उज्जैन रोड पर कटे पेड़ों की 150 टन लकड़ी का हिसाब कहां?
नागूखेड़ी बायपास तक चौड़ीकरण में काटे गए पेड़ों की लकड़ी पर सवाल, एल्डरमैन संतोष वर्मा ने मांगी जांच
देवास। उज्जैन रोड से नागूखेड़ी बायपास तक सड़क चौड़ीकरण के लिए काटे गए पेड़ों की लकड़ी आखिर कहां गई? इससे कितनी लकड़ी मिली, उसका परिवहन कहां हुआ और फिलहाल वह किसके कब्जे में है? इन सवालों को लेकर नगर निगम में जांच की मांग उठी है। एल्डरमैन संतोष वर्मा ने नगर निगम आयुक्त को आवेदन देकर काटे गए पेड़ों और उनसे प्राप्त लकड़ी का पूरा हिसाब सामने लाने की मांग की है। उनका अनुमान है कि इस काम में 150 टन से अधिक लकड़ी प्राप्त हुई होगी, लेकिन उसकी मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं है।
तीन घंटे इंतजार के बाद भी नहीं मिला जवाब
संतोष वर्मा के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण के दौरान काटे गए पेड़ों के ठूंठ, लकड़ियां और डालियों के अवशेष मौके पर दिखाई दिए। उन्होंने इस संबंध में मौके पर मौजूद ठेकेदार के इंजीनियर अभिषेक यादव से लकड़ी की मात्रा, रखरखाव और उसके परिवहन की जानकारी मांगी। वर्मा का कहना है कि करीब तीन घंटे इंतजार करने के बाद भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
मुक्तिधाम पहुंची या नहीं लकड़ी?
वर्मा ने यह पता लगाने का प्रयास भी किया कि चौड़ीकरण के दौरान काटे गए पेड़ों की लकड़ी देवास मुक्तिधाम पहुंचाई गई है या नहीं। उनके आवेदन के मुताबिक, उन्हें मिली जानकारी में लकड़ी मुक्तिधाम तक पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई। ऐसे में सवाल है कि यदि लकड़ी वहां नहीं पहुंची, तो उसे कहां रखा गया है और उसके परिवहन का रिकॉर्ड क्या है?
हालांकि, लकड़ी की वास्तविक मात्रा और उसके गंतव्य की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल यह मामला जांच की मांग के रूप में सामने आया है।
रिकॉर्ड की जांच हो, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो
एल्डरमैन ने नगर निगम आयुक्त से मांग की है कि सड़क चौड़ीकरण में काटे गए पेड़ों की संख्या, उनसे प्राप्त लकड़ी की मात्रा और उसके परिवहन व भंडारण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों से दस्तावेज लेकर यह स्पष्ट किया जाए कि लकड़ी कहां भेजी गई और उसका उपयोग किस तरह किया जाना था।
उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, नियमों के तहत मुक्तिधाम को लकड़ी उपलब्ध कराई जानी है, तो उसे वहां पहुंचाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि अंतिम संस्कार जैसे जरूरी कार्यों में उसका उपयोग हो सके।
अब निगम से इन सवालों के जवाब जरूरी
- सड़क चौड़ीकरण में कुल कितने पेड़ काटे गए?
- उनसे कितनी लकड़ी प्राप्त हुई और 150 टन से अधिक का अनुमान किस आधार पर है?
- लकड़ी के परिवहन, भंडारण और सुपुर्दगी का रिकॉर्ड कहां है?
- क्या लकड़ी देवास मुक्तिधाम पहुंचाई गई? यदि नहीं, तो उसका वर्तमान ठिकाना क्या है?
इन सवालों का जवाब नगर निगम के रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा। अब देखना होगा कि निगम प्रशासन इस मांग पर क्या कदम उठाता है और कटे पेड़ों से प्राप्त लकड़ी की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक होती है या नहीं।