
डीएनए बनाने के लिए अब तक माना जाता था कि पहले से मौजूद डीएनए या आरएनए की जरूरत पड़ेगी। लेकिन वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया में ऐसा तरीका खोज लिया है, जो इस सोच को थोड़ा बदल देता है।
इस खोज में वैज्ञानिकों को एक खास प्रोटीन मिला, जो बिना किसी डीएनए या आरएनए टेम्पलेट के खुद एक खास तरह का डीएनए बना सकता है।
यह प्रोटीन डीआरटी3बी है। इसकी खास बात यह है कि डीएनए बनाने के दौरान इसके अंदर मौजूद कुछ अमीनो एसिड तय करते हैं कि अगला न्यूक्लियोटाइड कौन-सा जुड़ेगा।
यानि यहां डीएनए की कोई पुरानी कॉपी देखकर नई कॉपी नहीं बन रही, बल्कि प्रोटीन की अपनी molecular structure डीएनए बनने के क्रम को guide कर रही है।
हालांकि यह कोई भी मनचाहा डीएनए नहीं बना सकता। वैज्ञानिकों ने देखा कि यह मुख्य रूप से सी-ए-सी-ए जैसे दोहराए जाने वाले sequence बनाता है।
और इसका काम सिर्फ डीएनए बनाना नहीं है। यह बैक्टीरिया की एक antiviral defense system का हिस्सा है। जब कोई वायरस बैक्टीरिया पर हमला करता है, तो यह सिस्टम ऐसा डीएनए बनाता है जिससे संक्रमित बैक्टीरिया की growth रुक सकती है।
इसका फायदा यह होता है कि वायरस उस बैक्टीरिया से निकलकर आसपास के दूसरे बैक्टीरिया में आसानी से नहीं फैल पाता।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि डीआरटी3 सिस्टम में एक दूसरा एंजाइम भी होता है, जो आरएनए की मदद से दूसरी डीएनए स्ट्रैंड बना सकता है। दोनों मिलकर double-stranded डीएनए तैयार करते हैं।
यह खोज इसलिए खास है क्योंकि इससे पता चलता है कि प्रकृति में डीएनए बनाने के तरीके हमारी सोच से कहीं ज्यादा अलग और creative हो सकते हैं।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे इंसानों के लिए कोई नई genetic technology तुरंत बन जाएगी। लेकिन वैज्ञानिक अब यह जरूर देखना चाहेंगे कि क्या प्रकृति में ऐसे और molecular systems भी मौजूद हैं।
आपके हिसाब से भविष्य में क्या ऐसी मशीन बनाई जा सकती है, जो अपनी structure से ही मनचाहा डीएनए लिख सके?
ओरिजन सोर्स: साइंसअलर्ट की रिपोर्ट
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Bihar, India | Aug 23, 2026