
लगभग 1 अरब 97 करोड़ वर्ष पुराना है भगवान धरणीधर श्री वराह का प्राकट्य!
13 सितंबर को सोरों शूकर क्षेत्र में मनाया जाएगा भव्य वराह प्राकट्योत्सव
धरणीधर वाराह मंदिर में दुग्धाभिषेक, छप्पन भोग और विशेष पूजा-अर्चना के होंगे आयोजन
सोरों। तीर्थ नगरी सोरों शूकर क्षेत्र में भगवान विष्णु के दशावतारों में तृतीय अवतार माने जाने वाले भगवान धरणीधर श्री वराह का प्राकट्योत्सव 13 सितंबर 2026 को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर धरणीधर वाराह मंदिर को भव्य विद्युत सजावट और फूलों से सजाया जाएगा।
सनातन परंपरा में भगवान विष्णु के दशावतारों में श्री वराह अवतार को तृतीय अवतार माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर हिरण्याक्ष द्वारा रसातल में ले जाई गई पृथ्वी का उद्धार किया था।
पुराणिक कालगणना में 1 अरब 97 करोड़ 29 लाख वर्ष
पुराणिक कालगणना के अनुसार वर्तमान श्वेत-वराह कल्प में लगभग 1 अरब 97 करोड़ 29 लाख वर्ष बीत चुके माने जाते हैं। इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर भगवान श्री वराह के प्राकट्य को अत्यंत प्राचीन कालगणना से जोड़ा जाता है। यह धार्मिक एवं पुराणिक कालगणना है, आधुनिक वैज्ञानिक डेटिंग नहीं।
सोरों शूकर क्षेत्र में विशेष आस्था
सोरों शूकर क्षेत्र भगवान वराह की आराधना से जुड़ा पावन तीर्थ माना जाता है। भगवान श्री वराह के प्राकट्य की स्मृति में यहां श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं।
13 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल तृतीया के अवसर पर भगवान श्री वराह का जन्मोत्सव एवं प्राकट्योत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।
दुग्धाभिषेक और छप्पन भोग होंगे प्रमुख आकर्षण
वराह गण सभा के तत्वावधान में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में धरणीधर वाराह मंदिर को आकर्षक विद्युत सजावट एवं फूलों से सजाया जाएगा। इस दौरान भगवान श्री वराह का दुग्धाभिषेक, छप्पन भोग, गंगा लहरी का पाठ, विशेष पूजा-अर्चना एवं दर्शन प्रमुख धार्मिक आयोजन होंगे।
प्राकट्योत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने और भगवान धरणीधर श्री वराह के दर्शन कर पूजा-अर्चना करने की संभावना है।
आइए, इस पावन अवसर पर करें भगवान श्री वराह का स्मरण
भगवान धरणीधर श्री वराह सरकार की जय!
सोरों शूकर क्षेत्र की जय!
हर-हर गंगे!
सनातन धर्म की जय! #सोरों #वराहजयंती