सेना के बैंड की गूंज और नम आंखों के बीच शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट!!
रिकॉर्ड 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, अंतिम अरदास में उमड़ा आस्था का सैलाब, पाकिस्तान से आए 40 सदस्यीय सिख जत्थे ने भी देखे ऐतिहासिक पल,,
चमोली। सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब और पौराणिक श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शनिवार को विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। सेना के बैंड की मधुर धुनों, शबद-कीर्तन और अंतिम अरदास के बीच माहौल भावुक हो उठा। ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों के साथ हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। इसके साथ ही वर्ष 2026 की हेमकुंड साहिब यात्रा का समापन हो गया।
3.84 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
23 मई से शुरू हुई इस वर्ष की यात्रा में 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री हेमकुंड साहिब पहुंचकर मत्था टेका। कपाट बंद होने के अवसर पर गोविंद धाम (घांघरिया) से रागी जत्थे के साथ हजारों श्रद्धालु पवित्र धाम पहुंचे। इनमें पाकिस्तान से आया 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी शामिल रहा। बर्फ से ढकी सप्तश्रृंग घाटी के मनमोहक दृश्यों के बीच श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक भाव में लीन नजर आए।
सुखमणी साहिब के पाठ से हुई कार्यक्रमों की शुरुआत,
कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत सुबह सुखमणी साहिब के पाठ और शबद-कीर्तन के साथ धार्मिक कार्यक्रम शुरू हुए। दोपहर में वर्ष की अंतिम अरदास की गई। इसके बाद हुक्मनामा लिया गया और पंज प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रंथ साहिब को सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच दीवान हॉल से सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया। धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के बाद हेमकुंड साहिब और श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
दुर्गम रास्तों पर पुलिस और एसडीआरएफ रही मुस्तैद
इस वर्ष यात्रा के दौरान मौसम की चुनौतियों के बीच श्रद्धालुओं की सुरक्षा पुलिस और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) के लिए बड़ी जिम्मेदारी रही। बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और फिसलन भरे दुर्गम रास्तों के बावजूद सुरक्षा कर्मियों ने लगातार मुस्तैदी से ड्यूटी निभाई। पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार के नेतृत्व और निर्देशन में श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही तथा यात्रा व्यवस्थाओं पर निगरानी रखी गई।
आस्था, सेवा और समर्पण के भाव के साथ संपन्न हुई इस वर्ष की यात्रा के बाद अब हेमकुंड साहिब की पवित्र वादियां शीतकाल की बर्फबारी के बीच अगले यात्रा सीजन तक शांत रहेंगी।