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Bhojpuriya Mati News Bihar

@ujjawalnirmal
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ईरान ने अमेरिका को नए सिरे से युद्ध शुरू नहीं करने के लिए चेताया है। ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका और इजरायल की ओर से फिर उसकी जमीन पर सैन्य हमले होते हैं तो वह अपने जवाबी हमलों का दायरा बढ़ा देगा। वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर अटैक करेगा। साथ ही खाड़ी देशों के आर्थिक और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा। ईरान ने साफ किया है कि लड़ाई छिड़ी तो क्षेत्र के खाड़ी देश इससे सीधेतौर पर प्रभावित होंगे। अमेरिका-इजरायल की ओर से फिर से ईरान पर नए हमलों का संकेत मिलने के बाद तेहरान से ये बयान आया है।

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजई ने कहा है कि अगर अमेरिका और इजरायल की ओर से कोई नया हमला होता है तो ईरान खाड़ी के देशों में तेल सुविधाओं, समुद्र के नीचे बिछी केबलों, डेटा सेंटरों और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सुविधाओं पर हमला करेगा। इससे युद्ध का दायरा बहुत बढ़ जाएगा।

'नया हमला मतलब अस्तित्व पर खतरा'

मेहदी मोहम्मदी की ओर से कहा गया है कि डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू हमले के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत थे लेकिन वे इसके सफल परिणाम की गारंटी नहीं दे सके। हम अगले संघर्ष को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानते हैं। दो साल में तीसरे युद्ध का मतलब है- अस्तित्व पर खतरा। इसमें हमारी रणनीति जीरो रेड लाइन्स (कोई सीमा तय ना रखने) की है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा है कि ईरान संघर्ष जैसी कोई चीज नहीं है। यह अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ छेड़ा गया एक गैरकानूनी आक्रामक युद्ध है। शांति कभी भी हमलावरों को खुश करके, आक्रमण को वैध ठहराकर, पीड़ित पक्ष को दोषी ठहराकर या बुनियादी सिद्धांतों की बलि देकर कायम नहीं की जा सकती है।

ईरान को रोकना जरूरी: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान पर आगे भी सैन्य हमले संभव है। ट्रंप ने कहा है कि एक तरह से लोग इसे पसंद करते हैं क्योंकि मैं वही कर रहा हूं जो पहले के राष्ट्रपतियों को करना चाहिए था। दूसरी तरफ कुछ लोग शायद इसे पसंद नहीं भी करें। इसके लिए एक राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है लेकिन हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते हैं। <nis:link nis:type=tag nis:id=iran nis:value=Iran nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=israel nis:value=Israel nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=usa nis:value=USA nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=war nis:value=War nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=middleeast nis:value=MiddleEast nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=oil nis:value=Oil nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=conflict nis:value=Conflict nis:enabled=true nis:link/>
बेगूसराय में स्नातक चुनाव को लेकर मतदान के दौरान मतदान केंद्र पर स्लो वोटिंग को लेकर भाजपा उम्मीदवार सह विधान पार्षद सर्वेश कुमार भड़क गए। उन्होंने मतदान केंद्र पर मौजूद एसडीओ के साथ जमकर कहासुनी की। इधर हंगामे की सूचना पर पहुंचे डीएम रिची पांडे, एसपी मनीष कुमार ने हालत को संभाला। बीजेपी प्रत्याशी सर्वेश कुमार ने भड़कते हुए मतदान केंद्र को कैंसिल करने की मांग कर दी।

स्लो वोटिंग की शिकायत पर भड़के बीजेपी प्रत्याशी सर्वेश कुमार

दरअसल दिनकर कला भवन में स्नातक निर्वाचन चुनाव के दौरान स्लो वोटिंग हो रही थी। जब बीजेपी एमएलसी स्नातक उम्मीदवार सर्वेश सिंह मतदान केंद्र पहुंचे तो वहां मौजूद उनके समर्थकों ने इसकी शिकायत की। इसके बाद सर्वेश कुमार ने मतदान की धीमी प्रक्रिया पर नाराजगी जाहिर की। सर्वेश कुमार ने आरोप लगाया कि मतदाता तीन-तीन घंटे से लाइन में खड़े हैं, और करीब डेढ़ सौ मतदाताओं की कतार लगी हुई है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस बूथ को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग की।

एसडीओ अश्विनी कुमार के साथ सर्वेश कुमार ने की कहासुनी

इस दौरान मतदान केंद्र पर सदर एसडीओ अश्विनी कुमार भी पहुंचे, जिनके साथ सर्वेश कुमार की काफी कहासुनी हुई। इस दौरान सर्वेश कुमार ने कहा कि आप अभी बच्चे हो, मतदान केंद्र पर कतार लंबी है तो इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। अलग से मतदान कर्मी को लगाना चाहिए, लेकिन व्यवस्था नहीं है। घंटों से मतदाता कतार में लगे हुए हैं।

डीएम ने अतिरिक्त मतदान कर्मी को लगाया

इस दौरान बूथ पर हंगामे की सूचना पर डीएम रिची पांडे, एसपी मनीष कुमार दल बल के साथ पहुंचे। उन्होंने मामले का शांत कराया। बाद में डीएम ने अतिरिक्त मतदान कर्मी को लगाते हुए ऑफिसर की तैनाती की है। इस दौरान प्रत्याशी सर्वेश कुमार ने कहा यहां वोटिंग बहुत स्लो है मैं इलेक्शन कमीशन से अपील करता हूं कि बूथ को कैंसिल करो और यहां से दोबारा मतदान कराया जाए। यहां काफी लोग लाइन में लगे हैं। घंटों लाइन में रखेंगे वोटर को, यह गलत हो रहा है। हमारी मांग है इस बूथ को कैंसिल किया जाए।

जो 4 बजे तक आ जाएगा, उन सबकी वोटिंग कराई जाएगी: डीएम

वहीं डीएम रिची पांडेय ने बताया कि चुनाव चल रहा है। यहां पर मतदाताओं की संख्या अधिक है। 14 सौ से ज्यादा मतदाता है। 40 कैंडिडेट थे। सुबह में यहां हम देखकर गए थे। भीड़ कम थी। 11:00 बजे के बाद भीड़ ज्यादा हो गई। इसलिए थोड़ी सी समस्या हो रही थी। वोटिंग परसेंटेज को लेकर हमने अलग से अतिरिक्त मतदान कर्मी दिया है और ऑफिसर को लगाया गया है। अब किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। मतदाता मताधिकार का प्रयोग करें 4:00 बजे तक जो यहां आ जाएंगे, उन्हें सबको वोटिंग कराई जाएगी।

भगवानपुर प्रखंड कार्यालय मतदान केंद्र पर महिला-पुरुष की एक ही लाइन

दरअसल मतदान केंद्र पर कई जगह कुव्यवस्था देखने को मिली। भगवानपुर प्रखंड कार्यालय मतदान केंद्र पर महिला और पुरुष की एक ही कतार लगा दी गई थी। इस वजह से महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि एक लंबी कतार में जगह-जगह महिलाओं के साथ पुरुष कतार में लगे थे। इस वजह से महिलाओं को दिक्कत हो रही थी। वहीं कई मतदान केंद्रों पर स्लो वोटिंग की वजह से भी मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। <nis:link nis:type=tag nis:id=biharmlcelection nis:value=BiharMLCElection nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nbtbihar nis:value=NBTBihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=begusarai nis:value=Begusarai nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bjp nis:value=BJP nis:enabled=true nis:link/>
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जलवायु संबंधी जिम्मेदारियों को लेकर विकसित देशों को जमकर सुनाया है। उन्होंने अमीर देशों और यूरोपीय संघ से सवाल किया कि वे 'ग्लोबल साउथ' यानि विकासशील देशों के लिए किए गए अपने 'क्लाइमेट फाइनेंस' यानि जलवायु वित्तपोषण के वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है।

बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में एक गोलमेज चर्चा को संबोधित करते हुए गोयल ने विकसित देशों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में इन देशों का सबसे बड़ा हिस्सा रहा है लेकिन इसके बावजूद वे पेरिस समझौते के तहत विकासशील और कमजोर देशों को दी जाने वाली वित्तीय और तकनीकी सहायता के अपने वादों से मुकर गए हैं।

100 अरब डॉलर के वादे पर यूरोपीय देशों को सुनाया

इस दौरान कार्यक्रम की होस्ट काफी नर्वस नजर आ रहीं थीं और नाटकीय अंदाज में हाथ हिला रहीं थीं। इस दौरान पीयूष गोयल ने कहा '2015 के पेरिस जलवायु सम्मेलन में जब पूरी दुनिया एक साथ आई थी, तब प्रधानमंत्री मोदी ने 'ग्लोबल साउथ' को एकजुट किया और देशों को COP21 में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबद्ध होने के लिए प्रोत्साहित किया। इस बात पर सहमति बनी थी कि विकसित देश, जिन्होंने कई दशकों तक जलवायु को नुकसान पहुंचाकर फायदा उठाया है, वे बड़ी कीमत चुकाएंगे। साथ ही वे विकासशील और कम विकसित देशों, और प्रशांत और कैरेबियन क्षेत्रों के द्वीपीय देशों की मदद करेंगे... हर साल 100 अरब डॉलर। यही वह प्रतिबद्धता थी।'

पीयूष गोयल ने कहा कि इस बात के कई वर्ष बीत चुके हैं लेकिन यूरोपीय देशों ने एक ढेला तक नहीं दिया है। लंबे समय से कोई कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताते हुए गोयल ने कहा 'ग्यारह साल बीत जाने के बाद भी हमें इसमें से एक पैसा भी नहीं मिला है। यह सब सिर्फ वादे हैं। यह एक ऐसा बड़ा सवाल है जिसका जवाब देने में यूरोपीय संघ और CBAM (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) नाकाम रहे हैं।'

वाणिज्य मंत्री गोयल जलवायु सम्मेलनों में विकसित देशों द्वारा पहले किए गए वित्तीय वादों की ओर इशारा कर रहे थे।

'यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज' क्या था?

दरअसल साल 2009 में कोपेनहेगन में आयोजित 'यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज' (UNFCCC) के 15वें सम्मेलन (COP15) में विकसित देशों ने विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 2020 तक हर साल संयुक्त रूप से 100 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का वादा किया था।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 28 जुलाई 2022 को एक बयान में कहा कि 2015 में पेरिस में हुए COP21 सम्मेलन में विकसित देशों ने अपना वादा पूरा नहीं किया, जिसमें प्रति वर्ष 100 अरब अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य को 2025 तक बढ़ाने का फैसला लिया गया था।

उन्हें उनके वादों की याद दिलाते हुए गोयल ने आगे कहा 'वे कम विकसित देशों की जरूरतों को पूरा करने या उनके डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) के प्रयासों में मदद करने में नाकाम रहे हैं।' गोयल ने पश्चिमी देशों और भारत के बीच जनसंख्या के आकार और कार्बन उत्सर्जन के स्तर में मौजूद भारी असंतुलन की ओर भी ध्यान दिलाया।

ओजोन को नुकसान पहुंचा इसका जिम्मेदार कौन है?

