मलबे में दबे मजदूरों की तलाश , शिलाई के तिलोरधार (बांगनधार) में खनन कार्य के दौरान पहाड़ टूटने से दबे हैं तीन मजदूर
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जब पूरे जिले में खनन कार्य पर रोक है तो कैसे हो रहा था खनन, खनन अधिकारियों पर कब होगी कार्यवाही ?
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पांवटा साहिब : शिलाई क्षेत्र के कफोटा के समीप तिलोरधार (बांगनधार) में मंगलवार दोपहर बाद भारी वर्षा के बीच खनन कार्य
के दौरान पहाड़ का बड़ा हिस्सा
खिसक गया। इससे भूस्खलन की
चपेट में आने से तीन लोग दब गए।
इनमें स्थानीय चालक अनिल कुमार
निवासी बड़वास और नेपाली मजदूर
गजेंद्र सिंह व धन सिंह शामिल हैं।
हादसे में दो गाड़ियां व एक
एलएनटी क्षतिग्रस्त हुई है।
प्रशासन व रेस्क्यू टीमें तलाश में
जुटीं है। एसडीएम मौके पर पहुंचे
प्रशासन और रेस्क्यू टीमें रही थी। आशंका है कि गाड़ी के चालकसमेत तीन लोग इसी मलबे के नीचे दब गए हैं। हादसे के बाद मौके पर बड़े-बड़े पत्थर और भारी मलबा
जमा हो गया है। रेस्क्यू टीमों को
चट्टानों और मलबे को हटाने में
काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
पूर्व विधायक बलदेव सिंह तोमर ने बरसात में खनन गतिविधियां चलने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। किसकी अनुमति पर खनन हो रहा है और क्यों मजदूरों की सुरक्षा को ध्यान में नहीं रखा गया। इस हादसे के लिए जो जिम्मेदार हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
समाजसेवी नाथूराम चौहान ने
नाहन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि
अवैध खनन रोकने के लिए जिम्मेदार
विभाग कार्रवाई करने में नाकाम साबित
हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि दि
प्रशासन और संबंधित विभागों ने अवैध
खनन पर रोक नहीं लगाई तो इस मामले
को एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष
उठाया जाएगा।