दो मासूमों को मिला नया आशियाना: गया डीएम ने कराया विधिवत दत्तक ग्रहण, बोले—हर बच्चे को परिवार का प्यार और सुरक्षित भविष्य पाने का अधिकार
पश्चिम बंगाल के दंपत्ति ने बालिका को लिया गोद, उत्तर प्रदेश की एकल महिला बनी बालक की मां; डीएम ने दत्तक अभिभावकों से बेहतर परवरिश और शिक्षा देने की अपील की
गया: बिहार के गया जिले में मंगलवार को दो मासूम बच्चों के जीवन में नई उम्मीद और नई खुशियों की शुरुआत हुई। जिला पदाधिकारी, गया श्री शशांक शुभंकर के कर-कमलों द्वारा दो बच्चों का विधिवत दत्तक ग्रहण कराया गया। निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद एक बालिका को पश्चिम बंगाल के दंपत्ति तथा एक बालक को उत्तर प्रदेश की एकल महिला को विधिवत सौंपा गया। दोनों बच्चों को अब अपने नए परिवार में स्नेह, संरक्षण और बेहतर भविष्य का अवसर मिलेगा।
दत्तक ग्रहण के अवसर पर जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने दोनों बच्चों और उनके नए अभिभावकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बच्चों के उज्ज्वल, सुरक्षित और सुखद भविष्य की कामना करते हुए दत्तक अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को परिवार के अन्य सदस्यों की तरह भरपूर प्यार और अपनापन दें। उन्होंने बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समुचित पालन-पोषण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
‘हर बच्चे को परिवार का प्यार पाने का अधिकार’
जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने कहा कि हर बच्चे को परिवार का प्यार, संरक्षण और बेहतर भविष्य पाने का अधिकार है। जरूरतमंद बच्चों को परिवार का स्नेह और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में दत्तक ग्रहण की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि जो सक्षम परिवार बच्चों को अपनाने की इच्छा रखते हैं, वे आगे आएं और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से दत्तक ग्रहण करें। उन्होंने कहा कि दत्तक ग्रहण केवल किसी बच्चे को अपने परिवार में शामिल करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उसके जीवन को सुरक्षित दिशा देने और उसे परिवार का भावनात्मक सहारा उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे बच्चों को जब परिवार का प्यार, उचित शिक्षा और संरक्षण मिलता है तो उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव तैयार होती है।
अवैध तरीके से गोद लेने से बचें
डीएम ने आम लोगों को दत्तक ग्रहण के मामले में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी बच्चे को अवैध या अनधिकृत तरीके से गोद नहीं लिया जाना चाहिए। बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया केवल निर्धारित कानूनी प्रावधानों और सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से ही पूरी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से बच्चे को गोद लेना न केवल बच्चे के अधिकारों और सर्वोत्तम हितों के प्रतिकूल है, बल्कि कानूनन भी उचित नहीं है। इसलिए इच्छुक अभिभावकों को दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप ही पूरी करनी चाहिए, ताकि बच्चे के अधिकार, सुरक्षा और भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।
अधिकारियों की रही मौजूदगी
दत्तक ग्रहण कार्यक्रम के दौरान जिला बाल संरक्षण इकाई, गया के सहायक निदेशक, बाल संरक्षण पदाधिकारी, गया तथा विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान, गया के समन्वयक सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं प्रावधानों के अनुरूप संपन्न कराई गई।
दोनों बच्चों को नया परिवार मिलने के साथ ही उनके जीवन में एक नई शुरुआत हुई। प्रशासन की ओर से इस अवसर पर यह संदेश भी दिया गया कि समाज के सक्षम लोग आगे बढ़कर कानूनी प्रक्रिया के तहत जरूरतमंद बच्चों को परिवार का स्नेह और सुरक्षित भविष्य देने में अपनी भूमिका निभाएं।
#गयाजी
#गया_हो
#पितृपक्ष
#biharpolties
#GayaPolice
#बिहार