गोयल ने आगे कहा 'आखिर इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कौन है? ओजोन परत को नुकसान कहां पहुंचा? वातावरण में इतना सारा कार्बन किसने भेजा? मैं दुनिया की 17% आबादी का प्रतिनिधित्व करता हूं लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में मेरा योगदान 3% से भी कम है। आप (यूरोप) शायद दुनिया की 3% या 4% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं फिर भी इन कार्बन उत्सर्जन या इस गड़बड़ी में आपका योगदान बहुत बड़ा है। यह समस्या आपके कारण पैदा हुई है।'

भारत की घरेलू विकास संबंधी जरूरतों और तेजी से हो रहे ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन (हरित ऊर्जा की ओर बदलाव) का जिक्र करते हुए गोयल ने अपनी बात कहते हुए कहा 'मुझे 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को भी पूरा करना है। मुझे उनकी ऊर्जा संबंधी जरूरतों और भोजन की जरूरतों को पूरा करना है और यह सुनिश्चित करना है कि मेरा देश सुरक्षित रहे। इन सबके बावजूद, हमारे पास दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) कार्यक्रमों में से एक है।' <nis:link nis:type=tag nis:id=climatechange nis:value=ClimateChange nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=globalsouth nis:value=GlobalSouth nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=piyushgoyal nis:value=PiyushGoyal nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=cop21 nis:value=COP21 nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=environment nis:value=Environment nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=climatefinance nis:value=ClimateFinance nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=parisagreement nis:value=ParisAgreement nis:enabled=true nis:link/>
दिल्ली हाई कोर्ट से AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को राहत नहीं, ₹10 हजार के बॉन्ड मामले में याचिका खारिज

कोर्ट ने SEM को सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने और बॉन्ड की जरूरत की समीक्षा करने का दिया निर्देश

नई दिल्ली। विरोध प्रदर्शन के बाद शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरने के आदेश को चुनौती देने वाली AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। शुक्रवार को अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) को निर्देश दिया कि वह नेहा बोरा को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएं और इस बात की समीक्षा करें कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 135 के तहत शुरुआती चरण में ही बॉन्ड भरवाना आवश्यक था या नहीं।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि मजिस्ट्रेट को इस पहलू पर विचार करना होगा कि क्या जांच शुरू होते ही बॉन्ड भरवाने की जरूरत थी या जांच के दौरान सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा सामने आने पर ही ऐसी कार्रवाई की जानी चाहिए थी।

मंडी हाउस में सभा के बाद जारी हुआ था नोटिस

यह मामला 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस में आयोजित एक सभा से जुड़ा है, जिसके बाद नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर को उन्हें नोटिस जारी किया था। इसमें BNSS की धारा 126, 130 और 135(3) का उल्लेख किया गया था।

नेहा बोरा को 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने और जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए एक जमानतदार के साथ 10 हजार रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने को कहा गया था।

पुलिस का आरोप है कि नेहा ने नारेबाजी की और निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया। पुलिस ने कनॉट प्लेस में प्रदर्शन करने का आरोप भी लगाया है।

नेहा बोरा ने उठाए कार्रवाई पर सवाल

नेहा बोरा ने अपनी याचिका में पुलिस के आरोपों को गलत बताया। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि नेहा ने केवल सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण सभा का आह्वान किया था।

उनकी ओर से यह भी कहा गया कि नोटिस में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि सार्वजनिक शांति को तत्काल खतरा था।

याचिका में SEM के रूप में कार्यरत अधिकारी के ACP होने और पुलिस अधिकारियों के निर्देशों के तहत कार्रवाई किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। नेहा की ओर से इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया गया।

दिल्ली पुलिस ने क्या दलील दी?

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए BNSS की धारा 126 और 130 को साथ पढ़ा जाना चाहिए।

पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित समय पर BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। पुलिस का आरोप है कि रोके जाने की कोशिश के बाद नेहा वहां से कनॉट प्लेस की ओर चली गई थीं।

बॉन्ड की आवश्यकता पर समीक्षा के निर्देश

हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए भी SEM को मामले के दस्तावेज उपलब्ध कराने और बॉन्ड भरवाने की आवश्यकता पर विचार करने का निर्देश दिया। इस तरह अदालत ने शुरुआती चरण में बॉन्ड की जरूरत और कार्रवाई की प्रक्रिया से जुड़े सवालों की समीक्षा का रास्ता खुला रखा है।

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हाई कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए कहा है कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय है। एफआईआर दर्ज कराने में तीन दिन की देरी, आरोपियों के नाम नहीं बता पाना और मेडिकल जांच में स्पर्म नहीं मिलना, अपने आप में पीड़िता के बयान को अविश्वसनीय नहीं बनाते। अदालत ने कहा कि पीड़िता के शरीर पर मिले चोट के निशान उसके बयान की पुष्टि करने वाले महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने जमशेदपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-दस-सह-फास्ट ट्रैक कोर्ट के 23 अगस्त 2018 के दोषसिद्धि संबंधी फैसले और 29 अगस्त 2018 के सजा आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। निचली अदालत ने आरोपियों को 20 साल के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

जंगल में घेरकर किया था सामूहिक दुष्कर्म

अभियोजन के अनुसार, पांच नवंबर 2013 को पीड़िता अपने ससुराल से मायके जा रही थी। इसी दौरान लपित छेंचा जंगल में एपीओ टोला-जेर्का-अमदा पहाड़ी के पास चार आरोपियों ने उसे घेर लिया और नाले की ओर ले गए। वहां आरोपियों ने एक-एक करके उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता का मुंह बंद कर दिया गया और शोर मचाने पर उसे पानी में डुबो देने की धमकी दी गई। आसपास हलचल सुनाई देने पर आरोपी भाग गए। इसके बाद पीड़िता ने शोर मचाया और उसे प्रकाश हेम्ब्रम के घर ले जाया गया, जहां उसने रात बिताई। अगले दिन गांव में पंचायत बुलाई गई, लेकिन आरोपी उसमें शामिल नहीं हुए। इसके बाद आठ नवंबर 2013 को एफआईआर दर्ज कराई गई।

पंचायत के बाद पुलिस के पास जाना देरी का पर्याप्त कारण

बचाव पक्ष ने एफआईआर दर्ज कराने में तीन दिन की देरी को आधार बनाकर पीड़िता की गवाही पर सवाल उठाए। हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पीड़िता अशिक्षित विधवा थी और गांव में पहले पंचायत बुलाई गई थी। उसे आरोपियों के नाम भी पंचायत के दौरान ही पता चले थे। इन परिस्थितियों में पुलिस के पास पहुंचने में हुई देरी को उसके बयान के खिलाफ नहीं माना जा सकता।

मेडिकल रिपोर्ट में चोट के निशान अहम साक्ष्य

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि पीड़िता आरोपियों के नाम नहीं बता सकी थी। अदालत ने कहा कि पीड़िता ने अदालत में आरोपियों को उनके चेहरे से पहचाना था। इसलिए नाम नहीं बता पाने से उसकी पहचान और गवाही पर संदेह नहीं किया जा सकता। मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता की पीठ, स्तन, कलाई और पैर पर चोट के निशान दर्ज किए गए थे। अदालत ने इन चोटों को घटना की पुष्टि करने वाला महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।

72 घंटे बाद जांच में स्पर्म नहीं मिलना स्वाभाविक

पीड़िता की मेडिकल जांच घटना के करीब 72 घंटे बाद हुई थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि पीड़िता की उम्र लगभग 50 वर्ष थी। पीठ ने कहा कि इतने अंतराल के बाद जांच में स्पर्म नहीं मिलना स्वाभाविक है। इसके विपरीत, शरीर के अन्य हिस्सों, विशेषकर ब्रेस्ट और पीठ के निचले हिस्से पर हिंसा के निशान दुष्कर्म की घटना की पुष्टि करने वाले महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। अदालत ने पीड़िता को झूठा फंसाने की बचाव पक्ष की दलील भी खारिज कर दी, क्योंकि इसके समर्थन में कोई मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया गया था। हाई कोर्ट ने माना कि निचली अदालत ने दोषसिद्धि में कोई गलती नहीं की थी और सभी अपीलें खारिज कर दीं।

फैसले के तीन अहम बिंदु

- एफआईआर में देरी: ग्रामीण परिस्थितियों और पंचायत के बाद पुलिस तक पहुंचने की वजह से हुई देरी पीड़िता की गवाही को स्वतः अविश्वसनीय नहीं बनाती।
- मेडिकल साक्ष्य: शरीर पर मिले चोट के निशान दुष्कर्म की घटना की पुष्टि करने वाले महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।
- स्पर्म नहीं मिलने का प्रभाव: घटना के 72 घंटे बाद मेडिकल जांच में स्पर्म नहीं मिलने से पीड़िता की विश्वसनीय गवाही खारिज नहीं की जा सकती। <nis:link nis:type=tag nis:id=justice nis:value=justice nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=victim nis:value=victim nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=court nis:value=court nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=fir nis:value=FIR nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=india nis:value=India nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=womenrights nis:value=womenrights nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=legal nis:value=legal nis:enabled=true nis:link/>
विदेश मंत्री एस. जयशंकर शुक्रवार को अजरबैजान की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे हैं। उन्होंने अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बायरामोव से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अजरबैजान-भारत संबंधों को बेहतर करने के एजेंडे पर चर्चा की है। बैठक के बाद जयशंकर ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि व्यापार, निवेश, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक सहयोग जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई है।

जयशंकर ने कहा कि अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बायरामोव के साथ सार्थक चर्चा हुई। हमारी बातचीत ने हमारे संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा तय की है। हम राजनीतिक परामर्श को गहरा करने, एक-दूसरे के यहां यात्राओं का आदान-प्रदान करने, आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने, कनेक्टिविटी विकसित करने और लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं।

कई अहम मुद्दों पर चर्चा

अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर और बायरामोव ने अजरबैजान के ईस्ट-वेस्ट और नॉर्थ-साउथ परिवहन गलियारों, बाकू-तिबिलिसी-कार्स रेलवे, बाकू बंदरगाह, अलाट फ्री इकोनॉमिक जोन और अन्य औद्योगिक केंद्रों से मिलने वाले अवसरों पर चर्चा की। दोनों मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र (UN), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरैक्शन एंड कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स इन एशिया (CICA) के माध्यम से होने वाले बहुपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा की।

बैठक के दौरान अजरबैजान की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे परिवहन और लॉजिस्टिक्स अवसरों पर जोर दिया गया। बायरामोव ने जयशंकर को दक्षिण काकेशस क्षेत्र की स्थिति, अजरबैजान-आर्मेनिया संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया और दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी। बैठक में दोनों मंत्रियों ने आपसी हितों से जुड़े अन्य द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।

अलीयेव से भी मिले जयशंकर

जयशंकर ने अजरबैजान की राजधानी बाकू में राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि बाकू में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात करके खुशी हुई।

