
जहरीली शराब कांड के बाद देवास आबकारी विभाग में बड़ा फेरबदल, 24 कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र बदले
2 सहायक जिला आबकारी अधिकारी, 9 उपनिरीक्षक और 13 मुख्य आरक्षक-आरक्षकों को नई जिम्मेदारी
कलेक्टर नेहा मीना के अनुमोदन के बाद आदेश जारी, 30 नवंबर तक अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान भी जारी
देवास। जहरीली शराब कांड के बाद देवास जिले में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में आबकारी अमले में बड़ा फेरबदल करते हुए 2 सहायक जिला आबकारी अधिकारियों, 9 आबकारी उपनिरीक्षकों और 13 मुख्य आरक्षक एवं आरक्षकों के कार्यक्षेत्र बदल दिए गए हैं।
कलेक्टर नेहा मीना के अनुमोदन के बाद सहायक आबकारी आयुक्त राकेश कुमार कुर्मी ने नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस बदलाव के तहत अधिकारियों के मंडल प्रभार से लेकर मैदानी अमले के वृत्त तक नए सिरे से जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
दो सहायक जिला आबकारी अधिकारियों के प्रभार बदले
सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप कनासे को अब देवास (अ), देवास (ब), सोनकच्छ और बागली (अ) सहित सोनकच्छ मद्यभांडागार का प्रभार सौंपा गया है। वहीं महेश चन्द्र पटेल को कन्नौद, खातेगांव, टोंकखुर्द, देवास (स) और बागली (ब) की जिम्मेदारी दी गई है।
9 आबकारी उपनिरीक्षकों को नई जिम्मेदारी
वृत्त स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। प्रेम नारायण यादव को देवास (अ) एवं बागली (ब), रोहित मुकाती को सोनकच्छ, गोकुल प्रसाद मेघवाल को देवास मद्यभांडागार, योगेन्द्रसिंह ठाकुर को देवास (ब), अरविंद सिंह सोलंकी को देवास (स), कैलाशसिंह जामोद को टोंकखुर्द और पूजा गेहलोत को कन्नौद वृत्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद दीपक धुरिया को बागली (अ) तथा राजाराम रैकवार को खातेगांव एवं कन्नौद मद्यभांडागार का प्रभार दिया जाएगा।
मैदानी अमले की भी नई तैनाती
गश्त, निगरानी और कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए 13 मुख्य आरक्षकों एवं आरक्षकों के कार्यक्षेत्र भी बदले गए हैं। इन्हें देवास के तीनों वृत्तों के अलावा सोनकच्छ, टोंकखुर्द, बागली, कन्नौद और खातेगांव में तैनात किया गया है।
गौरतलब है कि जहरीली शराब कांड के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे थे। अब नए कलेक्टर के निर्देश पर विभाग में जिम्मेदारियों का पुनर्गठन किया गया है। जिले में 30 नवंबर तक अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।
अब देखना होगा कि इस फेरबदल के बाद आबकारी विभाग की मैदानी सक्रियता कितनी बढ़ती है और अवैध शराब के कारोबार पर वास्तव में कितना अंकुश लग पाता है।