
कटिहार में 31 साल बाद बिछड़ा बेटा अपने घर वापस लौटा तो गांव में लोग आश्चर्यचकित रह गए, लेकिन सबसे बड़ी बात ये थे कि गांव में उसे लोग पिंटू यादव कहते थे, लेकिन जब वो घर वापस आया तो वो अब्दुल जब्बार बन चुका था। मामला कटिहार के मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव से जुड़ा हुआ है, जहां एक परिवार का बेटा 31 साल बाद अपने घर लौट आया। घर और गांव के लोग उसे बचपन में पिंटू यादव के नाम से जानते थे, लेकिन अब वो युवक अब्दुल जब्बार बन चुका है।
बेटे को सामने देख मां की आंखें हो गई नम
बेटा जब घर आया तो बेटे को सामने देखकर मां मीणा देवी की आंखें नम हो गईं। पिता मोतीलाल यादव और भाई ने भी उसे गले लगा लिया। इसके बाद इसकी खबर गांव में आग की तरह फैल गई। खबर फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंच गए और सभी आश्चर्य से पिंटू यानी अब्दुल जब्बार को देखते रहे और उसके घर से चले जाने और वापस लौटने की कहानी सुनते रहे।
8 साल की उम्र में ट्रेन से बिछड़ गया था पिंटू यादव, ऐसे बन गया अब्दुल जब्बार
पिता मोतीलाल यादव और मां वीणा देवी ने बताया कि उसका बेटा पिंटू करीब आठ साल की उम्र में अपने दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था और ट्रेन में उसे नींद आ गई। इसके बाद उसके दोस्त तो ट्रेन से उतर गए, लेकिन वह ट्रेन में सोता रह गया। नींद खुलने पर उसने खुद को पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पाया।
अब वो अनजान जगह पहुंच गया था और वहां भटकने के दौरान उसके बेटे को हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम नामक व्यक्ति ने सहारा दिया और उसे अपने घर ले जाकर उसका पालन पोषण किया। इस दौरान उसकी पहचान भी बदल गई और उसक नाम उन्होंने अब्दुल जब्बार रख दिया, जिससे उसकी पहचान बन गई। समय बीतने के बाद उसकी शादी बंगाल की ही मुतैना खातून से हुई और उसके दो बेटे और एक बेटी है।
दिल्ली मे काम करने के दौरान मनिहारी के लोगों से हुई थी दोस्ती
घर वापस लौटा पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार ने बताया कि वो मजदूरी का काम करने के लिए दिल्ली गया था, जहां दिल्ली में काम करने के दौरान उसे मनिहारी के कुछ लोगों से दोस्ती हो गई। इसके बाद उसने अपने परिवार की तलाश शुरू की और एक दोस्त की मदद से उसने अपने परिवार की पूरी जानकारी निकाली। उसने अपने दोस्त को बताया कि उसका घर मनिहारी में है, जहां उसके पिता का नाम मोतीलाल यादव और गंगा किनारे उसका गांव है। दोस्त ने पड़ताल शुरू की और आखिर खोज निकाला और काफी पूछताछ के बाद उसे कांटाकोष में अपने पिता के नाम के सहारे अपने घर का पता मिला।
आंख के ऊपर कटने का निशान देख मां ने की पहचान
उसने बताया कि घर पहुंचने पर मां ने उसकी आंख के ऊपर कटने का निशान देखा और अपने बेटे को पहचान लिया। गांव के लोग बड़ी संख्या में उसके घर पहुंच गए कई समाजसेवी और जानकार भी पहुंचे और घर वापस लौटे पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार से पूछताछ शुरू हुई। इस दौरान पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार ने बचपन की कुछ ऐसी बातें भी बताईं, जिनसे परिजनों और ग्रामीणों को विश्वास हो गया कि ये पिंटू ही है, जो गांव से बिछड़ गया था। #lostandfound #familyreunion #emotionalstory #indiannews #heartwarming #reunion #kutihar
Chapra, Saran | Oct 23, 2026