हाफ मैराथन में भिवानी निवासी पिता-पुत्र की जोड़ी ने पेश की मिसाल, दोनों ने बनाया अपना बेस्ट पेस
बच्चों को उपदेश देने से कहीं बेहतर है कि माता-पिता खुद उनके सामने मिसाल बनकर खड़े हों : पूर्व सैनिक श्रीपाल यादव
भिवानी, 18 अक्तूबर : देश की राजधानी में आयोजित वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन 2026 में भिवानी से एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। स्थानीय सेक्टर-23 निवासी पूर्व सैनिक श्रीपाल यादव और उनके इंजीनियर बेटे संजीव कुमार यादव ने इस विशाल आयोजन में एक साथ कदमताल करते हुए ना केवल 21 किलोमीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय की, बल्कि दोनों ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ गति भी दर्ज किया। 41 हजार से अधिक धावकों की रिकॉर्ड भागीदारी वाले इस खेल उत्सव में पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने फिटनेस, पारिवारिक जुड़ाव और अनुशासन का शानदार संदेश दिया। इनके साथ ही शिक्षा जगत से जुड़े सेवानिवृत्त प्रिंसिपल रमेश सोरन ने भी मैराथन दौड़ पूरी कर युवाओं को अपनी ऊर्जा से प्रभावित किया।
सेना के कड़े अनुशासन में दशकों तक जीवन बिताने वाले श्रीपाल यादव के लिए यह मैराथन केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि अपने जीवन मूल्यों को अगली पीढ़ी में फलीभूत होते देखने का भावुक अवसर था। मैराथन पूरी करने के बाद उन्होंने कहा कि जिस जुनून और फिटनेस को वे वर्षों से अपनी सांसों में समाए हुए हैं, उसी लगन को अपने बेटे के भीतर दौड़ते देखना उनके जीवन के सबसे गौरवशाली पलों में से एक है। अभिभावकों के लिए संदेश साझा करते हुए श्रीपाल यादव ने कहा कि आज के दौर में बच्चों को केवल बातों से समझाना या नसीहतें देना काफी नहीं होता। माता-पिता को खुद वह आचरण करके दिखाना चाहिए, जिसकी अपेक्षा वे अपने बच्चों से करते हैं। बच्चे उपदेशों से ज्यादा बड़ों के आचरण, दिनचर्या और समर्पण से सीखते हैं। जब घर में अनुशासन और स्वास्थ्य के प्रति सजगता का माहौल दिखेगा, तो बच्चे स्वाभाविक रूप से उस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से अपील की कि जीवन की आपाधापी, पढ़ाई और करियर की होड़ के बीच सेहत को कभी पीछे न छूटने दें। पहला सुख निरोगी काया है। एक स्वस्थ शरीर ही मस्तिष्क को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और जीवन के कठिन संघर्षों से लडऩे की असीम शक्ति देता है। इसलिए करियर के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक सुदृढ़ता पर निरंतर ध्यान देना जरूरी है।
बता दे कि श्रीपाल यादव समाज और पर्यावरण के प्रति भी गहरी निष्ठा रखते हैं। वे भिवानी में नियमित पौधारोपण और लगाए गए पेड़ों के संरक्षण व देखभाल के लिए निरंतर सक्रिय रहते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया और निष्क्रिय जीवनशैली से बाहर निकलें, रोजाना खेल या व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और अपने आसपास स्वच्छता व हरियाली बढ़ाकर धरती को संवारने में अपना योगदान दें।