
बांदा रियासत के 8वें वंशज की अमर भारती से बातचीत
बोले - पत्रकार इलियास ने हमारे बुजुर्गों का इतिहास जीवित कर दिया
*उपशीर्षक -*
भोपाल, सीहोर और इंदौर में रहता है पेशवा बाजीराव और मस्तानी का वंश, पुणे में हुई थी दो भाइयों की मुलाकात, 1968 के सरकारी दस्तावेज में नवाब अली बहादुर द्वितीय को माना गया था राजनीतिक पीड़ित
बांदा। रानी लक्ष्मीबाई की राखी पर अपनी रियासत कुर्बान करने वाले बांदा के नवाब *अली बहादुर द्वितीय* से जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद इतिहास फिर जीवित हो उठा है। अमर भारती में समाचार प्रकाशित होने के बाद रियासत के 8वें वंशज *उमर अली बहादुर* ने भोपाल से पत्रकार मोहम्मद इलियास से दूरभाष पर वार्ता की।
उमर अली बहादुर ने बताया कि वे पेशवा बाजीराव प्रथम और मस्तानी के पुत्र शमशेर बहादुर के वंशज हैं और अली बहादुर द्वितीय उनके दादा थे। वे स्वयं को कोंकणस्थ ब्राह्मण मुस्लिम कहते हैं। उनका परिवार वर्तमान में भोपाल, सीहोर और इंदौर में निवास करता है।पुणे के समाचार पत्र में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार उमर अली बहादुर अपनी जड़ों की खोज में पुणे गए थे। वहां प्रभात मार्ग स्थित बंगले में उनकी भेंट विनायक विश्वनाथ पेशवा से हुई। विनायक पेशवा, पेशवा बाजीराव की हिंदू पत्नी से 8वें वंशज हैं।
अमर भारती को प्राप्त एक अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज से इस इतिहास की पुष्टि होती है। 10 मई 1968 को इंदौर के राजगढ़ हाउस से एक प्रमाण पत्र जारी हुआ था। इसमें स्पष्ट लिखा है कि मैं नवाब सैफ अली बहादुर बांदा को कई दशकों से जानता हूँ। उनके दादा स्वर्गीय *नवाब अली बहादुर द्वितीय* को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण अंग्रेज सरकार ने गद्दी से हटा दिया था। वे राजनीतिक पीड़ित की श्रेणी में आते हैं।यह दस्तावेज सिद्ध करता है कि भारत सरकार ने भी नवाब अली बहादुर द्वितीय को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मान्यता दी थी। उनके तैल चित्र आज भी नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित हैं।उमर अली ने बताया कि 1858 में रियासत जब्त होने के बाद अंग्रेजों ने नवाब अली बहादुर द्वितीय को इंदौर में पेंशन पर निर्वासित कर दिया था, जहां 1873 में उनका निधन हुआ था।उन्होंने मांग की कि भूरागढ़ किले में नवाब अली बहादुर द्वितीय की प्रतिमा स्थापित की जाए।
*मोहम्मद इलियास, अमर भारती, मीडिया सेंटर बाँदा SP Banda
Atarra, Banda | Aug 29, 2026