जल स्थायित्व के लिए पंचायती राज संस्थाओं का क्षमता संवर्धन
“जल स्थायित्व बुंदेलखंड कार्यक्रम” के अंतर्गत सोसायटी फोर डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स ताराग्राम संस्थान द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
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बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट के स्थायी समाधान, ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सोसाइटी फॉर डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स), ताराग्राम ओरछा द्वारा “जल स्थायित्व बुंदेलखंड कार्यक्रम” के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) हेतु एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य चयनित 17 ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, पानी समिति (VWSC) के सदस्यों एवं पंप ऑपरेटरों की तकनीकी एवं संस्थागत क्षमता को मजबूत करना तथा ग्राम स्तर पर पेयजल योजनाओं के प्रभावी संचालन, अनुरक्षण और स्थायित्व के लिए उन्हें आवश्यक जानकारी एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था।
जल प्रबंधन में पंचायतों की भूमिका पर जोर
कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत पूर्ण हो चुकी पेयजल योजनाओं के ग्राम पंचायतों को हस्तांतरण, योजनाओं के संचालन एवं अनुरक्षण तथा विभिन्न हितधारकों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को JJM 2.0 के दिशा-निर्देशों, स्मार्ट वॉटर सप्लाई, ग्रे-वॉटर प्रबंधन तथा ग्राम स्तर पर जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों से भी अवगत कराया गया।
विशेषज्ञों ने ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) में जल संरक्षण, सोख्ता गड्ढों, रिचार्ज संरचनाओं, स्वच्छता एवं ग्रे-वॉटर प्रबंधन जैसे कार्यों को प्राथमिकता के साथ शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संचालन एवं अनुरक्षण को बनाया जाए सामुदायिक जिम्मेदारी
कार्यशाला में नल-जल योजनाओं की दीर्घकालिक कार्यक्षमता के लिए संचालन एवं अनुरक्षण (O&M) को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। प्रतिभागियों को नियमित तकनीकी रखरखाव, छोटी-मोटी मरम्मत, विद्युत बिलों के भुगतान तथा योजनाओं के संचालन हेतु नियमित जल शुल्क संग्रह की आवश्यकता समझाई गई।
इसके साथ ही ग्राम स्तर पर पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच के लिए फील्ड टेस्ट किट (FTK) के उपयोग, आवश्यकतानुसार क्लोरीनीकरण तथा पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के विषय में भी व्यावहारिक जानकारी दी गई।
जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण पर विशेष ध्यान
बुंदेलखंड जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्र में जल स्रोतों की स्थिरता बनाए रखने के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, भूजल पुनर्भरण एवं जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। प्रतिभागियों को ग्राम स्तर पर उपलब्ध जल स्रोतों के संरक्षण और उनके आसपास उपयुक्त रिचार्ज उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
महिलाओं की भागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पेयजल योजनाओं की सफलता केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से नहीं, बल्कि समुदाय की सक्रिय भागीदारी और स्वामित्व से सुनिश्चित होती है। ग्रामवासियों में जल योजनाओं के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने तथा पानी समितियों में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने को महत्वपूर्ण बताया गया।
सोसाइटी फॉर डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (DA) पिछले चार दशकों से बुंदेलखंड क्षेत्र में जल प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, सतत विकास और सामुदायिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। संस्था द्वारा इस कार्यशाला के माध्यम से स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करते हुए ग्राम पंचायतों को अपने पेयजल संसाधनों एवं योजनाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए सक्षम बनाने की दिशा में पहल की गई।
कार्यशाला का निष्कर्ष
कार्यशाला में प्रतिभागियों ने ग्राम स्तर पर जल योजनाओं के संचालन, जल गुणवत्ता, जल संरक्षण, O&M तथा सामुदायिक सहभागिता से संबंधित विषयों पर सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए।
यह क्षमता संवर्धन पहल निवाड़ी जिले की ग्राम पंचायतों को जल प्रबंधन में अधिक सक्षम, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय स्तर पर तकनीकी एवं प्रशासनिक क्षमता मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी एवं दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
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