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Mau live

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विधायक अब्बास अंसारी का शायराना अंदाज 
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अब्बास अंसारी सदर विधायक मऊ ने बीजेपी के युवा नेता 'शक्ति सिंह' को अपना भाई बताया!
शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर बोले जिलाधिकारी आनंद वर्धन
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मऊ के ऐतिहासिक भरत मिलाप की झलकियां 
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रोडवेज बस की लापरवाही से बाइक सवार पीछे से जा घुसा, CCTV वीडियो आया सामने!
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शिक्षक MLC चुनाव में अजीत कुमार सिंह ने किया जीत का दावा 
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भरत मिलाप देखने के लिए उमड़ी भीड़
मऊ का ऐतिहासिक भरत मिलाप
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मऊ में दो भाइयों पर चाकू से जानलेवा हमला,BHU रेफर 
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महिला से अश्लील बात करना पड़ा चौकी इंचार्ज महंगा, लाइन हाजिर 
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ऐतिहासिक भरत मिलाप पर याद आए पूर्व अध्यक्ष मदन बाबू, भरत लाल राही ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
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हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद, भारत मिलाप को लेकर तैयारियां पूरी, सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद प्रशासन

मऊ, मऊ के ऐतिहासिक भारत मिलाप के अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भरत लाल राही ने कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राजा अलक्षेन्द्र विक्रम सिंह उर्फ मदन बाबू को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें याद किया। कुछ महीने पहले हृदयाघात से हुए उनके निधन को याद करते हुए राही ने कहा कि मदन बाबू का योगदान केवल रामलीला कमेटी तक सीमित नहीं था, बल्कि वे आर्थिक रूप से कमजोर कई मेलों और दुर्गा पूजा समितियों का संचालन भी स्वयं करते थे और उनके आयोजन का खर्च भी उठाते थे। आज उनके न रहने से उनकी कमी गहराई से महसूस हो रही है।

भरत लाल राही ने मदन बाबू को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए मऊ के ऐतिहासिक भारत मिलाप की गौरवशाली परंपरा और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत मिलाप मऊ की पहचान और आस्था का प्रमुख प्रतीक है, जिसे देखने के लिए हर वर्ष दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचते हैं।

उन्होंने बताया कि इस बार मेले में पुलिस बल की तैनाती अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। वहीं, ऐतिहासिक भारत मिलाप को लेकर भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रशासन भी सुरक्षा एवं व्यवस्था को लेकर मुस्तैद है।

भरत लाल राही ने विश्वास जताया कि जनसहयोग और प्रशासनिक सतर्कता के बीच मऊ का ऐतिहासिक भारत मिलाप अपनी गौरवशाली परंपरा के अनुरूप भव्यता के साथ संपन्न होगा।
मऊ केसरी जंगपाल सिंह की याद में सजा ऐतिहासिक दंगल!

अखाड़े में गूंजा पहलवानों का दमखम, विजयदशमी पर आदेडीह में दिखा कुश्ती का जुनून!

 मऊ | आदेडीह गांव

विजयदशमी के पावन अवसर पर आदेडीह गांव में स्वर्गीय मऊ केसरी जंगपाल सिंह पहलवान की स्मृति में भव्य दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विभिन्न जिलों से पहुंचे पहलवानों ने अपने शानदार दांव-पेच और दमदार प्रदर्शन से दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।

1972 में हासिल किया था मऊ केसरी का खिताब!
स्वर्गीय जंगपाल सिंह पहलवान का जन्म 11 अक्टूबर 1952 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1972 में मऊ केसरी का खिताब हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। कुश्ती के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने वर्ष 1980 में भलया गांव में अखाड़े की स्थापना कर नई पीढ़ी के पहलवानों को तैयार करने की पहल की।

उनकी विरासत को जीवंत रखने के लिए उनके पुत्र राज नारायण सिंह, हृदय नारायण सिंह, जय नारायण सिंह और संजय कुमार सिंह हर वर्ष विजयदशमी पर स्मृति दंगल का आयोजन कराते हैं।

खेल में दम है तो रोजगार के अवसर भी हैं!
राष्ट्रीय स्तर के पहलवान और भारतीय रेलवे में कार्यरत मंगल सिंह ने कहा कि खेल केवल शारीरिक ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि रोजगार पाने और जीवन में आगे बढ़ने का भी सशक्त माध्यम है। खेलों से अनुशासन, मेहनत और चरित्र निर्माण होता है।

युवाओं को आधुनिक अखाड़े और बेहतर सुविधाएं देने की जरूरत!
यूपी केसरी रह चुके पहलवान एवं अखाड़ा संचालक तेज बहादुर सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत है उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और उचित मंच उपलब्ध कराने की। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

 कुश्ती सिर्फ खेल नहीं, संस्कार और आत्मविश्वास की पहचान है!

