
पांवटा कॉलेज में तनाव एवं मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष व्याख्यान आयोजित
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पांवटा साहिब : आज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी राजकीय महाविद्यालय, पांवटा साहिब में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण को ध्यान में रखते हुए “तनाव एवं मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर एक विशेष जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को तनाव के कारणों, उसके वैज्ञानिक आधार, मानसिक एवं शारीरिक प्रभावों तथा तनाव से प्रभावी ढंग से निपटने के व्यावहारिक उपायों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में सिविल अस्पताल, पांवटा साहिब के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आशीष मुख्य वक्ता एवं संसाधन व्यक्ति के रूप में उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जगदीश चौहान ने बैज पिनिंग के माध्यम से मुख्य वक्ता का औपचारिक स्वागत किया।
अपने व्याख्यान में डॉ. आशीष ने तनाव के वैज्ञानिक आधार, उसके मानसिक एवं शारीरिक प्रभावों तथा तनाव प्रबंधन के विभिन्न व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तनाव केवल मानसिक स्थिति नहीं, बल्कि मस्तिष्क एवं शरीर में होने वाली विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं से भी जुड़ा है। उन्होंने विद्यार्थियों को तनाव के शुरुआती संकेतों को पहचानने और समय रहते उचित उपाय अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने विद्यार्थियों को गैजेट्स, मोबाइल फोन एवं सोशल मीडिया के अनावश्यक उपयोग को कम करने तथा डिजिटल डिस्ट्रैक्शन्स से बचने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि अत्यधिक डिजिटल उपयोग एकाग्रता, ध्यान एवं जानकारी को लंबे समय तक याद रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ने, आपसी संवाद तथा रचनात्मक गतिविधियों के लिए समय निकालने को प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने जर्नलिंग अथवा डायरी लेखन को आत्म-अवलोकन एवं भावनात्मक संतुलन का सरल माध्यम बताया।
डॉ. आशीष ने समाज में बढ़ते नशे के दुष्प्रभावों पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए अपने पेशेवर अनुभवों से जुड़े वास्तविक जीवन के उदाहरण साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों से दूर रहने तथा अपने साथियों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। तनाव प्रबंधन के लिए उन्होंने योग, खेलकूद, व्यायाम एवं मनोरंजक गतिविधियों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर बल दिया। प्रश्नोत्तर सत्र में उन्होंने बाध्यकारी व्यवहार, काम टालने की प्रवृत्ति, अवसाद एवं चिंता से संबंधित विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. विम्मी रानी ने मानसिक स्वास्थ्य को जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए विद्यार्थियों के साथ तनाव कम करने के कुछ सरल एवं व्यावहारिक उपाय साझा किए। उन्होंने कहा कि तनाव प्रबंधन के लिए हमेशा बड़े बदलावों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें भी मन और व्यवहार पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सुझाव दिया कि सुबह उठते ही मुस्कुराकर दिन की शुरुआत करें, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। उन्होंने कहा कि सकारात्मक भाव के साथ दिन की शुरुआत करने से मनोस्थिति पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित योग एवं शारीरिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि योग शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और तनाव को नियंत्रित करने में सहायक है।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. जगदीश चौहान ने डॉ. आशीष द्वारा साझा किए गए विचारों एवं सुझावों को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से गैजेट्स के अत्यधिक उपयोग को नियंत्रित करने, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन्स से बचने, योग एवं खेलकूद को दिनचर्या का हिस्सा बनाने तथा तनावपूर्ण परिस्थितियों में सकारात्मक एवं संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की और विद्यार्थियों से इससे दूर रहने तथा समाज में इसके विरुद्ध जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को स्वस्थ, संतुलित, संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना है।
कार्यक्रम के अंत में लेफ्टिनेंट डॉ. पूजा भाटी, सहायक आचार्य, रसायन विज्ञान विभाग ने मुख्य वक्ता डॉ. आशीष, प्राचार्य डॉ. जगदीश चौहान, कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. विम्मी रानी, समस्त शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम द्वारा डॉ. उत्तमा पांडेय, प्रो. स्वामी नाथ, डॉ. किरण बाला, प्रो. चिनू, प्रो. तनु तथा अन्य प्राध्यापकों सहित कुल 166 विद्यार्थी लाभान्वित हुए।
Ronhat, Sirmaur | Aug 21, 2026