
132 स्कूल आपदा की मार से प्रभावित, 10 भवन पूरी तरह ध्वस्त; फिर भी बजट के लिए तरस रहा बंजार — सुरेंद्र शौरी
नौ विद्यालय आज भी निजी व अन्य भवनों में संचालित, 81 स्कूलों के मरम्मत प्राक्कलन बजट के इंतजार में; सरकार की उदासीनता पर विधायक शौरी ने उठाए गंभीर सवाल
शिमला/बंजार। बंजार विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2023 और 2025 की बरसात से हुई आपदा ने शिक्षा व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। विधानसभा सत्र के दौरान बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया कि क्षेत्र में कुल 132 राजकीय प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च एवं वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 10 विद्यालयों के भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
विधायक सुरेंद्र शौरी ने कहा कि आपदा के वर्षों बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार न होना प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि आज भी बंजार विधानसभा क्षेत्र के नौ विद्यालयों की कक्षाएं अपने भवनों के बजाय निजी भवनों, महिला मंडल भवनों अथवा अन्य विद्यालयों में संचालित की जा रही हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बताया कि प्राथमिक पाठशाला ग्राहों, जीवा, करटाह, तींदर, खराल तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गुशैनी का संचालन निजी भवनों में किया जा रहा है। वहीं प्राथमिक पाठशाला आशनी और उच्च पाठशाला पाशी महिला मंडल भवनों में चल रही हैं। इसके अतिरिक्त प्राथमिक पाठशाला लायडा को चनौन विद्यालय में स्थानांतरित करना पड़ा है।
विधायक शौरी ने कहा कि स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 81 विद्यालयों में मरम्मत कार्यों के लिए प्राक्कलन बजट की स्वीकृति के इंतजार में सरकार के समक्ष लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा कि जब विद्यालयों के भवन ही सुरक्षित और पर्याप्त नहीं होंगे तो ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी?
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ सरकार प्रदेश में विद्यालयों को बंद करने की दिशा में आगे बढ़ रही है और दूसरी तरफ जो विद्यालय अस्तित्व में हैं, उनके आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए भी आवश्यक बजट उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है। सरकार की यह नीति ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
शौरी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पहले विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को कमजोर कर रही है, शिक्षकों और सुविधाओं की कमी पैदा कर रही है और फिर विद्यार्थियों की घटती संख्या को आधार बनाकर विद्यालय बंद करने का रास्ता तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि बंजार जैसे दुर्गम एवं भौगोलिक रूप से कठिन विधानसभा क्षेत्र में इस नीति का सबसे अधिक खामियाजा ग्रामीण विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बंजार की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से बिल्कुल अलग हैं। यहां कई गांव अत्यंत दुर्गम हैं और विद्यार्थियों को विद्यालय पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में विद्यालयों के भवनों का पुनर्निर्माण और मरम्मत केवल आधारभूत ढांचे का विषय नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है।
विधायक सुरेंद्र शौरी ने प्रदेश सरकार से मांग की कि वर्ष 2023 एवं 2025 की आपदा से प्रभावित बंजार विधानसभा क्षेत्र के सभी विद्यालयों का प्राथमिकता के आधार पर पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्य करवाया जाए तथा लंबित 81 विद्यालयों के प्राक्कलनों के लिए तत्काल बजट जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को विद्यालय बंद करने के बजाय दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों को मजबूत करने और बच्चों को उनके घर-द्वार के समीप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने पर ध्यान देना चाहिए।
“आपदा के वर्षों बाद भी यदि बच्चे निजी और महिला मंडल भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं और विद्यालयों के मरम्मत प्राक्कलन बजट की प्रतीक्षा में पड़े हैं, तो यह सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। बंजार के बच्चों के भविष्य से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।” — सुरेंद्र शौरी, विधायक बंजार
Kullu, Kullu | Aug 22, 2026