अनुशासन, संघर्ष, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का जज्बा पैदा करने वाली कुश्ती की परंपरा को बचाना आज समय की मांग है। ग्रामीण अंचलों में अखाड़ों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि मऊ की मिट्टी से निकलने वाले पहलवान देश-दुनिया में अपनी पहचान बना सकें। 

 मिट्टी का मान, पहलवानों का सम्मान और गुरुजनों की विरासत को सलाम!
 स्वर्गीय मऊ केसरी जंगपाल सिंह पहलवान को विनम्र श्रद्धांजलि!

 आपकी राय में क्या गांव-गांव में आधुनिक कुश्ती अखाड़े बनने चाहिए? कमेंट करके जरूर बताएं।

पोस्ट को शेयर करें और मऊ की इस गौरवशाली कुश्ती परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।

 सुनिए वीडियो में तेज बहादुर सिंह और मंगल सिंह ने क्या कहा —

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मऊ केसरी जंगपाल सिंह की याद में सजा ऐतिहासिक दंगल!

अखाड़े में गूंजा पहलवानों का दमखम, विजयदशमी पर आदेडीह में दिखा कुश्ती का जुनून!

 मऊ | आदेडीह गांव

विजयदशमी के पावन अवसर पर आदेडीह गांव में स्वर्गीय मऊ केसरी जंगपाल सिंह पहलवान की स्मृति में भव्य दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विभिन्न जिलों से पहुंचे पहलवानों ने अपने शानदार दांव-पेच और दमदार प्रदर्शन से दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।

1972 में हासिल किया था मऊ केसरी का खिताब!
स्वर्गीय जंगपाल सिंह पहलवान का जन्म 11 अक्टूबर 1952 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1972 में मऊ केसरी का खिताब हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। कुश्ती के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने वर्ष 1980 में भलया गांव में अखाड़े की स्थापना कर नई पीढ़ी के पहलवानों को तैयार करने की पहल की।

उनकी विरासत को जीवंत रखने के लिए उनके पुत्र राज नारायण सिंह, हृदय नारायण सिंह, जय नारायण सिंह और संजय कुमार सिंह हर वर्ष विजयदशमी पर स्मृति दंगल का आयोजन कराते हैं।

खेल में दम है तो रोजगार के अवसर भी हैं!
राष्ट्रीय स्तर के पहलवान और भारतीय रेलवे में कार्यरत मंगल सिंह ने कहा कि खेल केवल शारीरिक ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि रोजगार पाने और जीवन में आगे बढ़ने का भी सशक्त माध्यम है। खेलों से अनुशासन, मेहनत और चरित्र निर्माण होता है।

युवाओं को आधुनिक अखाड़े और बेहतर सुविधाएं देने की जरूरत!
यूपी केसरी रह चुके पहलवान एवं अखाड़ा संचालक तेज बहादुर सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत है उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और उचित मंच उपलब्ध कराने की। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

 कुश्ती सिर्फ खेल नहीं, संस्कार और आत्मविश्वास की पहचान है!

अनुशासन, संघर्ष, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का जज्बा पैदा करने वाली कुश्ती की परंपरा को बचाना आज समय की मांग है। ग्रामीण अंचलों में अखाड़ों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि मऊ की मिट्टी से निकलने वाले पहलवान देश-दुनिया में अपनी पहचान बना सकें। 

 मिट्टी का मान, पहलवानों का सम्मान और गुरुजनों की विरासत को सलाम!
 स्वर्गीय मऊ केसरी जंगपाल सिंह पहलवान को विनम्र श्रद्धांजलि!

