*संत व परमात्मा की कृपा प्राप्त होने पर परम तत्व की प्राप्ति -आचार्य रामदयालजी महाराज*
*कितना भी रूप बदल ले अपना स्वभाव नहीं छुपा सकते- संत मनोरथराम*
*श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का भव्य आयोजन जारी,कृष्ण की बाल लीलाओं का वाचन*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ), 18 सितम्बर संत की वाणी श्रवण करने को मिल जाए तो एक जन्म के पाप मिट जाते है। संत दर्शन का सौभाग्य मिल जाए तो कितना भी विषादग्रस्त हो मुक्त हो जाएगा, संत चरण स्पर्श से कोटि जन्मों के पाप समाप्त हो जाते है। संत महात्माओं की तपस्याओं का ही प्रताप होता है कि उनका सानिध्य मिलते ही पाप व संताप सब मिट जाते है ओर आत्मीय आनंद की अनुभूति होती है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने माणिक्यनगर रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आयोजित विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के छठे दिन शुक्रवार को वाणीजी प्रवचन में व्यक्त किए। भागवत ज्ञान सप्ताह के तहत व्यास पीठ से संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने विभिन्न प्रसंगों का वाचन किया।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि संत, सद्गुरू व परमात्मा की कृपा प्राप्त हो जाए तो परम तत्व की प्राप्ति हो जाती है। हमेशा उनकी कृपा के पात्र बनो। उनकी कृपा मिलने पर विभीषण को लंका का राज्य प्राप्त हो गया। संत महात्मा से पाप से मुक्त की प्रार्थना नहीं करनी पड़ती उनकी तप साधना के प्रभाव से चरणों में आने वाला पावन हो जाता है। उन्होंने बताया कि महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज ने शाहपुरा के पास रीछड़ा गांव में राम शब्द बोला तो गांव में 18 आत्माएं ऐसी हुई जिनके मन में दर्शन करते ही वैराग्य के भाव जागृत होकर संसार से विरक्ति हो गई। इनमें संयोग से दो जुड़वा भाई भी थे जो संत राम निवास व दीक्षा राम के रूप में सारा जीवन साथ रहे ओर एक सद्गुरू, एक वाणी का इष्ट ओर एक नाम साधना की।
आचार्यश्री ने कहा कि भारत संतों व ऋषियों का राष्ट्र है। वेद,पुराण, शास्त्र सभी इस बात का साक्षी दे रहे है कि विश्व में भारत एक मात्र ऐसा राष्ट्र है जो सदैव सबके कल्याण की मंगलकामना करता है। अभी राष्ट्र के सिंहासन पर विराजमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी 140 करोड़ भारतीयों को साथ लेकर चलते है। उन्होंने श्रीमद् भागवत ज्ञान महोत्सव की चर्चा करते हुए कहा कि भागवत भक्ति में डूबने वाले पर परमात्मा की कृपा रहती है। संतों के दर्शन का लाभ लेने से जीवन कल्याणकारी हो जाता है। भगवान की भक्ति का अवसर कभी नहंी छोड़ना चाहिए।
इससे पूर्व व्यास पीठ से श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े प्रसंग श्रवण कराते हुए कहा कि हम कितना भी रूप बदल ले अपने स्वभाव को नहीं छुपा सकते। इसलिए बाल कृष्ण को मारने कोई अजगर तो कोई बछड़ा बनकर आया फिर भी वह उजागर हो गया। जो विपरीतता आपके स्वभाव के कारण है वह हमेशा आपके साथ रहेगी। नाम पलटने या कपड़े बदलने से बुद्धि नहीं बदल जाती। आपकी वृति एवं आपका स्वभाव साथ जाएगा। उन्होंने कहा कि तुलसी भक्ति की प्रतीक है तो जहां भक्ति ही भक्ति है उस जगह का नाम वृन्दावन है। भगवान की भक्ति से कभी मन नहीं भरना चाहिए। एकाग्र हुए बिना भजन ओर भक्ति नहीं हो सकती। जब तक मन करे भक्ति करते रहे कभी समय मत देखे। परमात्मा को प्राप्त करना चाहते है तो इन्द्रियों के केन्द्र रूपी शरीर में विरह वेदना करनी पडेगी,साधना करनी पड़ेगी। संत मनरथराम ने कहा कि भगवान की बाल लीलाएं इतनी मनमोहक थी कि देवता भी उसे देखने मनुष्य रूप में इस धरा पर आए। उन्होंने कहा कि काम को भगवान की पूजा समझ कुशलता से करो। मन को स्वाध्याय व भजन में लगाओ। अपनी पलको को हमेशा नियंत्रण में रखे ओर बहुत जरूरी होने पर ही बोले। अनावश्यक बातों पर कभी ध्यान नहीं देना चाहिए।
आयोजन के दौरान श्रीमद् भागवत कथा के लाभार्थी परिवार द्वारा अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के पूर्व सभापति रामपाल सोनी, समाजसेवी कैलाश कोठारी, चातुर्मास आयोजन का लाभ प्राप्त करने वाले परिवार भंवरलाल अशोककुमार अजमेरा परिवार, मुरलीजी कल्याणमल ईनाणी परिवार एवं लालचंद,शिवकुमार अशोककुमार, मुकेशकुमार गगरानी परिवार का सम्मान किया गया। आचार्यश्री ने सभी के प्रति मंगलभावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि चातुर्मास आयोेजन समिति द्वारा समर्पित भाव से दी जा रही सेवाओं के कारण रामस्नेही सम्प्रदाय के इतिहास में ये चातुर्मास स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में लिखा जाएगा।
श्रीमद् भागवत के कथा के दौरान कई भजनों ने माहौल को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। चातुर्मास आयोजन समिति के अनुसार 20 सितम्बर तक चलने वाले श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा एवं सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन हो रहा है। इस आयोजन में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीलवाड़ा पहुंचे है ओर प्रतिदिन कथा श्रवण का लाभ प्राप्त कर रहे है। श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के तहत पुष्कर से आए विद्धान पंडितों द्वारा 108 भागवत का मूल पाठ रामद्वारा परिसर में किया जा रहा है। सुबह पाठ प्रारंभ करने से पूर्व इनका पूजन 108 यजमान परिवारों द्वारा किया जा रहा है। पूजा अर्चना के बाद विद्धान भागवत का मूल पाठ प्रारंभ करते है तो पूरा वातावरण मंत्रों से पावन एवं पवित्र हो जाता है। जहां मूल भागवत पाठ चल रहा होता है उस पावन नजारे का बाहर से ही सैकड़ो श्रद्धालु दर्शन करते है।