
बालिका संप्रेक्षण गृह की बालिकाओं के हुनर से सजा दीपावली स्टॉल, 8 हजार रुपये के उत्पादों का हुआ विक्रय
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जिला न्यायालय परिसर में हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री बनी आकर्षण का केंद्र, प्रधान मजिस्ट्रेट ने की बालिकाओं के हुनर की सराहना
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विदिशा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बालिका संप्रेक्षण गृह में निवासरत बालिकाओं को कौशल विकास, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में सराहनीय पहल की गई है। दीपावली पर्व के अवसर पर इन बालिकाओं ने अपने हुनर, मेहनत और रचनात्मक सोच से विभिन्न प्रकार की आकर्षक एवं उपयोगी हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री और दीपावली से संबंधित उत्पाद तैयार किए। इन उत्पादों के प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए जिला न्यायालय परिसर विदिशा में विशेष स्टॉल लगाया गया, जो आगंतुकों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा।
प्रशिक्षक श्रीमती सोनिला डेविड के मार्गदर्शन में बालिकाओं द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पादों को स्टॉल पर प्रदर्शित किया गया। बालिकाओं की कलात्मक प्रतिभा और मेहनत से तैयार इन वस्तुओं को न्यायालय परिसर में पहुंचे लोगों ने खूब सराहा तथा उत्साहपूर्वक क्रय भी किया। स्टॉल के माध्यम से कुल 8 हजार रुपये की बिक्री हुई।
इस अवसर पर माननीय अतिरिक्त जिला जज श्री राजेश शर्मा एवं माननीय प्रधान मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय बोर्ड श्रीमती संचिता भदकारिया ने स्टॉल का अवलोकन कर बालिकाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की सराहना की। उन्होंने बालिकाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित किया।
इसके साथ ही माननीय अतिरिक्त जिला जज श्री राजेश शर्मा द्वारा बालिका संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण भी किया गया। उन्होंने वहां निवासरत बालिकाओं से आत्मीय संवाद कर उनकी स्थिति एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने अधीक्षक श्रीमती आकांक्षा मरावी को बालिकाओं की नियमित काउंसलिंग कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश भी दिए।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती विनीता कांसवा के निर्देशन में आयोजित इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना, उनमें व्यावहारिक कौशल विकसित करना तथा आत्मविश्वास एवं आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत बनाना है। स्टॉल से प्राप्त 8 हजार रुपये की विक्रय राशि का उपयोग बालिका संप्रेक्षण गृह में निवासरत बालिकाओं के लिए चांदी के आभूषण क्रय करने में किया जाएगा।
यह पहल बालिकाओं में आपसी सहयोग, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के साथ ही उनके प्रति समाज में अपनत्व एवं सद्भावना का संदेश भी देती है। महिला एवं बाल विकास विभाग के इस प्रयास से बालिकाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने, हुनर को निखारने और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। #vidisha