 आपकी राय में क्या गांव-गांव में आधुनिक कुश्ती अखाड़े बनने चाहिए? कमेंट करके जरूर बताएं।

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 सुनिए वीडियो में तेज बहादुर सिंह और मंगल सिंह ने क्या कहा —

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मिट्टी के अखाड़ों ने दिए मऊ को नामचीन पहलवान, लेकिन आज भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार

विजयदशमी पर भाजपा नेता विजय प्रताप सिंह ने स्व. राज किशोर सिंह को दी श्रद्धांजलि, पहलवानों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की उठाई मांग

मऊ, विजयदशमी के पावन अवसर पर आदेडीह गांव में भाजपा नेता एवं समाजसेवी विजय प्रताप सिंह ने प्रसिद्ध पहलवान स्वर्गीय राज किशोर सिंह के आवास पर पहुंचकर उनके चित्र पर माल्यार्पण किया और परिजनों से मुलाकात कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में कुश्ती की समृद्ध परंपरा और पहलवानों को तैयार करने में स्व. राज किशोर सिंह के योगदान को याद किया।
विजय प्रताप सिंह ने कहा कि स्व. राज किशोर सिंह अपने समय के प्रसिद्ध पहलवान थे। उन्होंने अनेक युवाओं को कुश्ती की बारीकियां सिखाकर इस विधा में पारंगत बनाया। उनके शिष्य जंगपाल सिंह ने वर्ष 1972 में मऊ केसरी का खिताब हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया। उनके अखाड़े से निकले कई पहलवानों ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इतना ही नहीं, अनेक पहलवानों ने खेल के दम पर सरकारी नौकरियां हासिल कर अपना भविष्य भी संवारा।

उन्होंने कहा कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है, लेकिन धरातल पर पहलवानों को अब भी आधुनिक सुविधाओं, बेहतर प्रशिक्षण और जरूरी संसाधनों का इंतजार है। जनप्रतिनिधियों को कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों के विकास के लिए ठोस पहल करनी चाहिए, ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का उचित अवसर मिल सके।

विजय प्रताप सिंह ने कहा कि संसाधनों के अभाव के बावजूद पुराने पहलवानों और उनके परिवारों का हौसला नहीं टूटा है। आज भी पारंपरिक मिट्टी के अखाड़ों में बच्चों को कुश्ती के दांव-पेच सिखाकर नई प्रतिभाएं तैयार की जा रही हैं। इसी परंपरा के दम पर स्थानीय स्तर के अनेक युवा केंद्र और प्रदेश सरकार में नौकरी प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कुश्ती की इस विरासत को संरक्षित करने और युवा पहलवानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मऊ केसरी जंगपाल सिंह की याद में सजा भव्य दंगल! 

 आदेडीह, मऊ | विजयदशमी विशेष

अखाड़े में गूंजा पहलवानों का दमखम, दांव-पेच देखकर रोमांचित हुए दर्शक!

विजयदशमी के पावन अवसर पर आदेडीह गांव में स्वर्गीय मऊ केसरी जंगपाल सिंह पहलवान की स्मृति में भव्य दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विभिन्न जिलों से पहुंचे पहलवानों ने अपने शानदार दांव-पेच और दमदार प्रदर्शन से कुश्ती प्रेमियों का दिल जीत लिया। 

 कौन थे मऊ केसरी जंगपाल सिंह?
जंगपाल सिंह पहलवान ने वर्ष 1972 में मऊ केसरी का खिताब हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। वर्ष 1980 में भलया गांव में अखाड़े की स्थापना कर उन्होंने नई पीढ़ी के पहलवानों को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। आज भी उनके परिवार द्वारा हर वर्ष विजयदशमी पर दंगल आयोजित कर उनकी विरासत को जीवंत रखा जा रहा है।

 पहलवानों के भविष्य पर विजय प्रताप सिंह ने उठाई अहम आवाज!
भाजपा नेता एवं समाजसेवी विजय प्रताप सिंह ने कहा कि स्वर्गीय जंगपाल सिंह की प्रेरणा से तैयार पहलवानों ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया तथा खेल के दम पर सरकारी नौकरियां भी हासिल कीं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर पहलवानों को आधुनिक प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है।

 सुनिए इस खास वीडियो में विजय प्रताप सिंह ने क्या कहा!

