
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसकी मिसाल कोतमा विकासखंड के ग्राम तरसिली की श्रीमती सीता साहू हैं, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने का सपना भी साकार किया।
सीता साहू वर्ष 2015 में शालिनी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और समूह की अध्यक्ष चुनी गईं। उन्होंने आजीविका मिशन के सामुदायिक निवेश कोष से 40 हजार रुपये का ऋण लेकर गांव में मनिहारी दुकान शुरू की। व्यवसाय बढ़ने पर बैंक क्रेडिट लिंकेज से 35 हजार, 30 हजार और 50 हजार रुपये के अतिरिक्त ऋण लेकर कपड़ों का व्यवसाय भी शुरू किया। इस प्रकार कुल 1 लाख 55 हजार रुपये के ऋण से उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और सभी ऋण ब्याज सहित समय पर चुकाए।
आज सीता साहू अपने पति श्री कौशल प्रसाद साहू के साथ तरसिली बाजार में दुकान का संचालन कर रही हैं। उनकी मासिक पारिवारिक आय 14,500 रुपये से अधिक है। उनकी बड़ी बेटी शिवानी शहडोल में बीएससी नर्सिंग के तृतीय वर्ष में अध्ययनरत हैं, जबकि उनका बेटा 12वीं की पढ़ाई पूरी कर चुका है। परिवार को पात्रता के अनुसार लाड़ली बहना योजना और राशन पात्रता पर्ची का लाभ भी मिल रहा है।
सीता साहू बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे बैंकिंग, वित्तीय लेन-देन और व्यवसाय का संचालन सहजता से करती हैं। संकल्प संकुल संगठन, बिजुरी तथा शौर्य आजीविका ग्राम संगठन के सहयोग से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला।
सीता साहू दीदी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनका मानना है कि स्वयं सहायता समूह से मिला संबल उनके परिवार की आर्थिक उन्नति और बेटी की उच्च शिक्षा का आधार बना है।
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