जयशंकर ने बताया कि उन्होंने अजरबैजानी प्रेसिडेंट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं। हमने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इस साझा प्रयास के प्रति उनके सकारात्मक रुख की सराहना करता हूं। <nis:link nis:type=tag nis:id=indiaazerbaijan nis:value=IndiaAzerbaijan nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=diplomacy nis:value=Diplomacy nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=internationalrelations nis:value=InternationalRelations nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=economiccooperation nis:value=EconomicCooperation nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=jaishankar nis:value=Jaishankar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=connectivity nis:value=Connectivity nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=culturalexchange nis:value=CulturalExchange nis:enabled=true nis:link/>
बिहार के सिवान जिले में पटाखे बनाने के दौरान तेज आवाज के साथ ब्लास्ट हुआ है। इस ब्लास्ट में सात से आठ लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इसकी अभी पुष्ट नहीं हुई है। घटना जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव की है। बताया जाता है कि एक मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे, तभी पटाखों में तेज आवाज के साथ धमाका हो गया। इसमें कई घायल हुए हैं। घायलों को एंबुलेंस के जरिए निकट के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मो. अमीरुद्दीन मियां के मकान में रखे पटाखों में हुआ विस्फोट

मिली जानकारी के मुताबिक, जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में शुक्रवार को एक मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे। तभी पटाखों में आग लगने से भीषण विस्फोट हो गया। घटना में सात लोगों की मौत की सूचना मिल रही है। हालांकि मौतों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। बताया जाता है कि मो. अमीरुद्दीन मियां के मकान में रखे पटाखों में आग लगने के बाद लगातार धमाके होने लगे।

बताया जाता है कि मो. अमीरुद्दीन मियां पटाखों का कारोबार करते हैं। दीपावली नजदीक आने की वजह से पटाखे बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा है।

मकान का अगला हिस्सा ढहकर सड़क पर गिरा

विस्फोट इतना जोरदार था कि मकान का अगला हिस्सा ढहकर सड़क पर गिर गया। करीब दो घंटे तक रुक-रुककर धमाके होते रहे। शवों के क्षत-विक्षत होने के कारण पहचान में परेशानी होने की सूचना है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की जानकारी पुलिस-प्रशासन को दी गई है। <nis:link nis:type=tag nis:id=explosion nis:value=explosion nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bihar nis:value=Bihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=siwan nis:value=Siwan nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=fire nis:value=fire nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=news nis:value=news nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=tragedy nis:value=tragedy nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=safety nis:value=safety nis:enabled=true nis:link/>
जॉर्डन में एक चर्च के बाहर हुई गोलीबारी में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है। शुक्रवार को जॉर्डन के करक में चर्च के बाहर गोलीबारी की ये घटना तब हुई, जब एक अंतिम संस्कार के लिए सैकड़ों लोग जमा हुए थे। बताया गया है कि लोगों को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी से पूरे क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। स्थानीय मीडिया में आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गोलीबारी में 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। वहीं कई दूसरे लोग घायल बताए गए हैं।

स्थानीय मीडिया ने मौके पर मौजूद एक चश्मदीद के हवाले से बताया कि हमलावरों ने नकाब पहन रखा था। इन्होंने अचानक से करक में चर्च के बाहर अंतिम संस्कार जुलूस को निशाना बनाकर गोलीबारी की। करक में जॉर्डन के सबसे बड़े ईसाई समुदायों में से एक रहता है। ऐसें मरने वालों में ज्यादातर ईसाई समुदाय के बताए जा रहे हैं। <nis:link nis:type=tag nis:id=jordanshooting nis:value=JordanShooting nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=breakingnews nis:value=BreakingNews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=peace nis:value=Peace nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=community nis:value=Community nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=tragedy nis:value=Tragedy nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=condolences nis:value=Condolences nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=violence nis:value=Violence nis:enabled=true nis:link/>
दिल्ली में महिला जजों का इतिहास! DSLSA के पांचों प्रमुख प्रशासनिक पदों पर महिलाएं तैनात

नई दिल्ली। दिल्ली के न्यायिक प्रशासन में महिलाओं ने एक नई मिसाल कायम की है। दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (DSLSA) के सभी पांच प्रमुख प्रशासनिक पदों पर वर्तमान में महिला न्यायिक अधिकारी तैनात हैं। संस्थान के कर्मचारियों के मुताबिक, एक दशक से अधिक समय के दौरान यह पहली बार है, जब सभी प्रमुख पदों की जिम्मेदारी महिलाओं के पास है।

यह उपलब्धि न्यायिक प्रशासन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। DSLSA जरूरतमंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने, लोक अदालतों के आयोजन और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पांच प्रमुख पदों पर महिला न्यायिक अधिकारी

1. सुनेना शर्मा — मेंबर सेक्रेटरी

डिस्ट्रिक्ट जज सुनेना शर्मा DSLSA की मेंबर सेक्रेटरी हैं। उन्होंने 5 अक्टूबर को पदभार संभाला था। उन्हें दो दशक से अधिक का न्यायिक अनुभव है। वह महिला अदालत, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, विशेष CBI अदालत और कमर्शियल कोर्ट में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। वह प्रशिक्षित मध्यस्थ भी हैं।

2. भारती गर्ग — सेक्रेटरी (लिटिगेशन)

सिविल जज भारती गर्ग DSLSA में सेक्रेटरी (लिटिगेशन) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में तीसरी और दिल्ली न्यायिक सेवा में चौथी रैंक हासिल की थी। उन्होंने रामजस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है।

3. तन्वी खुराना — स्पेशल सेक्रेटरी

डिस्ट्रिक्ट-कम-एडिशनल सेशन जज तन्वी खुराना नीति निर्माण और कानूनी सेवाओं से संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी संभालती हैं। वह नेपाल और श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारतीय न्यायपालिका का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। दिल्ली न्यायपालिका में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

4. दीपाली श्रीवास्तव — प्रशासनिक जिम्मेदारी

दीपाली श्रीवास्तव दिल्ली न्यायिक सेवा की 2015 बैच की अधिकारी हैं। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, एडिशनल सिविल जज और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा, वह द्वारका कोर्ट में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी भी निभा चुकी हैं।

5. स्वाति भारद्वाज — सेक्रेटरी (लीगल एड)

सिविल जज स्वाति भारद्वाज DSLSA में सेक्रेटरी (लीगल एड) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी जिम्मेदारी जरूरतमंद लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाने से जुड़े कामकाज की निगरानी करना है।

11 जिलों की कानूनी सेवाओं में भी महिलाओं की भागीदारी

DSLSA का मुख्यालय राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में स्थित है। यह संस्था दिल्ली में मुफ्त कानूनी सहायता, लोक अदालतों और कानूनी साक्षरता कार्यक्रमों का संचालन करती है। इसके साथ ही, दिल्ली की 11 जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन जिला प्राधिकरणों में भी चार सेक्रेटरी पदों पर महिला न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं।

वर्तमान में दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे DSLSA के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं।

DSLSA के पांचों प्रमुख प्रशासनिक पदों पर महिला न्यायिक अधिकारियों की तैनाती न्यायिक संस्थानों में महिला नेतृत्व की एक उल्लेखनीय तस्वीर पेश करती है। यह बदलाव न्याय व्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती जिम्मेदारी और संस्थागत नेतृत्व में उनकी भागीदारी को रेखांकित करता है।
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बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए आज शुक्रवार को वोट डाले जाएंगे। बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान होगा। इस मतदान में 5.32 लाख से अधिक मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे। चुनाव मैदान में कुल 150 उम्मीदवार हैं। मतदान को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी।

तिरहुत स्नातक क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता

निर्वाचन आयोग के अनुसार, आठों निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 5 लाख 32 हजार 847 मतदाता रजिस्टर्ड हैं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 4 लाख 92 हजार 594 मतदाता हैं। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा 1 लाख 43 हजार 988 मतदाता हैं। इसके बाद कोसी में 1 लाख 34 हजार 72, दरभंगा में 1 लाख 26 हजार 951 और पटना में 87 हजार 583 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

इन सीटों पर हो रहा एमएलसी चुनाव?

वहीं, चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 40 हजार 253 मतदाता हैं। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 11 हजार 719 मतदाता हैं, जबकि सारण में 10 हजार 748, दरभंगा में 9026 और तिरहुत में 8760 मतदाता हैं। जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक, तिरहुत स्नातक, कोसी स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, तिरहुत शिक्षक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

8 सीटों पर कौन-कौन हैं बड़े प्रत्याशी?

चुनाव में एनडीए के घटक दल बीजेपी और जेडीयू के चार-चार सीटों पर मैदान में हैं। बीजेपी ने पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से डॉ. एनके यादव, तिरहुत स्नातक से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, जन सुराज पार्टी सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने पटना स्नातक से अनुज सिंह, तिरहुत स्नातक से विमोहन कुमार, तिरहुत शिक्षक से श्याम नंदन यादव और सारण शिक्षक से अफाक अहमद को उम्मीदवार बनाया है। अफाक अहमद इस सीट से दोबारा चुनाव मैदान में हैं।

वर्तमान में MLC की किस सीट पर किसका कब्जा?

वर्तमान में शिक्षक सीट पर पटना में भाजपा, सारण में निर्दलीय, तिरहुत में भाकपा, दरभंगा में कांग्रेस का कब्जा है, जबकि स्नातक क्षेत्र में पटना में जदयू, दरभंगा और तिरहुत में निर्दलीय तथा कोसी में भाजपा का कब्जा है।

जन सुराज ने पटना शिक्षक से दिव्य ज्योति, दरभंगा शिक्षक से एसपी राय, दरभंगा स्नातक से मोहम्मद इम्तियाज नूरानी और कोसी स्नातक से रजनीश रंजन को टिकट दिया है। राजद स्नातक क्षेत्र में पटना , दरभंगा, तिरहुत, कोसी तथा शिक्षक सीट पर पटना और सारण में प्रत्याशी उतारे है।

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रत्याशी

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक 40 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, पटना शिक्षक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 18-18 प्रत्याशी मैदान में हैं। कई सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार भी जीत के लिए जोर लगा रहे हैं। ऐसे में शुक्रवार को होने वाले मतदान पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशियों की भी निगाहें टिकी हैं। <nis:link nis:type=tag nis:id=biharelections nis:value=BiharElections nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=mlc nis:value=MLC nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=voting nis:value=Voting nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bihar nis:value=Bihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=elections2023 nis:value=Elections2023 nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=democracy nis:value=Democracy nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=biharpolitics nis:value=BiharPolitics nis:enabled=true nis:link/>
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद इल्हान उमर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसके साथ ही इल्हान उमर की पिछली शादी से जुड़े आरोपों को फिर से हवा दे दी है। ट्रंप ने ये मांग एक संघीय अदालत में दायर उस दस्तावेज के बाद की है जिसमें मिनेसोटा की इस सांसद का नाम 'इल्हान नूर सईद एल्मी, जिसे इल्हान अब्दुल्लाही उमर के नाम से भी जाना जाता है' बताया गया है।

