मऊ में अर्णव चक्रवात की मार से किसानों की कमर टूटी, धान की फसल खेतों में बिछी
खेतों में जलभराव से धान के साथ रबी की फसलों पर भी संकट, किसान नेता राकेश सिंह ने उठाई मुआवजे की मांग, बोले- प्लांट टू प्लांट हो नुकसान का सर्वे
मऊ, अर्णव चक्रवात के प्रभाव से जिले में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में पककर तैयार धान की फसल जमीन पर बिछ गई है, जबकि जलभराव से रबी की फसलों पर भी संकट मंडराने लगा है। पहले से ही खेती की बढ़ती लागत और कर्ज के बोझ से जूझ रहे किसानों के सामने अब आर्थिक संकट गहरा गया है। ऐसे में किसानों की निगाहें सरकार की राहत और मुआवजे पर टिकी हैं। इस बीच जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा किसान नेता राकेश सिंह ने किसानों की क्षति का मुद्दा उठाते हुए जिला प्रशासन से खेतों का निष्पक्ष एवं वास्तविक सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है।
पकी धान की फसल गिरी, पैदावार पर पड़ेगा असर
भाजपा किसान नेता राकेश सिंह ने कहा कि जिले में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश, आंधी और तेज हवाओं के कारण धान की फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। खेतों में पककर तैयार खड़ी फसल गिर गई है। वहीं, खेतों में पानी भरने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली थी, उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि देर से पकने वाली धान की किस्म नाटी मंसूरी (एमटीयू-7029) में बाली निकलने के बाद तेज हवा और बारिश से फसल जमीन पर गिर गई है। इससे पैदावार पर करीब 50 प्रतिशत तक प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। यदि समय रहते नुकसान का आकलन कर किसानों को सहायता नहीं मिली, तो उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है।
एक बीघा धान की खेती पर 15 हजार रुपये तक लागत
राकेश सिंह के मुताबिक, धान की खेती में जुताई से लेकर रोपाई, दवा, सोहनी, सिंचाई और मजदूरी तक का खर्च जोड़ने पर एक बीघा फसल तैयार करने में करीब 15 हजार रुपये तक की लागत आती है। ऐसे में फसल बर्बाद होने से किसानों की पूरी मेहनत और पूंजी पर संकट खड़ा हो गया है। कई किसान बैंकों से कर्ज लेकर खेती करते हैं। फसल खराब होने पर उनके सामने कर्ज चुकाने के साथ ही परिवार का भरण-पोषण करने और अगली फसल की तैयारी करने की चुनौती भी खड़ी हो जाती है।
रबी की फसलों पर भी मंडराया नुकसान का खतरा
उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने अपने खेतों में सरसों, मटर, मसूर और आलू की बुवाई कर दी है, उन खेतों में पानी भरने से इन फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। यदि खेतों से पानी की निकासी नहीं हुई और मौसम का प्रतिकूल प्रभाव जारी रहा, तो रबी की खेती भी प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।
'प्लाट टू प्लाट हो सर्वे, तभी सामने आएगी नुकसान की सही तस्वीर'
किसानों की समस्याओं को देखते हुए राकेश सिंह ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का आकलन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए। प्रत्येक खेत में जाकर प्लांट टू प्लांट यानी फसल की वास्तविक स्थिति के आधार पर सर्वे कराया जाए, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके और पात्र किसानों को समय से मुआवजा मिल सके।
उन्होंने कहा कि बारिश और तेज हवा से गांवों में कई किसानों के कच्चे मकान भी गिर गए हैं। ऐसे प्रभावित परिवारों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उन्हें भी नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
पिछले साल की क्षति का भी उठाया मुद्दा, मुआवजा न मिलने का आरोप
राकेश सिंह ने पिछले वर्ष 29 अक्टूबर से 1 नवंबर 2025 तक मोनथा चक्रवात के दौरान हुई बारिश का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने के कारण अनेक किसान रबी की फसलों की बुवाई तक नहीं कर सके थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष फसल क्षति का सर्वे कागजों में किया गया, लेकिन प्रभावित किसानों को एक रुपये की भी सहायता नहीं मिली। उनके मुताबिक, तत्कालीन अपर जिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने किसान दिवस में बताया था कि रतनपुरा ब्लॉक के 297 किसानों की फसल क्षति की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है और उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, राकेश सिंह का कहना है कि संबंधित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है।
किसानों को दोहरी मार से उबारने के लिए शीघ्र राहत जरूरी
राकेश सिंह ने प्रशासन और शासन से मांग की कि वर्तमान में हुई फसल क्षति का तत्काल स्थलीय सत्यापन कराया जाए और प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका खेती पर निर्भर है। ऐसे में फसल बर्बाद होने के बाद उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिलना बेहद जरूरी है, ताकि वे कर्ज के बोझ से उबरने के साथ ही अगली फसल की तैयारी कर सकें और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।