
बेगूसराय में 3.80 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित, 269 नावें और 62 चिकित्सा दल तैनात
बेगूसराय (बी के गुलशन)। जिले में गंगा एवं बूढ़ी गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति लगातार बनी हुई है। बाढ़ की वर्तमान स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा आगामी तैयारियों को लेकर गुरुवार को समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभा भवन में आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार के मंत्री श्री रत्नेश सादा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिला पदाधिकारी श्री रिची पांडेय, पुलिस अधीक्षक श्री मनीष, बेगूसराय विधायक श्री कुंदन कुमार, अपर समाहर्ता श्री बृज किशोर चौधरी, नगर आयुक्त श्री सोमेश बहादुर माथुर सहित जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं अभियंता मौजूद रहे।
8 अंचलों के 189 गांव बाढ़ की चपेट में
समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में जिले के आठ अंचलों, दो नगर निकाय एवं 37 पंचायतों में बाढ़ का प्रभाव है। कुल 189 गांव और 325 वार्ड प्रभावित हैं। बाढ़ से जिले की करीब 3,80,980 आबादी प्रभावित हुई है।
गंगा नदी का जलस्तर दीघा, गांधी घाट, हाथीदह एवं मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। वहीं बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर खगड़िया में भी खतरे के निशान से ऊपर है। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र 24 घंटे सक्रिय है और नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
269 नावों से जारी है आवागमन
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों तथा आवागमन के लिए कुल 269 नावें संचालित की जा रही हैं। इनमें 23 सरकारी और 246 निजी नाव शामिल हैं। बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी एवं शाम्हो में एसडीआरएफ की प्रतिनियुक्ति की गई है, जबकि बलिया में एनडीआरएफ की टीम तैनात है।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच पॉलीथीन शीट का वितरण भी जारी है। जिले में उपलब्ध 41,880 पॉलीथीन शीट में से अब तक 29,351 शीट जरूरतमंद परिवारों के बीच वितरित की जा चुकी हैं।
182 सामुदायिक रसोई संचालित
बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिले में 228 सामुदायिक रसोई केंद्र चिन्हित किए गए हैं, जिनमें वर्तमान में 182 केंद्र संचालित हैं। 9 सितंबर की शाम तक इन सामुदायिक रसोई के माध्यम से कुल 5,79,521 थाली भोजन कराया जा चुका है।
इसके अलावा 80 बाढ़ राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं, जहां प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवा सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
82 हजार से अधिक लोगों का इलाज
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी व्यापक व्यवस्था की गई है। कुल 62 चिकित्सा दल कार्यरत हैं, जिनमें 14 चलंत, 19 अस्थायी एवं 29 स्थायी चिकित्सा दल शामिल हैं। इसके साथ ही चार बोट एंबुलेंस भी संचालित हैं।
सदर अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश रोधी दवा, ओआरएस, क्लोरीन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर सहित 122 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। अब तक 82,312 लोगों का चिकित्सा परीक्षण एवं उपचार किया जा चुका है।
39 हजार से अधिक पशु प्रभावित
बाढ़ के कारण पशुधन पर भी असर पड़ा है। पशुओं की देखभाल के लिए 46 पशु शिविर और आठ मेडिकल वैन संचालित किए जा रहे हैं। अब तक 39,375 पशु प्रभावित हुए हैं, जिनमें 7,909 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। पशुपालकों के बीच 1,418.05 क्विंटल पशुचारा वितरित किया गया है।
सभी 20 तटबंध सुरक्षित
बैठक में तटबंधों की सुरक्षा की भी समीक्षा की गई। जल संसाधन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। बेगूसराय, मंझौल, बलिया, तेघड़ा एवं बखरी क्षेत्र के सभी 20 तटबंध, जिनमें 10 मुख्य तटबंध और 10 जमींदारी बांध शामिल हैं, सुरक्षित पाए गए हैं। संवेदनशील स्थलों पर कटाव निरोधक कार्य भी पूर्ण कर लिए गए हैं।
पेयजल और फसल क्षति पर भी नजर
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नियमित जल स्रोतों के अलावा जरूरत के अनुसार टैंकरों से भी पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। क्षतिग्रस्त चापाकलों की मरम्मत के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं।
कृषि क्षेत्र की समीक्षा में बताया गया कि जिले में बाढ़ संभावित कृषि क्षेत्र 27,034 हेक्टेयर है, जिसमें 33 प्रतिशत से अधिक प्रभावित क्षेत्र 19,504 हेक्टेयर आंका गया है। प्रभावित किसानों के लिए वैकल्पिक फसल योजना एवं बीज वितरण की तैयारी की गई है।
मंत्री ने दिए संवेदनशीलता के साथ राहत कार्य चलाने के निर्देश
समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री श्री रत्नेश सादा ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित लोगों की जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ संचालित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पात्र परिवारों को भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा, पशुचारा एवं अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। तटबंधों एवं संवेदनशील स्थलों पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
जिला पदाधिकारी श्री रिची पांडेय ने कहा कि जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को क्षेत्र में सक्रिय रहकर राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी ढंग से संचालित करने का निर्देश दिया गया है। प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सामुदायिक रसोई, राहत शिविर, नाव परिचालन, चिकित्सा, पशु चिकित्सा एवं पेयजल समेत सभी आवश्यक सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।
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