संस्कार और संस्कृति ही बनते हैं उज्जवल भविष्य का आधारः साध्वी भावना भारती जी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वाधान में सामाजिक उत्थान हेतु चल रहे प्रकल्प संपूर्ण विकास केंद्र “मंथन” की ओर से बच्चों को स्वच्छ एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने हेतु हनुमान गेट आश्रम में ‘संस्कारशाला’ आयोजित की गई। इसमें बच्चों को रसोई की स्वच्छता, भोजन तैयार करने से पहले और बाद की सावधानियाँ तथा साफ-सफाई की नियमित आदतों के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को हाथ धोने की सही विधि, खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने, बर्तनों की स्वच्छता बनाए रखने और कचरे का उचित निपटान करने जैसे विषयों से अवगत कराया गया। संस्थान की प्रचारक साध्वी सुश्री भावना भारती जी ने बड़े ही मनोरंजक ढंग से बच्चों को स्वच्छता का महत्व समझाया और बच्चों के साथ आए उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज संस्कार एवं संस्कृति से पोषित बच्चे ही कल राष्ट्र का उज्जवल भविष्य बनेंगे क्योंकि जो आज परिवार व समाज से बच्चों को मिलेगा वो ही बड़े होकर ये समाज को बाँटेंगे। इसलिए इस बात पर चिंतन मनन करना अति आवश्यक है कि प्रत्येक बच्चा अपने परिवार में रहते हुए क्या सीख रहा है, उसकी संगति कैसी है व उसके नित्य कर्म में कैसी आदतें वह अपना रहा है। साध्वी जी ने बहुत सुंदर उदाहरण देते हुए समझाया कि बच्चे उस पतंग की तरह होते हैं जो सफलता के आसमान में तभी ऊपर उड़ सकते हैं जब उसे सधे हुए हाथों से समय पर खिंचाव व ढील मिलती रहे क्योंकि अक्सर हम यहाँ गलती करते हैं कि जहाँ बच्चों को छूट देनी चाहिए, वहाँ हम उनके लिए कठोर हो जाते हैं किन्तु जहाँ कठोरता दिखानी चाहिए वहीं हम उन्हें छूट देते हैं और फिर समय निकल जाने पर वे पके हुए घड़े की भाँति हो जाते हैं जो कदाचित कभी अपना आकार नहीं बदलते। इस कार्यशाला के अंत में साध्वी बहन जी ने सभी नगर निवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि आज समाज के प्रत्येक बच्चे को ऐसी संस्कारशाला की आवश्यकता है।परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी के दिशा निर्देश हेतु कार्यरत यह संपूर्ण विकास केंद्र बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उनमें जिम्मेदारी, अनुशासन, स्वच्छता और अच्छे संस्कार विकसित करने के लिए कटिबद्ध है क्योंकि प्रत्येक बच्चा भावी राष्ट्र का नागरिक होगा और बचपन में विकसित अच्छी आदतें जीवनभर साथ रहती हैं जो परिवार व समाज में सकारात्मक बदलाव का आधार बनती हैं।
Ambala, Ambala | Oct 12, 2026