गुरुवार को आयोवा में एक रैली को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो के कार्यालय की तरफ से दायर इस दस्तावेज का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि उमर ने कांग्रेस सदस्य के रूप में शपथ लेते समय एक फर्जी नाम का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इल्हान उमर को लेकर एक पोस्ट डाला है जिसमें उन्होंने एक बार फिर से 'इल्हान उमर के रिश्ते उनके भाई से जोड़े हैं।'

डोनाल्ड ट्रंप ने इल्हान उमर पर क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा 'अभी कुछ समय पहले ही पता चला है कि इल्हान उमर, जिन्हें मैं कभी पसंद नहीं करता था, उनका असली नाम 'इल्हान उमर' नहीं है। इसी नाम का इस्तेमाल करके वह चुनी गईं और कांग्रेस सदस्य के तौर पर शपथ ली। असल में उनका नाम कुछ और है- 'इल्हान नूर सईद एल्मी', जो 'इल्हान उमर' से काफी अलग है।' उन्होंने आगे कहा 'उनका सरनेम उनके भाई अहमद नूर सईद एल्मी के सरनेम से बिल्कुल मेल खाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अपने भाई से ही शादी की थी और उनके बच्चे भी हैं, खैर, ऐसा करना कानूनी है या नहीं मुझे नहीं पता।'

ट्रंप ने आगे कहा 'उन्होंने शपथ लेने के लिए एक फर्जी नाम का इस्तेमाल किया है। मुझे लगता है कि उन्हें तुरंत कांग्रेस से इस्तीफा दे देना चाहिए।'

ट्रंप ने आरोप लगाया कि उन्होंने (इल्हान) धोखाधड़ी की बात कबूल कर ली है और 'डेमोक्रेटिक पार्टी ने उनकी सीट छोड़ दी है और इल्हान नूर सईद एल्मी, जो उनका असली नाम है, उन्होंने खुले तौर पर धोखाधड़ी की बात मान ली है। अब उन्हें कानूनी तौर पर इस प्रतिष्ठित सदन के सदस्य के रूप में काम करने की अनुमति नहीं मिलेगी।'

अदालत में अभी तक साबित नहीं हुए हैं आरोप

हालांकि अदालत में ये आरोप साबित नहीं हुए हैं और इल्हान उमर के कार्यालय ने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने किसी फर्जी नाम का इस्तेमाल किया है। अदालत में दाखिल दस्तावेजों में किसी दूसरे नाम का जिक्र होने भर से ही यह साबित नहीं हो जाता कि उन्होंने धोखाधड़ी की है या वे कांग्रेस में काम करने के अयोग्य हो गई हैं।

फॉक्स न्यूज को मिले अदालती दस्तावेजों का संबंध वाशिंगटन डीसी इलाके में स्थित उमर के आवास से जुड़े एक फेडरल सर्च वारंट से है जिसके दस्तावेजों को सील (गोपनीय) रखने की कोशिश की गई थी। इन दस्तावेजों से यह साबित नहीं होता कि कांग्रेस सदस्य ने किसी फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया है या वे कानूनी तौर पर कांग्रेस में काम करने के अयोग्य हैं।

इल्हान उमर ने आरोपों को खारिज किया

इल्हान उमर के कार्यालय ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और फॉक्स न्यूज डिजिटल से कहा 'यह पूरी तरह से गलत है। इल्हान उमर ही उनका असली नाम है।' उमर के प्रवक्ता ने इन आरोपों को 'बदनाम करने की एक हताश कोशिश' बताया और कहा कि 'यह शर्मनाक है कि मीडिया इस झूठ को लगातार हवा दे रहा है।'

इस विवाद के साथ ही वे आरोप भी फिर से सामने आ गए हैं जिनमें कहा गया था कि उमर के पूर्व पति अहमद नूर सईद एल्मी असल में उनके भाई हैं। उमर ने कई बार इन दावों का खंडन किया है।

बुधवार को 'एमएस नाउ' के एंकर क्रिस हेस के साथ एक इंटरव्यू में उमर ने इस आरोप को 'बेतुका' बताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या एल्मी के साथ उनका कोई पारिवारिक रिश्ता है तो उन्होंने जवाब दिया 'मेरी जानकारी में तो ऐसा नहीं है।' <nis:link nis:type=tag nis:id=ilhanomar nis:value=IlhanOmar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=trump nis:value=Trump nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=politicalscandal nis:value=PoliticalScandal nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=news nis:value=News nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=uspolitics nis:value=USPolitics nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=congress nis:value=Congress nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=election2024 nis:value=Election2024 nis:enabled=true nis:link/>
माफिया, राजनीति, शूटर और मर्डर का चतुष्कोण बिहार की राजनीति में बहुत पहले से रहा है। बिहार के विद्वान और अन्वेषी पत्रकार सुरेन्द्र किशोर ने एक संस्मरण लिखा है- उफ! माफिया के शूटर से वह इंटरव्यू। सुरेन्द्र किशोर के मुताबिक, यह इंटरव्यू एक अखबार और पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। ये 1984 की बात है। उस समय बिहार में कांग्रेस की सरकार थी। इस इंटरव्यू में शूटर ने स्वीकार किया था कि उसने अपने संरक्षक माफिया के कहने पर 13 लोगों का मर्डर किया था। सुरेन्द्र किशोर उस समय अखबार के पटना संवाददाता थे। उनका लिखा संस्मरण कुछ इस प्रकार है-

माफिया का वो शूटर!

एक दिन सुरेन्द्र किशोर के एक परिचित, एक व्यक्ति को लेकर उनके पास पहुंचे। सुरेन्द्र किशोर के परिचित ने अपने साथ आये व्यक्ति का परिचय कराया, ये मेरे रिश्तेदार हैं। पहले उनके (बिहार के एक बड़े माफिया का नाम लेकर) बॉडीगार्ड और शूटर थे। अब इनका, उनसे झगड़ा हो गया है और दोनों एक दूसरे के जान के प्यासे बन गये हैं। जिनका शूटर के रूप में परिचय कराया गया था, वे लंबे ऊंचे कद के बलिष्ठ व्यक्ति थे। दरअसल वे उत्तर प्रदेश के पीएसी के भगोड़े सिपाही थे और अचूक निशानेबाज थे। वे केवल आवाज सुनकर रिवॉल्वर से निशाना साध सकते थे।

शूटर ने बेबाकी से कहा- मैंने 13 मर्डर किए

शूटर की शिकायत थी, माफिया के लिए सारे मर्डर मैंने किए, लेकिन नाम उस माफिया का हो जाता है। मीडिया में सिर्फ उसी का नाम होता है। जबकि हकीकत में वह माफिया इतना डरपोक है कि चूहा भी नहीं मार सकता। जब काम मैं करता हूं तो मेरा भी नाम होना चाहिए। तब सुरेन्द्र किशोर जी ने शूटर से पूछा, आपने कितने मर्डर किये हैं? तो उसने अपना रिवाल्वर दिखाते हुए कहा, यह हथियार मेरे लिए शुभ साबित हुआ है, इससे मैंने कई मर्डर किये हैं। कुल 13 लोगों को मारा है उसके (माफिया का नाम लेकर) कहने पर। फिर शूटर ने बताया कि कैसे उसने एक चर्चित मजदूर नेता को मारा था।

शूटर की मांग- मेरा फोटो सहित अखबार में इंटरव्यू छापिए

फिर सुरेन्द्र किशोर ने पूछा, आप मुझसे क्या चाहते हैं? तो शूटर ने जवाब दिया, मैं चाहता हूं कि आप मेरा फोटो समेत अखबार में इंटरव्यू छापिए। तब सुरेन्द्र किशोर ने कहा, इंटरव्यू में आपको बताना होगा कि आपने कितने और कैसे मर्डर किये हैं। तब शूटर ने कहा, आप कहिए तो मैं हैंडनोट पर लिख कर दे दूं, लेकिन मेरा फोटो के साथ इंटरव्यू जरूर छपना चाहिए। सुरेन्द्र किशोर ने उसे समझाया कि इंटरव्यू में मर्डर की बात कबूल करने पर पुलिस केस कर देगी और आपकी परेशानी बढ़ जाएगी। लेकिन शूटर मुकदमे का भी सामना करने के लिए भी तैयार था।

शूटर के इंटरव्यू को लेकर उधेड़बुन

सुरेन्द्र किशोर ने शूटर को टालने की कोशिश की लेकिन वह इंटरव्यू देने के लिए व्यग्र था। यह इंटरव्यू इस बड़े माफिया के खिलाफ जाने वाला था। इस माफिया को बड़े बड़े नेताओं का संरक्षण हासिल था। वे दुविधा में पड़ गये कि ऐसे शूटर का इंटरव्यू छापना चाहिए या नहीं। जिस माफिया से शूटर का झगड़ा हुआ था, वह और उसके आदमी शूटर को खोज रहे थे। ऐसे व्यक्ति से मिलना भी एक जोखिम का काम था। बहरहाल, सुरेन्द्र किशोर इंटरव्यू लेने के लिए राजी हो गये।

इंटरव्यू छपते ही शूटर का बहुत नाम हो गया

लंबी बातचीत हुई जो बहुत सनसनीखेज थी। इंटरव्यू करीब 30 पेज में तैयार हुआ। शूटर ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए कुछ तस्वीरें भी दीं। कॉपी तैयार होने के बाद सुरेन्द्र किशोर इस शूटर का इंतजार करने लगे, ताकि वह कॉपी पर अपने दस्तखत कर इसे प्रमाणिक बना दें। उसने बिना किसी संकोच के, कागज पर खुशी खुशी दस्तखत कर दिये। सुरेन्द्र किशोर ने यह इंटरव्यू अखबार और पत्रिका में भेजा। संयोग से दोनों जगह प्रकाशित हो गया। इंटरव्यू छपने के बाद वह शूटर अपने इलाके में चर्चित हो गया। उसका बहुत नाम हो गया तो वह बहुत खुश हुआ।

चुनाव, माफिया, हत्या और वह शूटर

इंटरव्यू छपने के बाद वह शूटर सुरेन्द्र किशोर से मिलने फिर आया। उसने आभार जताया फिर चला गया। एक साल बाद वह फिर लौटा। अब वह शूटर किसी दूसरे माफिया के साथ हो गया था। तब तक 1985 का बिहार विधानसभा चुनाव हो चुका था। शूटर जिस माफिया के साथ व उसने 1985 में विधानसभा का चुनाव लड़ा था। लेकिन हार गया था। चुनाव के दौरान विजयी प्रत्याशी के लोगों ने

माफिया के भाई को मार दिया था। तब खार खाये माफिया ने शूटर से कहा, जीते हुए उम्मीदवार को मार दो। लेकिन तब तक शूटर बदल चुका था। उसने माफिया की बात टाल दी। मुलाकात के दौरान शूटर ने सुरेन्द्र किशोर से कहा- आपके समझाने और मना करने के बाद अब मैं यह काम नहीं करना चाहता।

