अतिवृष्टि से 53 हजार किसान प्रभावित, राहत के लिए खुला सरकारी खजाना
जालौन को मिली 5 करोड़ की पहली किस्त, 29 करोड़ की राहत का प्रस्ताव; 59 हजार बीमित किसानों को भी जल्द मिलेगा फसल बीमा का लाभ
जालौन जनपद में सितंबर माह के अंत में हुई भारी बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
25, 26 और 27 सितंबर को हुई अतिवृष्टि से करीब 34 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में मूंग, तिल समेत विभिन्न फसलों को नुकसान पहुंचा है।
प्रशासन के आकलन के अनुसार करीब 53 हजार किसान प्रभावित हुए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अतिवृष्टि के दौरान जनपद में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
किसानों को राहत दिलाने के लिए जिलाधिकारी समीर के निर्देशन में जिला प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है।
शासन को करीब 29 करोड़ रुपये की राहत का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसके सापेक्ष उत्तर प्रदेश सरकार से पहली किस्त के रूप में 5 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं।
पोर्टल पर तेज हुई किसानों की फीडिंग
राहत राशि पात्र किसानों तक पहुंचाने के लिए तहसील स्तर पर खतौनी सहित अन्य अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
अब तक 6 हजार से अधिक किसानों का डाटा पोर्टल पर फीड किया जा चुका है। सत्यापन के बाद पात्र किसानों को राहत राशि वितरित करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
मकान और पशुहानि में भी मिली राहत
अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों को अन्य क्षति के मामलों में भी प्रशासन ने सहायता उपलब्ध कराई है।
दो पशुहानि के मामलों में 75 हजार रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है। वहीं 577 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 23 लाख रुपये से अधिक की सहायता प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा चुकी है।
59 हजार बीमित किसानों को भी राहत की उम्मीद
फसल बीमा को लेकर भी प्रशासन ने बीमा कंपनी और संबंधित विभागों के साथ समन्वय तेज कर दिया है।
जनपद में करीब 59 हजार किसानों का फसल बीमा है। इनमें से लगभग 33 हजार किसानों का डाटा पोर्टल पर अपडेट किया जा चुका है, जबकि 22,304 किसानों का सर्वे पूरा हो चुका है।
बीमा कंपनी के साथ बैठक में जालौन में 7 अक्टूबर से क्षतिपूर्ति वितरण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने बीमित किसानों से अपील की है कि फसल बीमा क्षतिपूर्ति के लिए हेल्पलाइन नंबर 14447 पर आवश्यक पंजीकरण अवश्य कराएं।
बटाई और पट्टे पर खेती करने वाले किसानों पर भी फोकस
प्रशासन के अनुसार बटाई अथवा पट्टे पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के प्रति भी संवेदनशील रुख अपनाया जा रहा है।
खेती में उनके निवेश और इनपुट कॉस्ट को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार राहत एवं क्षतिपूर्ति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
जिलाधिकारी समीर ने कहा कि शासन की मंशा है कि आपदा और अतिवृष्टि से प्रभावित कोई भी पात्र किसान राहत से वंचित न रहे।
इसी उद्देश्य से फसल क्षति सत्यापन, राहत वितरण और फसल बीमा क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
अब किसानों की निगाहें 7 अक्टूबर से शुरू होने वाली बीमा क्षतिपूर्ति प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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Jalaun, Jalaun | Oct 6, 2026