, वे उजाड़ दिए गए… और अब इस कार्रवाई के खिलाफ खुद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान धरने पर बैठ गए हैं!
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव से सामने आया यह मामला अब सियासी तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि वन विकास निगम ने रविवार दोपहर करीब दो बजे आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के मकान तोड़ दिए और उनकी खड़ी फसलें भी कुचल दीं।कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिवराज सिंह चौहान पहले ही आदिवासियों के घर नहीं तोड़ने के निर्देश दे चुके थे, तो फिर यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई? जानकारी के मुताबिक, करीब एक साल पहले शिवराज ने जिला प्रशासन को ऐसे मकान नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कार्रवाई होने से पूरे मामले पर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान उनकी हालत देखकर भावुक नजर आए। वे धरना स्थल पर बैठ गए और अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताई। शिवराज ने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर मामले की जानकारी दी और प्रभावित परिवारों के लिए नए घर बनवाने तथा स्थायी व्यवस्था होने तक रहने-खाने का इंतजाम करने को कहा।
शिवराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने मामला उठाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की। उन्होंने कहा कि गरीबों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
उधर, कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव सरकार के बीच टकराव का मामला बताया, जबकि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सत्ता की खींचतान में आदिवासी परिवार उजड़ रहे हैं।
अब सवाल है—जब पूर्व मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई हुई, तो जिम्मेदार कौन है? क्या प्रभावित परिवारों को नए घर और उनकी आजीविका का मुआवजा मिलेगा? और क्या सरकार दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी?
कोसमी गांव की यह घटना अब सिर्फ 12 परिवारों के आशियानों का मामला नहीं, बल्कि आदिवासियों के अधिकारों, प्रशासनिक जवाबदेही और मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ा बड़ा सवाल बन गई है।
Raghurajnagar Nagareey, Satna | Oct 12, 2026