
कुर्सी पर पंचायत सहायक, कागजों में मनरेगा मजदूर!
District Magistrate/District Election Officer, Jalaun
Dio Jalaun
महेवा में मनरेगा मस्टर रोल को लेकर गंभीर सवाल, 11 दिन की हाजिरी पर ₹3,300 के भुगतान का आरोप
उरई/महेवा (जालौन)
जनपद जालौन में सरकारी योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एक और मामला सामने आया है।
विकासखंड महेवा की ग्राम पंचायत जीतामऊ से जुड़े प्रकरण में शिकायतकर्ता रविन्द्र कुमार ने ग्राम पंचायत सचिव (VDO) पर शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, पद के दुरुपयोग और मनरेगा भुगतान प्रक्रिया में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी जालौन को प्रार्थना पत्र देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच तथा लंबित भुगतान पर रोक लगाए जाने की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि ग्राम पंचायत मलैया में तैनात पंचायत सहायक/डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रदीप कुमार पुत्र संतराम नियमित रूप से पंचायत सहायक के रूप में मानदेय प्राप्त कर रहे हैं।
आरोप है कि इसी व्यक्ति के नाम मनरेगा जॉब कार्ड संख्या UP-38-008-031-004/944 संचालित है और वित्तीय वर्ष 2026-27 में मस्टर रोल संख्या 1426/3300 के तहत 11 दिनों की हाजिरी दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उक्त हाजिरी के आधार पर करीब ₹3,300 के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। प्रार्थना पत्र में वेजलिस्ट संख्या 3138008027WL002307 तथा FTO संख्या UP3138008027PWAR0920262224151S15001227134 का भी उल्लेख किया गया है, जिसे शिकायतकर्ता ने भुगतान प्रणाली पर लंबित बताया है।
एक ही व्यक्ति, दो जिम्मेदारियां—जांच का असली सवाल यही
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि यदि संबंधित व्यक्ति पंचायत सहायक के रूप में पंचायत भवन में शासकीय कार्य कर रहा था, तो उसी अवधि में मनरेगा मजदूर के रूप में उसकी हाजिरी किस आधार पर दर्ज की गई?
क्या वास्तव में उसने मनरेगा कार्य किया था अथवा मस्टर रोल में केवल कागजी उपस्थिति दर्ज की गई?
इन सवालों का जवाब अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उसके पास जॉब कार्ड, मस्टर रोल, वेजलिस्ट तथा ई-ग्रामस्वराज से संबंधित भुगतान दस्तावेज मौजूद हैं।
इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जिलाधिकारी से मामले की स्थलीय एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
FTO पर रोक से लेकर कार्रवाई तक की मांग
प्रार्थना पत्र में लंबित FTO के भुगतान को तत्काल रोकने अथवा निरस्त करने, संबंधित ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका की जांच कराने तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषी कर्मियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
फिलहाल मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुंच चुका है। अब देखना यह है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
महत्वपूर्ण: इस मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र और उनके बताए दस्तावेजों पर आधारित हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में संबंधित ग्राम पंचायत सचिव, विकासखंड अधिकारी अथवा जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
कागजों में अगर मजदूर बनकर धन निकले, तो सवाल उठना लाजिमी है,
सरकारी पैसे की हर पाई जनता की है—जांच हो तो तस्वीर साफ होनी जरूरी है।
आपकी राय क्या है? क्या ऐसे मामलों में दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
#Jalaun #Orai #Mahewa #MNREGA #JalaunNews #JalaunCorruption #MNREGAScam #VDO #Panchayat #GramPanchayat #DMJalaun #JalaunAdministration #eGramSwaraj #PFMS #Manrega #UttarPradesh #BreakingNews #FMNewsTV #SonuMaharaj #जालौन #उरई #महेवा #मनरेगा #भ्रष्टाचार #जांच_की_मांग
Jalaun, Jalaun | Oct 4, 2026