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सूरज की रोशनी से खेतों में आई हरियाली, जनवेद धाकड़ के चेहरे पर लौटी मुस्कान
सोलर पंप ने बदली खेती की तस्वीर, सिंचाई की चिंता से मिली मुक्ति और खेती बनी अधिक लाभकारी
किसान के लिए खेत केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसके परिवार की उम्मीदों और भविष्य का आधार होता है। जब फसल को समय पर पानी मिलता है तो खेतों में हरियाली के साथ किसान के मन में भी खुशियां खिल उठती हैं। विकासखंड पहाड़गढ़ के ग्राम कोटसिरथरा निवासी किसान श्री जनवेद धाकड़ के जीवन में सोलर पंप ने इसी बदलाव को साकार किया है। कभी सिंचाई के लिए डीजल की बढ़ती कीमत और बिजली की अनियमित आपूर्ति की चिंता करने वाले श्री जनवेद आज सूरज की रोशनी से अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं और बेहतर फसल के साथ अपने भविष्य को लेकर पहले से अधिक आश्वस्त हैं।
श्री जनवेद के पास खेती योग्य भूमि है, लेकिन सिंचाई की पर्याप्त और नियमित व्यवस्था लंबे समय से उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। खेती के समय पानी की आवश्यकता बढ़ती, तो डीजल की व्यवस्था करने और उसका खर्च उठाने की चिंता भी बढ़ जाती थी। बिजली की उपलब्धता अनिश्चित होने के कारण कई बार उन्हें सिंचाई के लिए इंतजार करना पड़ता था। समय पर पानी नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने की आशंका बनी रहती थी और खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही थी।
ऐसे समय में शासन की सोलर पंप योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई। विभागीय योजना के अंतर्गत श्री जनवेद धाकड़ को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप प्राप्त हुआ। सोलर पंप स्थापित होने के बाद उनकी खेती की तस्वीर धीरे-धीरे बदलने लगी। अब खेतों की सिंचाई के लिए उन्हें डीजल खरीदने की चिंता नहीं रहती और बिजली की उपलब्धता पर निर्भरता भी कम हुई है। सूरज की रोशनी के साथ खेतों तक पहुंचता पानी उनके लिए खेती में नई संभावनाएं लेकर आया है।
श्री जनवेद बताते हैं कि पहले सिंचाई की चिंता हमेशा मन में बनी रहती थी। फसल खड़ी होती थी, लेकिन समय पर पानी मिलेगा या नहीं, यह चिंता साथ-साथ चलती थी। अब सोलर पंप मिलने के बाद परिस्थितियां काफी बदल गई हैं। जब धूप निकलती है, तो सोलर पंप से खेतों में पानी पहुंचता है और समय पर सिंचाई हो जाती है। उन्होंने बताया कि नियमित सिंचाई से उनकी फसलों की स्थिति बेहतर हुई है और उत्पादन में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।
खेतों में लहलहाती फसलों को देखकर श्री जनवेद के चेहरे पर संतोष साफ दिखाई देता है। वे कहते हैं कि किसान के लिए इससे बड़ी खुशी क्या होगी कि उसकी मेहनत से तैयार फसल खेत में अच्छी तरह खड़ी हो और उसे समय पर पानी मिल सके। उनके अनुसार सोलर पंप ने केवल सिंचाई की समस्या का समाधान नहीं किया, बल्कि खेती की लागत कम करने और परिवार के आर्थिक भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद भी दी है।
श्री जनवेद भावुक होकर बताते हैं कि पहले खेती के साथ खर्च और चिंता दोनों बढ़ते जाते थे। डीजल का खर्च अलग था और बिजली की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता अलग। अब सोलर पंप के कारण डीजल पर होने वाला खर्च समाप्त हो गया है। बचत के साथ मन को जो संतोष मिला है, वह उनके लिए इस योजना का सबसे बड़ा लाभ है। वे कहते हैं कि अब खेत में पानी की धार के साथ उन्हें अपने परिवार के बेहतर भविष्य की तस्वीर भी दिखाई देती है।
वे अन्य किसानों से भी शासन की सोलर पंप योजना का लाभ लेने की अपील करते हुए कहते हैं कि आज खेती में नई तकनीक का उपयोग जरूरी है। यदि किसान शासन की योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाएं, तो खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाया जा सकता है। उनके लिए सोलर पंप अब केवल एक सिंचाई उपकरण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर खेती की दिशा में बढ़ाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुरैना जिले में भी सोलर पंप योजना के प्रति किसानों का रुझान बढ़ रहा है। वर्तमान में 455 किसानों द्वारा सोलर पंप के लिए आवेदन किए गए हैं, जिनमें से मार्च एवं अप्रैल माह में 115 किसानों के खेतों में सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था किसानों की खेती की लागत कम करने के साथ उन्हें ऊर्जा के वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल स्रोत से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
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