
रानी लक्ष्मीबाई ने राखी भेज नवाब बांदा से मांगी थी मदद
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल, इतिहास में दर्ज है नवाब और रानी की साझा लड़ाई
बांदा। बुंदेलखंड में रक्षाबंधन का पर्व सांप्रदायिक सौहार्द का पैगाम देता है। यहां यह कहानी पीढ़ियों से सुनाई जाती है कि जंग-ए-आजादी में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने बांदा के नवाब अली बहादुर द्वितीय को राखी भेजकर मदद मांगी थी।
राखी के साथ लक्ष्मीबाई ने नवाब को यह पाती भी भेजी थी कि हमारी राय है कि विदेशियों का शासन भारत पर न होना चाहिए। अंग्रेजों से लड़ना बहुत जरूरी है। बहन की लाज खतरे में है, अंग्रेजों ने झांसी को घेर लिया है, मेरी मदद करो।
बांदा में नवाब अली बहादुर सानी द्वितीय का शासन था। नवाब और अंग्रेजी फौज में जंग छिड़ गयी। यह लड़ाई एक हफ्ते तक चली। नवाब की विजय हुयी। उधर रानी लक्ष्मीबाई ने भी अंग्रेजों से मोर्चा खोल लिया। अंग्रेजी फौज ने झांसी के किले को चारों तरफ से घेर लिया। झांसी जाने वाले रास्ते बंद कर दिये गये। अंग्रेजी फौज मंदिरों की आड़ लेकर किले पर बमबारी कर रही थी।
उधर रानी लक्ष्मीबाई के तोपची गुलाम गौस अपनी तोप कड़क बिजली से जवाबी हमला करते हुए अंग्रेजों के छक्के छुड़ा रहा था। इसी बीच रानी लक्ष्मीबाई ने अपने एक सिपहसालार के हाथ बांदा नवाब अली बहादुर को राखी भेजी।
नवाब बांदा ने राखी का पूरा सम्मान किया। नवाब अपने दस हजार जवानों की फौज को लेकर जंगलों के रास्ते झांसी की ओर रवाना हो गये। नवाब ने लक्ष्मीबाई को झांसी में अंग्रेजों से घिरा देख अंग्रेजी फौज पर हमला कर दिया। तमाम अंग्रेज फौजी मारे गये।
झांसी की रानी ने बानपुर के राजा अरिमर्दन सिंह को भी मदद के लिए ऐसा ही पत्र भेजा था। अरिमर्दन सिंह ने भी नवाब की फौज में शामिल होकर मुंह बोली बहन लक्ष्मीबाई की मदद की थी।
*इतिहास की सच्चाई:*
यहां यह बताना जरूरी है कि राखी वाले पत्र की मूल प्रति आज तक किसी सरकारी अभिलेखागार में नहीं मिली है, यह बुंदेलखंड की लोक-स्मृति है। लेकिन यह बात पूरी तरह दस्तावेजों में दर्ज है कि नवाब अली बहादुर द्वितीय बाजीराव पेशवा और मस्तानी के वंशज थे और उन्होंने 1857-58 में कालपी और ग्वालियर तक रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इस बगावत के बाद अंग्रेजों ने बांदा रियासत जब्त कर ली थी।
आज भी इसकी मिसाल बांदा में देखने को मिलती है। रक्षाबंधन पर्व पर हर वर्ष बड़ी तादाद में हिंदू बहनें अपने मुंह बोले मुस्लिम भाईयों को राखी बांधती या भेजती हैं। मुंह बोले यह भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं।
Atarra, Banda | Aug 27, 2026