
क्रेन फेल चेन फेल हनुमान जी के आगे विज्ञान भी हुआ फेल 😱😱
मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की जद में आए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञों ने इस प्रतिमा के राजा भोज के शासनकाल से जुड़े होने की संभावना जताई है। इस दावे के सामने आने के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के चलते मंदिर का भवन पहले ही तोड़ा जा चुका है। प्रशासन पिछले कई दिनों से हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से विस्थापित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, फिलहाल प्रतिमा अपने मूल स्थान पर ही सुरक्षित है। इसे धूप और बारिश से बचाने के लिए ऊपर कैनोपी टेंट भी लगाया गया है।
विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक, प्रतिमा मालवा क्षेत्र में पाए जाने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर से तराशी गई है। उनके अनुसार, परमार वंश और राजा भोज के शासनकाल में इसी तरह के बेसाल्ट पत्थरों पर कलाकृतियां उकेरने की परंपरा रही है।
हालांकि, प्रतिमा पर लंबे समय से चढ़ी सिंदूर की मोटी परत के कारण इसकी मूल बनावट और भाव-भंगिमा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में इसके वास्तविक काल का निर्धारण केवल मौजूदा स्वरूप के आधार पर करना मुश्किल है।
पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिमा वास्तव में कितनी पुरानी है और इसकी स्थापना कब हुई थी, इसका सटीक पता लगाने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना उचित पुरातात्विक अध्ययन और तकनीकी सलाह के जल्दबाजी में प्रतिमा को हटाने या स्थानांतरित करने का कदम उज्जैन की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासत को नुकसान पहुंचा सकता है।
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