अधिवक्ता को पकड़कर थाना लाने के विरोध में विधिज्ञ संघ ने जताया आक्रोश, गिरफ्तारी देने साइबर थाना पहुंचे संघ के अधिवक्ता
छात्रा के साथ हैवनियत मामले से संबंधित न्यूज़ कानूनी जानकारी के साथ फेसबुक आईडी पर डालने को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता सह पत्रकार रूपेश सिंह को अचानक घेराबंदी कर साइबर थाना की पुलिस द्वारा पकड़कर थाना लाने के विरोध में सोमवार को अधिवक्ता संघ ने खुद को न्यायिक कार्यों से अलग रखा और साइबर डीएसपी के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। इतना ही नहीं अधिवक्ताओं का समूह सोमवार की दोपहर 1:00 बजे गिरफ्तारी देने साइबर थाना पहुंच गए और धरना पर बैठकर आक्रोश जताने लगे। इस दौरान साइबर डीएसपी को चेंबर से बाहर आकर वार्ता करने और डीएम, एसपी को मौके पर बुलाने की मांग को लेकर करीब तीन घंटे से अधिवक्ता साइबर थाना में अड़े हुए हैं और अलग- अलग तरीके से पुलिस प्रशासन का विरोध जता रहे हैं।
पीड़ित वरिष्ठ अधिवक्ता सह पत्रकार रूपेश सिंह ने बताया कि रविवार की शाम जब वे अपने घर में काम कर रहे थे तो अचानक दरोगा और बड़ी संख्या पुलिस कर्मी आये और बिना कारण के मुझे पकड़कर जबरण थाना लेकर आ गए। जब कारण पूछा गया तो साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार ने बताया कि डीएम के कहने पर उन्हें थाना लाया गया है। जबकि डीएम से पूछने पर उन्होंने इस संबंध में साफ इनकार कर दिया। फेसबुक पर एक न्यूज अपलोड किया गया है। जिसमें डीएस की जगह डीएम सुनने में आ रहा है। जबकि अधिवक्ता रूपेश सिंह ने बताया कि उन्होंने पूर्व में छात्र के साथ हुए छेड़खानी मामले से संबंधित कानूनी जानकारी के साथ एक न्यूज़ अखबार में भी लिखा था और फेसबुक पेज पर भी अपलोड की थी। जिसमें डॉक्टर थनीष कुमार का भी नाम लिया गया था, लेकिन डीएसपी साहब को सुनने में डीएस की जगह डीएम लगा और उन्हें एक अपराधी की तरह पकड़ कर थाना लाया गया। उन्होंने बताया कि अगर कुछ गलतफहमी हो गई थी तो उन्हें फोन कर बुला लिया जाता है वह खुद थाना आ जाते, लेकिन इस तरह अपराधियों की तरह पड़कर मोबाइल को जब्त कर थाना लाया गया जिससे उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। बिना जांच के जल्दबाजी में उठाया गया यह कदम पुलिस प्रशासन के कार्यशैली पर सवाल खड़ी कर रही है।
वही विधिज्ञ संघ ने इस मामले पर कड़ी निंदा और भर्त्सना की है। और इसकी एक कॉपी निरीक्षण न्यायाधीश जमुई मंडल वह न्यायाधीश पटना उच्च न्यायालय को भी प्रेषित किया गया है साथ ही मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को भी इसकी एक प्रति भेजी गई है इसके अलावा विधिक संघ ने जांच में दोषी पाए जाने पर प्राथमिकी भी दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लगातार जिले में 07 वर्ष से कम सजा वाले मामले में गिरफ्तारी होती है। तथा अब तो विद्वान अधिवक्तागण को भी गिरफ्तार कर लिया जाता है। विधिज्ञ संघ ने यह मांग किया है कि पीड़ित अधिवक्ता सह पत्रकार रूपेश सिंह को 20 लाख का मुआवजा बिहार सरकार दे। 16 दिनों में जांच करवाई पूर्ण करते हुए सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाने पर चरणबद्ध तरीके से विरोध दर्ज करवाया जाएगा। #jamuibihar #advocate #CrimeNews #cyberpolice #jamuiPolice
Jamui, Jamui | Sep 28, 2026