
शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को स्थायी आजीविका से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसी क्रम में पुष्पराजगढ़ विकासखंड के ग्राम गिरारीखुर्द निवासी मंगल सिंह की सफलता इसी उद्देश्य की सार्थक परिणति को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-2.0 अंतर्गत वाटरशेड विकास परियोजना के माध्यम से मंगल सिंह को व्यक्तिगत आजीविका गतिविधि के लिए 44 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। प्राप्त राशि का सदुपयोग करते हुए उन्होंने गांव में किराना दुकान प्रारंभ की।
आजीविका गतिविधि प्रारंभ होने से पूर्व मंगल सिंह मजदूरी पर निर्भर थे तथा उनके पास नियमित मासिक आय का कोई स्थायी साधन उपलब्ध नहीं था। शासकीय सहायता प्राप्त होने के बाद उन्होंने किराना व्यवसाय के लिए आवश्यक सामग्री क्रय की और अपनी दुकान का संचालन प्रारंभ किया। इससे उन्हें स्वरोजगार का अवसर प्राप्त होने के साथ ही नियमित आय का साधन भी उपलब्ध हुआ।
मंगल सिंह के अनुसार, दुकान से वर्तमान में उन्हें लगभग 4,500-5500 रुपये प्रतिमाह की आय प्राप्त हो रही है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक सुधार आया है। दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सुविधा हुई है तथा उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी प्राप्त हुआ है। इस आजीविका गतिविधि का लाभ केवल हितग्राही परिवार तक सीमित नहीं है। गांव में किराना दुकान संचालित होने से स्थानीय ग्रामीणों को दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री सहजता से उपलब्ध हो रही है। इस प्रकार योजना के माध्यम से एक ओर जहां मंगल सिंह को स्वरोजगार प्राप्त हुआ, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता भी सुदृढ़ हुई है।
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