सुरेन्द्र किशोर के समझाने से सुधर गया शूटर

सुरेन्द्र किशोर ने उस शूटर को एक फिर समझाया, आप यह सब काम छोड़ दीजिए। उसने हां कह कर उनकी बात का समर्थन किया। फिर उसने सुरेन्द्र किशोर का चरण स्पर्श किया और वहां से चला गया।

(साभार- सुरेन्द्र किशोर जी के संस्मरण, उफ! माफिया के शूटर से वह इंटरव्यू!) <nis:link nis:type=tag nis:id=biharpolitics nis:value=BiharPolitics nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=mafia nis:value=Mafia nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=shooter nis:value=Shooter nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=crime nis:value=Crime nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=journalism nis:value=Journalism nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=interview nis:value=Interview nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=surendrakishore nis:value=SurendraKishore nis:enabled=true nis:link/>
कटिहार में 31 साल बाद बिछड़ा बेटा अपने घर वापस लौटा तो गांव में लोग आश्चर्यचकित रह गए, लेकिन सबसे बड़ी बात ये थे कि गांव में उसे लोग पिंटू यादव कहते थे, लेकिन जब वो घर वापस आया तो वो अब्दुल जब्बार बन चुका था। मामला कटिहार के मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव से जुड़ा हुआ है, जहां एक परिवार का बेटा 31 साल बाद अपने घर लौट आया। घर और गांव के लोग उसे बचपन में पिंटू यादव के नाम से जानते थे, लेकिन अब वो युवक अब्दुल जब्बार बन चुका है।

बेटे को सामने देख मां की आंखें हो गई नम

बेटा जब घर आया तो बेटे को सामने देखकर मां मीणा देवी की आंखें नम हो गईं। पिता मोतीलाल यादव और भाई ने भी उसे गले लगा लिया। इसके बाद इसकी खबर गांव में आग की तरह फैल गई। खबर फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंच गए और सभी आश्चर्य से पिंटू यानी अब्दुल जब्बार को देखते रहे और उसके घर से चले जाने और वापस लौटने की कहानी सुनते रहे।

8 साल की उम्र में ट्रेन से बिछड़ गया था पिंटू यादव, ऐसे बन गया अब्दुल जब्बार

पिता मोतीलाल यादव और मां वीणा देवी ने बताया कि उसका बेटा पिंटू करीब आठ साल की उम्र में अपने दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था और ट्रेन में उसे नींद आ गई। इसके बाद उसके दोस्त तो ट्रेन से उतर गए, लेकिन वह ट्रेन में सोता रह गया। नींद खुलने पर उसने खुद को पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पाया।

अब वो अनजान जगह पहुंच गया था और वहां भटकने के दौरान उसके बेटे को हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम नामक व्यक्ति ने सहारा दिया और उसे अपने घर ले जाकर उसका पालन पोषण किया। इस दौरान उसकी पहचान भी बदल गई और उसक नाम उन्होंने अब्दुल जब्बार रख दिया, जिससे उसकी पहचान बन गई। समय बीतने के बाद उसकी शादी बंगाल की ही मुतैना खातून से हुई और उसके दो बेटे और एक बेटी है।

दिल्ली मे काम करने के दौरान मनिहारी के लोगों से हुई थी दोस्ती

घर वापस लौटा पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार ने बताया कि वो मजदूरी का काम करने के लिए दिल्ली गया था, जहां दिल्ली में काम करने के दौरान उसे मनिहारी के कुछ लोगों से दोस्ती हो गई। इसके बाद उसने अपने परिवार की तलाश शुरू की और एक दोस्त की मदद से उसने अपने परिवार की पूरी जानकारी निकाली। उसने अपने दोस्त को बताया कि उसका घर मनिहारी में है, जहां उसके पिता का नाम मोतीलाल यादव और गंगा किनारे उसका गांव है। दोस्त ने पड़ताल शुरू की और आखिर खोज निकाला और काफी पूछताछ के बाद उसे कांटाकोष में अपने पिता के नाम के सहारे अपने घर का पता मिला।

आंख के ऊपर कटने का निशान देख मां ने की पहचान

उसने बताया कि घर पहुंचने पर मां ने उसकी आंख के ऊपर कटने का निशान देखा और अपने बेटे को पहचान लिया। गांव के लोग बड़ी संख्या में उसके घर पहुंच गए कई समाजसेवी और जानकार भी पहुंचे और घर वापस लौटे पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार से पूछताछ शुरू हुई। इस दौरान पिंटू यादव उर्फ अब्दुल जब्बार ने बचपन की कुछ ऐसी बातें भी बताईं, जिनसे परिजनों और ग्रामीणों को विश्वास हो गया कि ये पिंटू ही है, जो गांव से बिछड़ गया था। <nis:link nis:type=tag nis:id=lostandfound nis:value=lostandfound nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=familyreunion nis:value=familyreunion nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=emotionalstory nis:value=emotionalstory nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=indiannews nis:value=indiannews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=heartwarming nis:value=heartwarming nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=reunion nis:value=reunion nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=kutihar nis:value=kutihar nis:enabled=true nis:link/>
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर पाकिस्तान के डबल स्टैडर्ड को बेनकाब कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी भाविका मंगलानंदन ने कश्मीर और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर उपदेश देने वाले पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के मारे गए सैनिकों को भारतीय सेना ने ही पूरे इस्लामी रीति-रिवाज के साथ दफनाया था।

भाविका मंगलानंदन ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दे पर भारत को उपदेश देने के पाकिस्तान के नैतिक अधिकार पर सवाल उठाया। मंगलानंदन ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अपने सैनिकों के शवों को लेने से इनकार कर दिया था। उस समय भारतीय सेना ने ही मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों को पूरे सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफनाया था। <nis:link nis:type=tag nis:id=india nis:value=India nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=pakistan nis:value=Pakistan nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=un nis:value=UN nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=kargil nis:value=Kargil nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=humanrights nis:value=HumanRights nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=diplomacy nis:value=Diplomacy nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=truth nis:value=Truth nis:enabled=true nis:link/>
तिब्बत क्षेत्र में गुरुवार शाम को आए जबरदस्त भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस घटना में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई है और 54 लोग घायल हुए हैं। तिब्बत के उत्तरी क्षेत्र के शहर नागकू में सैकड़ों घर ढह गए। चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7 थी। भूकंप गुरुवार रात लगभग 14:33 बजे आया। इसका केंद्र उत्तरी तिब्बत के नागकू में स्थित एक कम आबादी वाला और अधिक ऊंचाई वाला इलाका था। इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था।

नागकू में भूकंप से 339 घर ढहे

नागकू के सिटी मीडिया ऑफिस ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि कम से कम 339 घर ढह गए। बचाव और राहत कार्यों के लिए स्थानीय काउंटी से 1600 से अधिक लोगों को तैनात किया गया है। क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचाई गई है, जिसमें 1000 प्रीफैब्रिकेटेड घर, 3000 टेंट और फोल्डिंग बेड के साथ ही फ्लैशलाइट और सर्दियों के कपड़े शामिल हैं।

संचार और ट्रेनों के संचालन पर असर

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शुक्रवार को बताया कि इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में संचार व्यवस्था ठप हो गई है। क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेनों को रोकने के लिए अधिकारियों ने आपातकालीन कदम उठाए हैं। भूकंप के चलते कई जगहों पर चट्टानों के खिसकने की घटनाएं हुई हैं। इसकी वजह से नेशनल हाईवे 317 का एक हिस्सा बंद करना पड़ा। मलबे को हटाने का काम चल रहा है और फिलहाल केवल आपातकालीन, बचाव और आधिकारिक सहायता वाहनों को ही वहां से गुजरने की अनुमति दी जा रही है।

5 साल का सबसे बड़ा भूकंप

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में इस क्षेत्र में आया सबसे बड़ा भूकंप था।भूकंप प्रभावित क्षेत्र में जहां लोगों के घर ढह गए हैं, वहीं कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शिन्हुआ ने बताया कि अगले तीन दिनों तक भूकंप प्रभावित क्षेत्र में रुक-रुक कर बर्फबारी की संभावना है। नागकू तिब्बत की राजधानी ल्हासा से 300 किमी से अधिक उत्तर में स्थित है। <nis:link nis:type=tag nis:id=tibetearthquake nis:value=TibetEarthquake nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=naturaldisaster nis:value=NaturalDisaster nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=rescueoperations nis:value=RescueOperations nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=earthquake nis:value=Earthquake nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=news nis:value=News nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=reliefwork nis:value=ReliefWork nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=tibet nis:value=Tibet nis:enabled=true nis:link/>
पटनाः बिहार में एमएलसी चुनाव को लेकर 23 अक्टूबर को वोट डाले जायेंगे। इसके बाद 27 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। इस तरह से चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरे हो जायेंगे। बिहार विधान परिषद के लिए निर्वाचित होने सदस्यों को सैलरी, पावर और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी लोगों में काफी उत्सुकता होती है।

कितना होता है सैलेरी पैकेज?

बिहार विधान पार्षद के सैलेरी की बात करें तो, पूरा पैकेज 1.60 लाख का होता है। जिसमें बेसिक सैलेरी 50 हजार रुपये हर महीने मिलते हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय भत्ता के रूप में 55 हजार रुपए मिलते हैं। इसके साथ ही स्टेशनरी खर्च 15 हजार और फोन भत्ता 8 हजार 300 रुपये प्रति महीने मिलते है। एमएलसी को निजी सहायक यानी पीए के लिए भी 40 हजार का भत्ता मिलता है। इसके अलावा एमएलसी को दैनिक भत्ता भी दिया जाता है। पटना में 3000 और राज्य से बाहर 3500 रुपये हर रोज के हिसाब से मिलता है।

एमएलसी के पावर और अधिकार क्या होते हैं?

जानकारी के अनुसार बिहार में विधान पार्षद सभी तरह के बिल सदन में पेश कर सकते हैं। विधान परिषद में राज्य सरकार के वार्षिक बजट पर चर्चा होती है, लेकिन वित्तीय विधेयक के मामले में अंतिम रूप से फैसला विधानसभा में ही लिया जा सकता है। हालांकि विधान पार्षद वित्तीय विधेयक को छोड़कर ही कोई बिल सदन में पेश कर सकते हैं।

विधान पार्षद सरकारी योजनाओं या फिर प्रशासनिक मामलों में सदन में सवाल पूछ सकते हैं। साथ ही ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ला सकते हैं। एमएलसी के क्षेत्र में विकास से जुड़े काम के लिए हर साल निधि उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही एमएलसी बिहार सरकार में कैबिनेट या फिर राज्य मंत्री पद की शपथ भी ले सकता है।

एमएलसी को मिलने वाली अन्य सुविधाएं

बिहार में विधान पार्षद को सैलरी, भत्ता और पीए के अलावा कई अन्य सुविधाएं भी मिलतीं हैं। सभी एमएलसी को राजधानी पटना में सरकारी आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा उन्हें 2 हजार यूनिट तक बिजली फ्री में मिलती है। एमएलसी के साथ उनके परिवार के लोगों के लिए मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। हर साल 4 लाख रुपये तक का कूपन रेल या फिर हवाई यात्रा के लिए मिलता है। इसके अलावा अगर नई गाड़ी खरीदने हो तो 25 लाख रुपये तक का लोन रियायती ब्याज दर पर मिलता है। इसके बाद एमएलसी का कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद 45 हजार रुपये तक पेंशन और स्वास्थ्य सुविधा भी मिलती है। <nis:link nis:type=tag nis:id=bihar nis:value=Bihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=mlc nis:value=MLC nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=salary nis:value=Salary nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=politics nis:value=Politics nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=government nis:value=Government nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=rights nis:value=Rights nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=facilities nis:value=Facilities nis:enabled=true nis:link/>
पटनाः बिहार में एमएलसी चुनाव को लेकर 23 अक्टूबर को वोट डाले जायेंगे। इसके बाद 27 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। इस तरह से चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरे हो जायेंगे। बिहार विधान परिषद के लिए निर्वाचित होने सदस्यों को सैलरी, पावर और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी लोगों में काफी उत्सुकता होती है।

कितना होता है सैलेरी पैकेज?

