विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर माल्हनवाड़ा में व्याख्यानमाला आयोजित
डॉ.पवन नेमा एवं डॉ.रश्मि नेमा ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व की दी जानकारी
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जिला आयुष अधिकारी डॉ. प्रमिला यावतकर के निर्देशानुसार आयुष्मान आरोग्य मंदिर माल्हनवाड़ा द्वारा शासकीय शाला माल्हनवाड़ा में भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य विषय पर आज विशेष व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य द्वारा मां सरस्वती के पूजन के साथ किया गया। इस दौरान विशेषज्ञ वक्ताओं ने प्राचीन भारतीय परंपराओं में मानसिक स्वास्थ्य की अवधारणाओं तथा वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता डॉ. पवन नेमा ने मानसिक विकारों और विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के विचारों, भावनाओं, मनोदशा और व्यवहार को प्रभावित करता है। वर्तमान समय में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं गंभीर चुनौती बन रही हैं। पढ़ाई, परीक्षा, सामाजिक अपेक्षाओं और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के कारण विद्यार्थियों को मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और समग्र व्यक्तित्व पर पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, अपनी समस्याएं साझा करने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों से परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जागरूकता, समय पर सहायता और सकारात्मक सोच के माध्यम से कई मानसिक समस्याओं का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।
डॉ. रश्मि नेमा ने मानसिक स्वास्थ्य को भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति किस प्रकार सोचता है, महसूस करता है और व्यवहार करता है, यह उसके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। स्वस्थ मानसिक स्थिति जीवन की चुनौतियों का सामना करने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और दूसरों के साथ सकारात्मक संबंध स्थापित करने में सहायक होती है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम, ध्यान और तनाव प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया।
आयुर्वेद के सत्त्व, रज और तम गुणों की व्याख्या करते हुए डॉ. रश्मि नेमा ने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की अवधारणाओं के माध्यम से जीवन में संतुलन का महत्व समझाया। विद्यार्थियों के लिए मानसिक व्यायाम एवं सहभागितापूर्ण गतिविधियां भी आयोजित की गईं। उन्होंने कहा कि मानसिक समस्याओं से निपटने के लिए विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन, सहानुभूति, भावनात्मक सहयोग और आवश्यक सहायता संसाधन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। परिवार, मित्रों और समाज के साथ मजबूत संबंध मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम प्रभारी श्री श्यामल राव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा मानसिक स्वास्थ्य को समग्र दृष्टिकोण से देखती है, जिसमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण का विशेष महत्व है। योग, व्यायाम, ध्यान, प्राणायाम और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक पद्धतियां मानसिक संतुलन एवं आंतरिक शांति बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं।
कार्यक्रम का मंच संचालन सुश्री मीनाक्षी श्रीवास ने किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को वैश्विक स्तर की महत्वपूर्ण चुनौती बताते हुए इस विषय पर निरंतर संवाद और परिचर्चा की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में समन्वयक डॉ. अंकुश साहू, विद्यालय के विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ प्राध्यापक, शिक्षकगण, अन्य स्टाफ सदस्य तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे ।
व्याख्यानमाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों से परिचित कराना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
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