पोरी मेले के आखिरी दिन सेंकडो शिव भक्त
मणिमहेश यात्रा के लिए रवाना
श्रद्धालुओं को त्रिलोकनाथ मंदिर में पूजा अर्चना के बाद लोगों ने जयकारों के बीच दी विदाई
Kullu Times
जिला लाहुल स्पीति के लाहुल उपमंडल के त्रिलोकीनाथ में मनाये जाने वाले पोरी मेले के आखिरी दिन सेंकडो मणिमहेश यात्रा के श्रद्धालुओं को त्रिलोकनाथ मंदिर में पूजा अर्चना के बाद लोगों ने जयकारों के बीच विदाई दी गई, हर वर्ष सैंकड़ों शिव भक्त मणिमहेश झील में पवित्र स्नान की इच्छा से राशेल तथ कुगति दर्रा से 5 दिन लगातार पेदल यात्रा कर झील में पहुंचते हैं, लाहुली जन समुदाय में भगवान शिव के प्रति अपार श्रद्धा है और ये यात्रा डढ़ी यात्रा ,के नाम से प्रसिद्ध है,श्रद्धालुओं में मान्यता है कि राधा अष्टमी के दिन जब सूर्य देव की पहली किरण झील के जल में पड़ती है तो झील का पानी अमृत समान हो जाता है,ओर इस जल में स्नान करने से समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है,तथा विभिन्न रोगों से मुक्ति मिलती है, श्रद्धालु प्रथम दिन सेंधवाड़ी में विश्राम करते हैं,दूसरे दिन खोड़देव पधर, पहुंच कर शिव व दुर्गा माता की पूजा अर्चना उसके बाद अलियास रात्रि विश्राम करते हैं।तीसरे दिन ग्रेचु नामक कठिन चढ़ाई चढ़ कर ,कुगती जोत हो कर केलिंग वजीर पहुंचते हैं, इस पूरे यात्रा मार्ग में यात्री कैलाशपति की जय, माता मराली की जय,खोलडुवासी की जय,जोतां वाली की जय,ऊंचे कैलाश की जय,आदि जयघोष के साथ अपनी थकान को भुला कर लगातार आगे बढ़ते जाते हैं और चौथे दिन दुर्गम नालों,हिमनदी,पहाड़ियों व ग्लेशियरों के ऊपर से हनुमान झील में ठहराव होता है,तथा पांचवें दिन गौराजा चौगान,व डढ़ी का दर्रा होते हुए श्रद्धालु मणिमहेश झील पहुंचते हैं।
Kullu, Kullu | Aug 23, 2026