बिहार विधान पार्षद के सैलेरी की बात करें तो, पूरा पैकेज 1.60 लाख का होता है। जिसमें बेसिक सैलेरी 50 हजार रुपये हर महीने मिलते हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय भत्ता के रूप में 55 हजार रुपए मिलते हैं। इसके साथ ही स्टेशनरी खर्च 15 हजार और फोन भत्ता 8 हजार 300 रुपये प्रति महीने मिलते है। एमएलसी को निजी सहायक यानी पीए के लिए भी 40 हजार का भत्ता मिलता है। इसके अलावा एमएलसी को दैनिक भत्ता भी दिया जाता है। पटना में 3000 और राज्य से बाहर 3500 रुपये हर रोज के हिसाब से मिलता है।

एमएलसी के पावर और अधिकार क्या होते हैं?

जानकारी के अनुसार बिहार में विधान पार्षद सभी तरह के बिल सदन में पेश कर सकते हैं। विधान परिषद में राज्य सरकार के वार्षिक बजट पर चर्चा होती है, लेकिन वित्तीय विधेयक के मामले में अंतिम रूप से फैसला विधानसभा में ही लिया जा सकता है। हालांकि विधान पार्षद वित्तीय विधेयक को छोड़कर ही कोई बिल सदन में पेश कर सकते हैं।

विधान पार्षद सरकारी योजनाओं या फिर प्रशासनिक मामलों में सदन में सवाल पूछ सकते हैं। साथ ही ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ला सकते हैं। एमएलसी के क्षेत्र में विकास से जुड़े काम के लिए हर साल निधि उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही एमएलसी बिहार सरकार में कैबिनेट या फिर राज्य मंत्री पद की शपथ भी ले सकता है।

एमएलसी को मिलने वाली अन्य सुविधाएं

बिहार में विधान पार्षद को सैलरी, भत्ता और पीए के अलावा कई अन्य सुविधाएं भी मिलतीं हैं। सभी एमएलसी को राजधानी पटना में सरकारी आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा उन्हें 2 हजार यूनिट तक बिजली फ्री में मिलती है। एमएलसी के साथ उनके परिवार के लोगों के लिए मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। हर साल 4 लाख रुपये तक का कूपन रेल या फिर हवाई यात्रा के लिए मिलता है। इसके अलावा अगर नई गाड़ी खरीदने हो तो 25 लाख रुपये तक का लोन रियायती ब्याज दर पर मिलता है। इसके बाद एमएलसी का कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद 45 हजार रुपये तक पेंशन और स्वास्थ्य सुविधा भी मिलती है। <nis:link nis:type=tag nis:id=bihar nis:value=Bihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=mlc nis:value=MLC nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=salary nis:value=Salary nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=politics nis:value=Politics nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=government nis:value=Government nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=rights nis:value=Rights nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=facilities nis:value=Facilities nis:enabled=true nis:link/>
यूनाइटेड नेशंस हर पांच साल में अपने सेक्रेटरी-जनरल को चुनता है। कुछ परिस्थितियों में इसे पांच साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान सेक्रेटरी-जनरल यानी महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल इस साल दिसंबर में खत्म हो रहा है। परंपरा के अनुसार, पिछले किसी भी सेक्रेटरी-जनरल ने तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं लड़ा है, सिवाए कर्ट वॉल्डहाइम के। ऑस्ट्रिया के वरिष्ठ राजनयिक और रूढ़िवादी नेता कर्ट वॉल्डहाइम संयुक्त राष्ट्र के चौथे सेक्रेटरी जनरल चुने गए थे। उनके तीसरे कार्यकाल के चुनाव के प्रयास को चीन ने वीटो किया था। उन पर नाजी जर्मनी के लिए खुफिया अधिकारी के रूप में काम करने का भी आरोप था।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चुनाव कैसे होता है?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव का पहला चरण नामांकन होता है, जिसमें सदस्य देश अपने योग्य उम्मीदवारों के नाम औपचारिक रूप से सुरक्षा परिषद और महासभा के अध्यक्षों के पास भेजते हैं। वर्ष 2016 से शुरू हुए सुधारों के तहत उम्मीदवारों को महासभा के समक्ष अपने दृष्टिकोण की प्रस्तुति देनी होती है। वे सदस्य देशों और नागरिक समाज के प्रश्नों के उत्तर देते हैं। सुरक्षा परिषद (15 सदस्य) बंद कमरे में "स्ट्रॉ पोल" के माध्यम से उम्मीदवारों पर गुप्त मतदान करती है। किसी उम्मीदवार को सिफारिश योग्य बनने के लिए कम से कम 9 वोटों की आवश्यकता होती है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव में सुरक्षा परिषद की भूमिका

वोटिंग के दौरान सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों (अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, रूस, फ्रांस) में से अगर कोई भी सदस्य वीटो शक्ति का इस्तेमाल करता है तो इससे उम्मीदवारी रद्द हो जाती है। सर्वसम्मति बनने पर सुरक्षा परिषद केवल एक नाम की सिफारिश महासभा को करती है। इसके बाद सुरक्षा परिषद की अनुशंसित नाम पर महासभा (193 सदस्य देश) में मतदान होता है। आमतौर पर महासभा सर्वसम्मति या बहुमत से उस नाम पर अंतिम मुहर लगाती है। हालांकि, इसमें बड़ी शर्त यह है कि सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्य देशों का कोई भी नागरिक महासचिव नहीं बन सकता।

नए सेक्रेटरी जनरल के उम्मीदवारों पर वीटो

2025 में, UNGA प्रेसिडेंट ने मेंबर-स्टेट्स से कैंडिडेट्स को नॉमिनेट करने के लिए कहा। इसमें इक्वाडोर से दो कैंडिडेट्स को नॉमिनेट किया गया था, लेकिन वहां की सरकार की ओर से कोई नॉमिनेशन नहीं आया था। वहां की सरकार ने कैंडिडेट्स से यह भी कहा गया कि वे UN की किसी भी नौकरी से इस्तीफ़ा दें और अपने फंडिंग सोर्स बताएं। संयुक्त राष्ट्र में कभी कोई महिला सेक्रेटरी-जनरल नहीं रही है, और इस बार, महिला कैंडिडेट्स के नॉमिनेशन को साफ तौर पर बढ़ावा दिया गया। आम तौर पर, सेक्रेटरी-जनरल का पद रीजनल ग्रुप्स के बीच रोटेट होता रहता है, और इस बार, लैटिन अमेरिका रीजनल प्रायोरिटी है। अब तक इस क्षेत्र से सिर्फ एक सेक्रेटरी-जनरल पेरू से जेवियर पेरेज डी कुएलर चुनए गए हैं। ऐसे में गुटेरेस की कुर्सी की रेस में सबसे आगे दो महिलाएं थीं: कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिनस्पैन और गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट। लेकिन यूएनएससी के स्थायी सदस्यों ने इन दोनों को वीटो कर दिया है, जिससे ये चुनावी दौर से बाहर हो गई हैं।

नए सेक्रेटरी जनरल के चुनाव का पहला विकल्प

इस कारण नए सेक्रेटरी-जनरल का चुनाव काफी पेचीदा माना जा रहा है। अब तीन ऑप्शन हैं: पहला, नए कैंडिडेट नॉमिनेट किए जाएं। लेकिन ऐसे कैंडिडेट को मुश्किल सवालों के जवाब देने होंगे: वे पिछले 10 महीनों में पहले इस रेस में क्यों शामिल नहीं हुए, और उन्होंने उस खुली और ट्रांसपेरेंट प्रोसेस से क्यों परहेज किया जिससे बाकी सभी कैंडिडेट गुजरे। यह पक्का नहीं है कि हालात को देखते हुए किसी नए कैंडिडेट को UNSC से जरूरी सपोर्टिव वोट मिलेंगे या नहीं। यह भी पक्का नहीं है कि P-5 किसी नए कैंडिडेट पर सहमत हो पाएगा या नहीं।

दूसरा विकल्प

दूसरा विकल्प है कि जिन दो P-5 सदस्यों ने शुरू में सबसे आगे रहने वालों का विरोध किया था, वे अपना मन बदल लें। उनके राजदूत अगले चरण से दूर रहें और गले पांच साल के लिए ग्रिनस्पैन या रोड्रिग्स-बिर्केट को UN का नेतृत्व करने दें। पहले भी ऐसा हुआ है, जब चीन ने शुरू में वीटो करने के बाद वाल्डहाइम को उनके पहले और दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने दिया था। फ्रांस ने अन्नान के लिए भी ऐसा ही किया था।

तीसरा विकल्प

तीसरा विकल्प यह है कि अगर पहले दो फेल हो जाते हैं और UNSC कोई सिफारिश नहीं कर पाता है, तो यह है कि UNGA मौजूदा सेक्रेटरी-जनरल का टर्म दो से तीन साल बढ़ा दे। ऐसा 1950 में ट्रिग्वे ली के साथ हुआ था। अगर गुटेरेस मना कर देते हैं, तो उनकी डिप्टी, अमीना मोहम्मद, UN को लीड कर सकती हैं; ऐसा 1961 में हुआ था, जब हैमरशॉल्ड की एक एयर क्रैश में मौत हो गई थी, और तीनों अंडर-सेक्रेटरी ने यू थांट के अपॉइंट होने तक चार्ज संभाला था।

