
💥 देहरादून: दूरस्थ गांवों से सिविल सेवा तक का सफर; 19 लाख रुपये की लागत से बने हाईटेक सेंटर से दिव्यांग विद्यार्थियों के सपने हो रहे साकार, जल्द शुरू होगी बैंकिंग-एसएससी की कोचिंग 💥
देहरादून (22 अक्टूबर 2026): पहाड़ के दुर्गम और दूरदराज के गांवों में बैठकर प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अब भौगोलिक दूरी और संसाधनों की कमी राह का रोड़ा नहीं बन रही है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अनुरूप समाज कल्याण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के संयुक्त प्रयासों से राजधानी देहरादून में संचालित निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग केंद्र दिव्यांग युवाओं के लिए उम्मीदों का नया केंद्र बन गया है।
📌 योजना और हाईटेक सुविधाओं की मुख्य विशेषताएं
ऑनलाइन और साइन लैंग्वेज के जरिए पढ़ाई: इस पहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि दूरस्थ जनपदों (गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक) के विद्यार्थियों को कोचिंग के लिए हर बार राजधानी देहरादून आने की जरूरत नहीं है। प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक गूगल मीट और साइन लैंग्वेज के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हो रही हैं, जिससे विभिन्न आवश्यकताओं वाले अभ्यर्थी घर बैठे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
19 लाख रुपये से तैयार हाईटेक साउंडप्रूफ कोचिंग रूम: जिला प्रशासन देहरादून और समाज कल्याण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री घोषणा के तहत 19 लाख रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक साउंडप्रूफ कोचिंग रूम तैयार किया गया है।
अत्याधुनिक उपकरण: इस केंद्र में 75 इंच की टीवी स्क्रीन, वीडियो मिक्सर, कॉर्डलेस माइक्रोफोन, तीन कंप्यूटर कंसोल, थिएटर लाइट और हाईटेक कैमरे जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जिनकी मदद से लेक्चर सीधे दूरस्थ छात्रों तक पहुंच रहे हैं।
पाठ्यक्रम: वर्तमान में यहां आईएएस (IAS) और पीसीएस (PCS) परीक्षाओं के लिए सामान्य अध्ययन (GS), सीसैट, तार्किक क्षमता और गणित की विशेष तैयारी कराई जा रही है।
🚀 जल्द शुरू होगी बैंकिंग और एसएससी की कोचिंग
सचिव, समाज कल्याण विभाग डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत शुरू की गई इस निःशुल्क कोचिंग का दायरा अब और बढ़ाया जा रहा है। दिव्यांग अभ्यर्थियों को रोजगार और करियर के अधिक अवसर दिलाने के उद्देश्य से जल्द ही बैंकिंग और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षाओं के लिए भी निःशुल्क कोचिंग शुरू की जाएगी।
🌟 विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया
देहरादून जिले से चयनित दिव्यांग अभ्यर्थी मोहन दास ने बताया कि मुख्यमंत्री की इस अनूठी पहल ने दूरदराज के युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने प्रशासनिक सेवा के सपनों को नई उड़ान देने का सुनहरा अवसर दिया है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से आज हर कोने के विद्यार्थी एक साझा मंच पर जुड़कर अपनी तैयारी को धार दे रहे हैं।
💬 दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उनकी शिक्षा के लिए शुरू की गई इस हाईटेक और निःशुल्क पहल पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर साझा करें!
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