
450 किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण, डीएम ने कहा- मिट्टी और जल संरक्षण के लिए जरूरी
बेगूसराय (बी के गुलशन)। अर्थ गंगा के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तत्वावधान में किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से गुरुवार को प्रेक्षागृह-सह-आर्ट गैलरी, कंकौल में प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला आयोजित की गई। जिला कृषि पदाधिकारी के नेतृत्व में आयोजित कार्यशाला में जिले के विभिन्न प्रखंडों से करीब 450 किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी श्री रिची पाण्डेय एवं उप विकास आयुक्त श्री आकाश चौधरी ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान डीएम ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बेगूसराय में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं। इसे और व्यापक एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को आवश्यक सहयोग एवं प्रोत्साहन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।
उप विकास आयुक्त श्री आकाश चौधरी ने प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से संवाद कर उनके अनुभव एवं व्यवहारिक चुनौतियों की जानकारी ली। उन्होंने किसानों से अपने अनुभव दूसरे किसानों तक पहुंचाने तथा अधिक से अधिक किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ने की अपील की।
कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र, खोदावंदपुर के प्रधान वैज्ञानिक-सह-प्रधान ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों पर तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, जैविक संसाधनों के उपयोग, मृदा स्वास्थ्य, जैविक कार्बन सहित प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों के बारे में किसानों को विस्तार से बताया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्राकृतिक खेती अपनाने की प्रक्रिया पर भी जानकारी दी गई।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, विकसित भारत, VB-G RAM G-सह-नोडल पदाधिकारी, नमामि गंगे श्री बिट्टू कुमार सिंह ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कृषि और गंगा संरक्षण के बीच संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देने से किसानों के साथ-साथ जल स्रोतों और गंगा की निर्मलता को भी लाभ मिलेगा।
वहीं जिला परियोजना प्रबंधक, जीविका श्री अविनाश कुमार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में जीविका की भूमिका की जानकारी दी।
कार्यशाला में प्रगतिशील किसानों रामकुमार सिंह, शैलेंद्र कुमार चौधरी, जयशंकर सिंह एवं अशोक सिंह ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने खेती में अपनाई गई तकनीकों, परिणामों और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी अन्य किसानों को दी।
इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी, जिला उद्यान पदाधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, सभी अनुमंडल कृषि पदाधिकारी एवं प्रखंड कृषि पदाधिकारी, जिला परियोजना प्रबंधक जीविका सहित कृषि विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे। बीटीएम, एटीएम, कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, कृषि सखी, बीआरसी संचालक एवं विभिन्न प्रखंडों से आए किसान भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यशाला के दौरान प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, जैविक कार्बन, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं गंगा संरक्षण जैसे विषयों पर किसानों के साथ संवाद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि खेती को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय मिट्टी, जल, पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती एवं संबंधित गतिविधियों में उत्कृष्ट सहभागिता करने वाले किसानों एवं प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। मंच संचालन श्रीमती खुशबू कुमारी, बीटीएम एवं श्री कुन्दन कुमार, एटीएम ने किया।
अंत में किसानों से वैज्ञानिक मार्गदर्शन के साथ प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने तथा मृदा एवं जल संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित जल, समृद्ध किसान और निर्मल गंगा के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।
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