वीडियो को अंत तक जरूर देखें और अपनी राय कमेंट में बताएं।

 कुश्ती हमारी परंपरा, हमारे गांवों की पहचान और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का आधार है। आइए, मिट्टी के अखाड़ों की इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाएं!
 वीडियो पसंद आए तो लाइक करें।  मऊ की इस गौरवशाली परंपरा को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए शेयर करें।

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Video 15
मऊ का ऐतिहासिक दसई पोखरा मेला 
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मऊ के दसई पोखरा में इस तरह से हुआ रावण दहन 
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दशई पोखरा
आदेडीह गांव स्व. जंगपाल सिंह पहलवान स्मृति दंगल प्रतियोगिता
यह कहां का दुर्गा पूजा पंडाल है? कमेंट में बताएं और इसमें कौन-कौन से लोग दिख रहे हैं, अपने आप को पहचाने!
यह कहां के दुर्गा पंडाल में डांडिया हो रहा है? देखें और कमेंट बॉक्स में बताएं!
देवेंद्र प्रताप सिंह की पोस्ट से यूपी की सियासत में हलचल, बोले- अन्याय और अपमान के खिलाफ दें वोट

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव से चार दिन पहले भाजपा एमएलसी की शिक्षकों से भावुक अपील, मंच से उतारे जाने की घटना से जोड़कर देखी जा रही पोस्ट

गोरखपुर, गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव से पहले भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलचल तेज कर दी है। 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले उन्होंने शिक्षकों से “अन्याय और अपमान के खिलाफ” वोट करने की अपील की है। उनकी इस पोस्ट को 12 अक्टूबर को गोरखपुर में आयोजित शिक्षक सम्मेलन के दौरान मंच से उतारे जाने की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।

देवेंद्र प्रताप सिंह ने 19 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे शिक्षकों के नाम हाथ से लिखा एक पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया। इसमें उन्होंने शिक्षक समुदाय और प्रतियोगी युवाओं को अपना परिवार बताते हुए न्याय के लिए उनके संघर्ष का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने लिखा कि जिन शिक्षकों को उनके संघर्ष पर विश्वास है और जो उनके प्रति स्नेह व सम्मान रखते हैं, वे 23 अक्टूबर को अन्याय और अपमान के खिलाफ सशक्त जनादेश दें।

गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित शिक्षक सम्मेलन के दौरान देवेंद्र प्रताप सिंह मंच पर जा रहे थे, तभी भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय द्वारा उन्हें मंच से उतारे जाने की घटना सामने आई थी। इस घटनाक्रम को देवेंद्र प्रताप सिंह के अपमान से जोड़कर देखा गया। अब चुनाव से ठीक पहले उनकी भावुक अपील ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
उधर, भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर डॉ. संजय त्रिपाठी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया था। बाद में समाजवादी पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना लिया। सपा समर्थक देवेंद्र प्रताप सिंह की पोस्ट को अपने पक्ष में माहौल बनाने वाला बता रहे हैं। हालांकि, पोस्ट में उन्होंने किसी प्रत्याशी का नाम लेकर समर्थन या विरोध नहीं किया है।

छात्र राजनीति से विधान परिषद तक का सफर
गोरखपुर के भौवापार गांव निवासी देवेंद्र प्रताप सिंह ने छात्रनेता के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। वर्ष 1998 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया और वे पहली बार विधान परिषद पहुंचे। वर्ष 2004 में भाजपा के डॉ. वाईडी सिंह ने उन्हें चुनाव में पराजित किया। वर्ष 2010 में देवेंद्र प्रताप सिंह ने सपा के टिकट पर वापसी करते हुए जीत दर्ज की।
अखिलेश यादव सरकार के दौरान युवाओं और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने के बाद उन्होंने सपा छोड़ दी और वर्ष 2015 में भाजपा में शामिल हो गए। वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता। वर्ष 2023 में भी भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर विधान परिषद पहुंचे।

अब शिक्षक एमएलसी चुनाव से ठीक पहले उनकी पोस्ट ने राजनीतिक समीकरणों और चुनावी माहौल को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
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