संयुक्त राष्ट्र्र महासभा करे नए सेक्रेटरी जनरल का चुनाव

विशेषज्ञों का कहना है कि इतने दांवपेंच के कारण सेक्रेटरी-जनरल का चुनाव P-5 के दबदबे वाले UNSC के असर से हटाकर दुनिया भर में रिप्रेजेंटेटिव UNGA के कंट्रोल में लाना चाहिए। 1946 में, UNGA ने जल्दबाजी में रेजोल्यूशन 11 को अपना लिया; रेज़ोल्यूशन में बताया गया था कि “पहले सेक्रेटरी-जनरल को पांच साल के लिए अपॉइंट किया जाएगा, उस समय के आखिर में अगले पांच साल के टर्म के लिए अपॉइंटमेंट खुला रहेगा”। इसमें यह भी कहा गया था कि “सिक्योरिटी काउंसिल के लिए यह अच्छा होगा कि वह जनरल असेंबली के विचार के लिए सिर्फ एक कैंडिडेट को आगे बढ़ाए और जनरल असेंबली में नॉमिनेशन पर बहस से बचा जाए।” अगर सब कुछ फेल हो जाता है, तो गुटेरेस के वारिस के लिए मेंबर-स्टेट्स के हेड-हंटिंग पर डिपेंड रहने के बजाय, एलिजिबल कैंडिडेट्स को लिस्ट करने का काम एक इंडिपेंडेंट पैनल को दिया जा सकता है। <nis:link nis:type=tag nis:id=unsc nis:value=UNSC nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=unga nis:value=UNGA nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=secretarygeneral nis:value=SecretaryGeneral nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=globalpolitics nis:value=GlobalPolitics nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=internationalrelations nis:value=InternationalRelations nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=reform nis:value=Reform nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=womenleadership nis:value=WomenLeadership nis:enabled=true nis:link/>
राज्य में हो रहे चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में एनडीए एक गंभीर टास्क के साथ चुनावी जंग में शामिल हो चुका है। इसी चुनावी जंग के दौरान तय रणनीति का फलाफल कल के चुनाव में दिखेगा। एनडीए के लिए चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस लिए महत्वपूर्ण है कि केवल पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के अलावा सभी सीटों पर एनडीए उम्मीदवार को हार मिली थी। गत चुनाव में पटना शिक्षक सीट से भाजपा के प्रो. नवल किशोर यादव, दरभंगा शिक्षक सीट से कांग्रेस के डॉ. मदन मोहन झा, तिरहुत शिक्षक सीट से भाकपा के संजय कुमार सिंह और सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय उम्मीदवार अफाक अहमद ने जीत दर्ज की थी।

पटना शिक्षक क्षेत्र

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव त्रिकोणात्मक संघर्ष की और जाते दिख रहा है। हालांकि मुख्य मुकाबला बीजेपी के सिटिंग प्रो. नवल किशोर यादव और राजद के डॉ. संजीव और जनसुराज की दिव्या ज्योति से है। दरअसल, यहां की जंग में महत्वपूर्ण यह है कि एनडीए से भाजपा के उम्मीदवार प्रो. नवल किशोर यादव की चुनौती सवर्ण मत और यादव मत को एक तराजू पर तौलना है। राजद के डॉ. संजीव की मुश्किल यह है कि सवर्ण इनकी किस हद तक मदद करते हैं और राजद का MY समीकरण कितना सक्रियता के साथ वोट करता है। हालांकि इनका पैर खींचने को कांग्रेस ने डॉ. संजय यादव को उतारा है। ये कितना और किसे नुकसान पहुंचाते हैं, परिणाम इस पर भी निर्भर है।

दरभंगा शिक्षक क्षेत्र

दरभंगा शिक्षक क्षेत्र के सिटिंग एमएलसी मदन मोहन झा है ये पुराने कांग्रेसी हैं और लगातार इस कोशिश में लगे हैं कि यहां का प्रतिनिधित्व किसी को न दें। डॉ. मदन मोहन झा का मुकाबला एनडीए समर्थित डॉ. घनश्याम राय से है। पर इस चुनाव को तीसरा कोण जनसुराज के डॉ. सुरेश प्रसाद राय बना रहे हैं। डॉ. सुरेश राय गत चुनाव के रनर रहे हैं। पर इस बार वे भाजपा के नहीं जन सुराज के उम्मीदवार हैं।

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र

सीपीआई के संजय कुमार सिंह (सीपीआई /भाकपा) गत चुनाव में विजयी उम्मीदवार थे। इस बार उनका मुकाबला बीजेपी के नरेंद्र प्रसाद सिंह से है। पर तिरहुत शिक्षक क्षेत्र से जनसुराज के बागी उम्मीदवार भूषण झा एक ट्विस्ट ले कर आए हैं। सवर्ण मतों में जितनी सेंधमारी करेंगे बीजेपी उम्मीदवार की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. वी मोहन इस चुनाव को त्रिकोणात्मक दिशा की ओर ले जाते दिख रहे हैं।

सारण शिक्षक क्षेत्र

सारण शिक्षक क्षेत्र के सिटिंग एमएलसी अफ़ाक़ अहमद का मुकाबला जदयू के उम्मीदवार आनंद पुष्कर से है। महागठबंधन के प्रत्याशी प्रो. जयराम यादव चुनाव को त्रिकोणात्मक संघर्ष पर उतार रहे हैं। पर निर्दलीय प्रत्याशी नजमुल होदा इनके समीकरण बिगाड़ने में लगे हैं।अब देखना यह है कि जदयू प्रत्याशी को उम्मीद के अनुरूप समर्थन मिलता है, तो इसे चुनावी प्रबंधन के अनुकूल परिणाम के रूप में देखा जा सकता है। वैसे सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव केवल प्रत्याशियों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की रणनीति और शिक्षक मतदाताओं की प्राथमिकता तथा प्रभुनाथ सिंह की राजनीतिक विरासत के प्रभाव पर निर्भर करता है। <nis:link nis:type=tag nis:id=election nis:value=election nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bihar nis:value=Bihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nda nis:value=NDA nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=teachers nis:value=teachers nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=politics nis:value=politics nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=mlc nis:value=MLC nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=elections nis:value=elections nis:enabled=true nis:link/>
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राजद के विधायक और पूर्व कृषि मंत्री सह मुख्य सचेतक विरोधी दल कुमार सर्वजीत ने बिहार विधानसभा स्पीकर डॉ प्रेम कुमार को चुनौती दी है। कुमार सर्वजीत ने कहा है कि गयाजी के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल की बदहाली को उन्हें खुद आकर देखना चाहिए। अगर उनकी बात गलत निकले तो बेशक उनकी विधायिकी ही रद्द कर दी जाए।

विधायक ने दी बिहार विधानसभा अध्यक्ष को चुनौती

बोधगया विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि 'हमने सदन में बात रखी थी अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बदहाली का मंजर है। यहां पर मरीज को बेड नसीब नहीं होता। मरीज को जमीन पर सुलाया जाता है। इमरजेंसी वार्ड और सेवा की हालत भी सही नहीं है। ENT की भी हालत सही नहीं है। वहां का एक भी उपकरण संचालित नहीं है। इन सारी समस्या को आम जनता के लाभ के लिए हमने सदन में रखा था।'

अगर मैं गलत तो रद्द कर दें मेरी विधायकी: कुमार सर्वजीत, राजद विधायक

कुमार सर्वजीत ने आरोप लगाया कि 'विधानसभा स्पीकर डॉ प्रेम कुमार गयाजी का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने तो कहा था कि वहां की हालत बहुत अच्छा है हमने जाकर के खुद देखा है। इस बात पर मैं उन्हें चुनौती देता हूं। मैंने कहा है कि प्रेम कुमार हमारे साथ मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल चलें। अगर वहां का एक भी उपकरणसंचालित हो और इमरजेंसी की हालत सही निकले, तो उनकी बात के अनुसार हमारी सदस्यता को वह रद्द कर दें। हमने आम जनता के लिए सदन में बात रखी है। हम सरकार का ध्यान आकर्षित कर यहां सुधार करना चाहते हैं।'

बीटीएमसी ने अपनी गलती से 88 लाख जुर्माना भरा: कुमार सर्वजीत

विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार से अनुरोध करते हुए कहा है कि 'बोधगया ज्ञान की भूमि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है, यहां देश दुनिया से लोग आते हैं। यहां पर बीटीएमसी कमेटी महाबोधि मंदिर को संचालित करती है। संचालन नियमित हो इसको लेकर 5 महीने से कमेटी का गठन नहीं हुआ। न यहां पर कोई मेंबर है, न ही कोई सचिव है। एक्ट कहता है कि 100 दिन के अंदर कमेटी का गठन कर लेना चाहिए। पर्यटकों का सीजन आ रहा है और अभी तक कमेटी का कोई गठन नहीं हुआ है। इस परिस्थिति में मंदिर कैसे चलेगा? ट्रस्ट कैसे चलेगा? बीटीएमसी की गलती से पिछले बार 88 लाख जुर्माना भरा गया था। बिहार विधानसभा स्पीकर डॉक्टर प्रेम कुमार को हमने कहा कि आप अध्यक्ष हैं, आपके रहते मंदिर की कमेटी का गठन क्यों नहीं हो रहा है।' <nis:link nis:type=tag nis:id=biharpolitics nis:value=BiharPolitics nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=mlachallenge nis:value=MLAChallenge nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=medicalissues nis:value=MedicalIssues nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=biharassembly nis:value=BiharAssembly nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=publichealth nis:value=PublicHealth nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=governance nis:value=Governance nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=awareness nis:value=Awareness nis:enabled=true nis:link/>
पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और नीतीश कुमार के अत्यंत करीबी वशिष्ठ नारायण सिंह अभी बीमार चल रहे हैं। जब MLC चुनाव प्रचार के दौरान बुधवार को जदयू विधायक अनंत सिंह वशिष्ठ बाबू से मिलने आईजीआईएमएस अस्पताल गये तो उनकी खराब सेहत की तस्वीर सार्वजनिक हुई। अब उनकी उम्र 78 साल हो चुकी है। वे लालू यादव के हमउम्र हैं और नीतीश कुमार से तीन साल बड़े हैं। लेकिन बीमारी के कारण वे कृशकाय हो गये हैं। वशिष्ठ नारायण सिंह बिहार के उन गिने चुने नेताओं में एक हैं, जिनकी लालू यादव और नीतीश कुमार, दोनों दिल से इज्जत करते हैं। तीनों के बीच यह तालमेल और समन्वय जेपी आंदोलन के समय से है। लालू यादव, वशिष्ठ बाबू का कितना सम्मान करते थे, यह एक वाकये से समझा जा सकता है।

1990- लालू यादव CM बने, वशिष्ठ बाबू मंत्री

1990 में जब लालू यादव की सरकार बनी तो वशिष्ठ बाबू मंत्री बने। उस समय लालू यादव, नीतीश कुमार और वशिष्ठ नारायण सिंह में बहुत प्रगाढ़ संबंध था। लेकिन चार साल होते होते (1994) नीतीश कुमार और लालू यादव में अनबन शुरू हो गयी। लालू यादव की कार्यशैली पर निरंकुश होने का आरोप लगने लगा। नीतीश कुमार अगर नीतियों के संबंध में कोई सलाह देते तो ये बात मुख्यमंत्री लालू यादव को नागवार गुजरती। अति पिछड़ा वर्ग के अलग आरक्षण कोटा मुद्दे पर बात इतनी बिगड़ गयी कि नीतीश कुमार ने लालू यादव से अलग होने का फैसला कर लिया।

