
जबलपुर: देश की अदालतों से वैवाहिक विवादों और मेंटिनेंस (भरण-पोषण) को लेकर एक बेहद ऐतिहासिक और तीखा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कानून का मकसद किसी को परेशान करना या बदला लेना नहीं है। मामले की सुनवाई करते हुए माननीय हाईकोर्ट ने एक ऐसी पत्नी की भरण-पोषण की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जो खुद सालाना 14 लाख रुपये कमा रही है।
अदालत ने बेहद सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि 'भरण-पोषण का कानून केवल उन महिलाओं की मदद के लिए है जो वाकई बेसहारा और जरूरतमंद हैं।' कोर्ट ने आगे कहा कि इतनी मोटी सैलरी होने के बावजूद पति से मेंटिनेंस मांगना, शेक्सपियर के नाटक की तरह 'पति के शरीर से एक पाउंड मांस' वसूलने जैसा है। अदालत के इस फैसले ने समाज और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में पतियों को ही प्रताड़ित होना पड़ता था। इस फैसले के बाद अब मोटी कमाई करने वाली पत्नियां कानून का गलत फायदा नहीं उठा सकेंगी।
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Mauganj, Rewa | Jun 24, 2026