
वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन से बढ़ेगी दूध की गुणवत्ता और पशुओं की उत्पादकता
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सीआईआई द्वारा विदिशा में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित, पशुपालक किसानों को आधुनिक तकनीकों की दी गई जानकारी
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विदिशा। जिले के डेयरी क्षेत्र को अधिक सशक्त बनाने, पशुपालक किसानों की आय में वृद्धि करने तथा पशुओं की उत्पादकता और स्वास्थ्य में सुधार लाने के उद्देश्य से भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा बुधवार को अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, विदिशा में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के पशुपालक किसानों को डेयरी व्यवसाय से संबंधित वैज्ञानिक तकनीकों, पशु पोषण, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तथा पशुओं के बेहतर प्रबंधन की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीआईआई-फेस, नई दिल्ली की प्रोजेक्ट मैनेजर सुश्री श्रुति शर्मा, विषय विशेषज्ञ श्री जितेंद्र साहू (पूर्व एनडीडीबी), मोहाली, पंजाब, सीआईआई इंदौर के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर श्री विनय शर्मा, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र विदिशा की महाप्रबंधक श्रीमती जयंती कुमारी, लीड बैंक अधिकारी श्री भगवान सिंह बघेल, नाबार्ड की डीजीएम श्रीमती जगप्रीत कौर, पशु चिकित्सा विभाग के डॉ. आकाश शुक्ला एवं डॉ. संजय भारती, आरसेटी के निदेशक श्री जी.आर. बंसल, कृषि महाविद्यालय गंजबासौदा के वैज्ञानिक तथा पीएनबी विदिशा के फार्मर ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक सहित जिले के पशुपालक किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सूद द्वारा डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने दूध निकालने की बेहतर एवं स्वच्छ तकनीक, पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल, संतुलित पशु आहार एवं पोषण तथा गर्मियों के मौसम में पशुओं को हीट स्ट्रेस (गर्मी के तनाव) से बचाने के उपायों के बारे में बताया। उन्होंने वैज्ञानिक एवं स्वच्छ तरीकों को अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पशुओं के उचित स्वास्थ्य प्रबंधन और बेहतर पोषण से दूध उत्पादन तथा उसकी गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
नाबार्ड की डीजीएम श्रीमती जगप्रीत कौर ने पशुपालक किसानों को पशु किसान क्रेडिट कार्ड (पशु केसीसी) योजना की जानकारी देते हुए इसके माध्यम से उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं एवं पशुपालन गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मिलने वाली सहायता के बारे में बताया। इसी क्रम में कृषि महाविद्यालय गंजबासौदा के कृषि वैज्ञानिक एवं आरसेटी निदेशक श्री जी.आर. बंसल ने पशुओं के लिए भूसे का यूरिया उपचार करने की वैज्ञानिक विधि समझाई। साथ ही कम लागत में पौष्टिक कंसंट्रेट पशु आहार तैयार करने के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग कर पशु आहार की लागत कम करने के साथ पशुओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराया जा सकता है।
प्रशिक्षण में बताया गया कि दूध की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और पशुओं का स्वास्थ्य एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं। डेयरी व्यवसाय में स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक पशु प्रबंधन को अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पशुपालक किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना है, ताकि वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर डेयरी गतिविधियों को अधिक लाभदायक बना सकें। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को दी गई व्यावहारिक जानकारी से जिले में डेयरी क्षेत्र के विकास, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि तथा पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। #vidisha