CM लालू यादव पर मंत्रियों की उपेक्षा का आरोप

दो तीन साल के शासन के बाद लालू यादव की लोकप्रियता बहुत बढ़ गयी। कहा जाता है कि जैसे-जैसे लालू यादव शक्तिशाली होते गये वैसे-वैसे मुख्यमंत्री के रूप में निरंकुश होते गए। सारे फैसले वे खुद लेने लगे। शासन में मंत्रियों की कोई पूछ नहीं रही। अफसर भी मंत्रियों की उपेक्षा कर सीधे लालू यादव से आदेश और निर्देश लेने लगे। यह स्थिति देख कर वशिष्ठ बाबू बहुत निराश हो गए। वे जेपी के सच्चे सिपाही थे। जेपी के नेतृत्व में उन्होंने इंदिरा गांधी की निरंकुशता के खिलाफ ही लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने लालू यादव को इस बात के लिए टोका कि आप मंत्रियों की उपेक्षा क्यों कर रहे हैं। यह जेपी के आदर्श के खिलाफ है, लेकिन यादव ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया।

लालू यादव की कार्यशैली से नाखुश वशिष्ठ बाबू ने मंत्री पद छोड़ा

जून 1994 में नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडीस ने लालू यादव से नाराज हो कर लोकसभा में जनता दल का अलग गुट बना लिया था। नीतियों की लड़ाई में वशिष्ठ बाबू नीतीश कुमार के साथ थे। उन्होंने लोकसभा में नीतीश गुट का अपना नैतिक समर्थन दिया। जुलाई 1994 में वशिष्ठ बाबू ने लालू मंत्रिपरिषद से अलग होने का फैसला कर लिया। जब वे अपना इस्तीफा लेकर मुख्यमंत्री लालू यादव के पास पहुंचे तो लालू यादव ने उन्हें बहुत मनाया कि वे इस्तीफा देने का फैसला बदल लें। लालू यादव ने कहा कि मैं आपका इस्तीफा मंजूर नहीं कर सकता। लेकिन वशिष्ठ बाबू इस्तीफा देने पर अड़े रहे।

भावुक लालू यादव ने कहा- आप मंत्री पद भले छोड़ दीजिए, लेकिन पार्टी कभी मत छोड़िएगा

कहा जाता है कि जब वशिष्ठ बाबू नहीं माने तो लालू यादव बहुत भावुक हो गये। पुराने रिश्ते का जुड़ाव ही कुछ ऐसा था। तब लालू यादव ने वशिष्ठ बाबू से एक भावनात्मक अपील की, आप मंत्री पद भले छोड़ दीजिए, लेकिन पार्टी कभी मत छोड़िएगा। आप मेरे साथ रहिए। वशिष्ठ बाबू ने कुछ कहा नहीं और मुख्यमंत्री को इस्तीफा सौंप कर वापस लौट गये। लालू यादव जान रहे थे कि वशिष्ठ बाबू, नीतीश कुमार के समर्थन में हैं। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपने प्रिय मित्र (वशिष्ठ) को कुछ नहीं कहा। अक्टूबर 1994 में जब नीतीश कुमार ने औपचारिक रूप से समता पार्टी का गठन किया तो वशिष्ठ बाबू समता पार्टी में आ गये। लेकिन इसके बाद भी लालू यादव का संबंध वशिष्ठ बाबू से खराब नहीं हुआ।

समता पार्टी में आने के बाद भी की लालू तारीफ, कहते थे कि लालू जी मास लीडर हैं

वशिष्ठ बाबू सहज, सरल, मिलनसार और उसूलों पर चलने वाले नेता रूप में प्रतिष्ठित हैं। वे भले समता पार्टी में आ गये थे, लेकिन जब लालू यादव का जिक्र होता तो वे उनकी खूबियां ही गिनाते। वे बिना किसी हिचक के कहते, लालू जी मास लीडर हैं। उन्होंने गरीबों और वंचितों को आवाज दी। उनकी खासियत थी कि वे आम आदमी की भाषा में बात करते थे और गांव के लोग उन्हें (लालू यादव) अपने बीच का नेता मानते थे। इस उदारता के कारण लालू यादव, वशिष्ठ बाबू का बहुत सम्मान करते थे। जब वे नीतीश कुमार के साथ आये तो नीतीश कुमार ने भी उन्हें बहुत सम्मान से रखा।

नीतीश ने भी सम्मान दिया, 11 साल प्रदेश अध्यक्ष, 18 साल सांसद

नीतीश कुमार ने उन्हें 2010 में जदयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। इस पद पर वे 11 साल तक रहे। नीतीश कुमार ने 2002 में उन्हें समता पार्टी के टिकट पर राज्यसभा सांसद बनाया। फिर जदयू के टिकट पर वे 2012 और 2018 में राज्यसभा सांसद बने। 1998 में समता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने बिक्रमगंज से लोकसभा का चुनाव भी जीता था। 2024 तक वे राज्यसभा सांसद थे। लेकिन अब खराब सेहत के कारण सक्रिय राजनीति से दूर हैं।
बिहार के खगड़िया जिले के एसपी भानु प्रताप सिंह और उनकी पत्नी पूजा सिंह का विवाद परिवार से निकलकर अब सड़कों पर पहुंच चुका है। पूजा सिंह ने एक तरह से पति को अल्टीमटम दे दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अब उनके सामने संघर्ष के अलावा कुछ रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि डीजीपी ने कहा कि 18 अक्टूबर को भानु प्रताप सिंह छुट्टी से लौटते हैं, तो आपके सामने उनसे बातचीत की जाएगी। लेकिन अभी तक डीजीपी की ओर से कोई फोन नहीं आया है। पूजा सिंह ने एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ मीडिया से बातचीत में बड़ी बातों का खुलासा किया है।

आईपीएस की पत्नी पूजा सिंह का बयान

पटना में मीडिया से बातचीत में पूजा सिंह के धर्म भाई ने कहा कि पूजा सिंह ने अंतरजातीय विवाह किया है। ये शादी उस वक्त किया, जब भानु प्रताप सिंह एक बेरोजगार होते थे। शादी के चार साल बाद भानु प्रताप सिंह आईपीएस बने। पूजा सिंह और भानु प्रताप सिंह का एक संघर्ष का जीवन रहा है। भानु प्रताप सिंह के आर्थिक अभाव में भी पूजा जॉब करते हुए अपना आंशिक ही सही, लेकिन पति को आगे बढ़ाने में इसका बड़ा योगदान रहा। अब पूजा का 11 साल वैवाहिक जीवन का हो गया है। 6 साल की बच्ची है। ऐसी कौन सी बात हो गई कि पिछले एक साल से वैवाहिक कलह का कारण है।

आईपीएस भानु प्रताप सिंह से सवाल?

उन्होंने कहा कि जो कारण एसपी भानु प्रताप सिंह बताते हैं। उस कारण को लेकर चला जाए। मुझे लगता है कि देश के हर पुरुष और हर महिला एक दूसरे को तलाक देते हैं। क्या ये किसी पत्नी का हक नहीं है कि आप अपने काम के समय में से आधा घंटा पत्नी को भी दें। क्या किसी पत्नी को अधिकार नहीं है कि उसके पास मंगलसूत्र नहीं है। एक मंगलसूत्र की मांग अपने एसपी पति से कर सके। क्योंकि इस कलह में एक मंगलसूत्र की मांग भी एक कारण है। कोई भी पत्नी आधा घंटा का समय मांग रही है। घुमाने की बात कर रहा है।

क्यों अलग रहना चाहते हैं आईपीएस?

पूजा सिंह की ओर से सवाल किया गया है कि क्या इसको मुद्दा बनाके आप अलग रहने की बात कर सकते हैं? जब भानु प्रताप सिंह ने पूजा सिंह से अलग रहने की बात कही किसी भी परिवार में कलह और उतेजना आएगी। अब तो तलाक की भी बात आ गई है। नोटिस का पेपर पूजा के पास नहीं आया है। लेकिन मैसेज के जरिए किसी ने चार पेज भेजा है। पूजा के परिजन ने कहा कि इन सारी बातों को देखते हुए बिहार के माननीय राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी को हमने पत्र लिखा है, पूजा के माध्यम से। उनसे आग्रह किया है, बिहार के मुखिया हैं। पूजा देश की बेटी है।

पूजा सिंह बिहार की बेटी है- परिजन

पूजा सिंह की ओर से कहा गया कि बिहार की भी बेटी है। यदि ये लोग भानु प्रताप सिंह को एक अभिभावक बनकर समझाते हैं। हमें लगता है ये पारिवारिक कलह खत्म हो सकता है। पूजा को एनजाइटी की समस्या है। भानु प्रताप भी समस्या से परेशान हैं। ये आईजीएमएस में भर्ती थी। एक महीना मेरे साथ रही। क्या ये घर घर घूमती रहेगी। इसकी एक ही मांग है। हमारा पति और हमारी बेटी चाहिए। हम लोगों को तलाक में दस करोड़ और चालीस करोड़ मांगने की सलाह दी जा रही है।

कौन हैं IPS भानु प्रताप सिंह?

अपनी बेटी मांग रही आईपीएस की पत्नी

पूजा को अपना पति भानु प्रताप सिंह और बेटी चाहिए। प्रेम विवाह की वजह से पूजा का परिवार इनके साथ नहीं है। उसके बाद से मैं इनके साथ हूं। पूजा सिंह ने कहा कि मुझे मेरे पति और बेटी से मिला दिया जाए। मेरे बच्ची से मुझे मिला दिया जाए। 18 तारीख को डीजीपी महोदया ने बुलाने की बात कही थी। लेकिन आज 22 अक्टूबर हो गया, मुझे नहीं बुलाया गया। डीजीपी ने कहा था कि भानु को समझाने की बात की जाएगी। लेकिन अभी तक उन्होंने मुझे कोई खबर नहीं किया है। मुझे बात किए बीस दिन हो गये हैं। बच्ची से भी बात नहीं कराई जाती है।

आईपीएस ने कहा- कोर्ट में मिलेंगे

पूजा सिंह ने कहा कि हमको भानु प्रताप सिंह ने कहा कि हम लोग कोर्ट में मिलेंगे। कारण पूछने पर फोन काट देते हैं। मैं अकेले रहना चाहता हूं। मैं अकेले रहना चाहता हूं। मुझे उनका किसी के साथ अफेयर की बात पर विश्वास नहीं है। मुझसे कहते हैं कि टाइम नहीं है। बच्ची भी पूछती है कि मेरे पापा मुझे टाइम नहीं देते हैं। मैं छोटी बच्ची को क्या जवाब दूं। उनके परिवार के लोग मिलते नहीं हैं। कोई बात नहीं करते हैं। पूजा सिंह ने अब संघर्ष का रास्ता अख्तियार करने की बात कही है। उन्होंने इस ओर इशारा किया है कि वे भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन करेंगी। <nis:link nis:type=tag nis:id=bihar nis:value=Bihar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=ips nis:value=IPS nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=marriage nis:value=Marriage nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=family nis:value=Family nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=news nis:value=News nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=controversy nis:value=Controversy nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=justice nis:value=Justice nis:enabled=true nis:link/>