Public App Logo
Jansamasya
हादसा
News
पुलिस
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
कांग्रेस
Accident
Congress
Modi
Delhi
Viral
Crime
Up
अमित_शाह
Bollywood
दिल्ली
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Mp
Nsui
उत्तरप्रदेश
Pmmodi
Rahulgandhi
यूपी
Uttarpradesh

वेदांता ने एक दशक में सरकारी खजाने में करीब रु5 लाख करोड़ का योगदान दिया वित्तीय वर्ष 26 में देश के खजाने में रु 62,722 करोड़ का योगदान दिया, जो अब तक का दूसरा सबसे ज़्यादा योगदान है, जो कुल टर्नओवर का 36 फीसदी है वेदांता ग्रुप देश के खजाने में योगदान देने वाले भारत के टॉप 3 प्राइवेट सेक्टरों में से एक है विविध प्राकृतिक संसाधनों में देश की अग्रणी कंपनी वेदांता लिमिटेड (बीएसईः 500295 और एनएसईः वीईडीएल) ने कंपनी की 11वीं टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 26 में सरकारी खजाने में रु 62,722 करोड़ का योगदान दिया है। यह रिपोर्ट देश के निर्माण और पारदर्शी प्रशासन गवर्नेंस के लिए वेदांता की प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाती है। यह योगदान कंपनी के संचालन से होने वाले कुल राजस्व का 36 फीसदी है, जो भारत के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाता है। यह पिछले साल की तुलना में योगदान में 13.3 फीसदी की बढ़ोतरी है, जिसके साथ पिछले दस सालों में सरकारी खजाने में वेदांता का कुल योगदान रु4,83,034 करोड़ हो गया है। कंपनी ने वित्तीय अनुशासन, राष्ट्र-निर्माण और विकसित भारत मिशन को समर्थन देने पर विशेष रूप से ध्यान दिया है। यह ग्रुप सरकारी खजाने में योगदान देने वाले भारत के टॉप 3 प्राइवेट सेक्टरों के सदनों में शामिल है। सरकारी खजाने में यह योगदान वित्तीय वर्ष 26 में वेदांता के सबसे अच्छे फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की वजह से हुआ। इस अवधि में कंपनी का राजस्व 15 फीसदी बढ़कर रु 1,74,075 करोड़ हो गया - जो कंपनी के इतिहास में सबसे ज़्यादा है - जबकि म्ठप्ज्क्। 29 फीसदी बढ़कर रु55,976 करोड़ पर पहुंच गया। इसी तरह कर के बाद मुनाफ़ा (पीएटी) 22 फीसदी बढ़कर रु25,096 करोड़ हो गया। कंपनी की बैलेंस शीट भी काफी मज़बूत हुई, शुद्ध ऋण म्ठप्ज्क्। के मुकाबले 1.22 गुना से बेहतर होकर 0.95गुना हो गया - जो 14 तिमाहियों में इसका सबसे अच्छा स्तर है। वेदांता के अलग-अलग तरह के बिज़नेस पोर्टफोलियो - जिसमें जिंक-लेड-सिल्वर, एल्युमीनियम, कॉपर, आयरन ओर, स्टील, पावर, निकेल, क्रोम और ऑयल एंड गैस शामिल हैं - में मज़बूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस की वजह से कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस भी बहुत अच्छा रहा। ज़िंक ने रु 19,053 करोड़ के साथ सबसे अधिक योगदान दिया, इसके बाद एल्युमीनियम (जिसे अब वेदांता एल्युमीनियम के तौर पर लिस्ट किया गया है) का योगदान रु 15,788 करोड़ और ऑयल एंड गैस (जिसे अब वेदांता ऑयल एंड गैस के तौर पर लिस्ट किया गया है) का योगदान रु 11,697 करोड रहा - यह महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा के क्षेत्र में वेदांता के पोर्टफोलियो के विस्तार और विविधता को दर्शाता है। वेदांता लिमिटेड की टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस रिपोर्ट का 11वां संस्करण वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वेदांता के टैक्स योगदान का विस्तृत ब्यौरा देता हैः सरकारी रॉयल्टी और प्रॉफ़िट पेट्रोलियम (रु14,840 करोड़): इसमें राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, कर्नाटक और असम की राज्य सरकारों को बॉक्साइट, लेड-ज़िंक, सिल्वर, आयरन ओर, क्रूड ऑयल और नैचुरल गैस के लिए दी गई रॉयल्टी, साथ ही प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट के तहत भारत सरकार को दिया गया प्रॉफ़िट पेट्रोलियम शामिल है। इनकम और कैपिटल पर टैक्स (रु8,290 करोड़): इसमें सभी अधिकार क्षेत्रों में कानूनी रिटर्न में फ़ाइल किए गए कॉर्पोरेट इनकम टैक्स शामिल हैं। अन्य टैक्स (रु 11,897 करोड़): इसमें एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर रु5,980 करोड़ की ड्यूटी, रु2,503 करोड़ का ऑयल सेस/एनसीसीडी, रु 1,252 करोड़ की इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी और रु 1,663 करोड़ का इनएलिजिबल जीएसटी शामिल है। इनडायरेक्ट टैक्स (रु21,777 करोड़): इसमें सभी बिज़नेस युनिट्स में माल और सर्विस की बिक्री से सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी शामिल हैं। विदहोल्डिंग टैक्स (रु3,188 करोड़): इसमें पेरोल टैक्स और वेंडर और कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट पर सोर्स पर काटे गए टैक्स शामिल हैं। भारत सरकार को कॉर्पोरेट डिविडेंड (रु1,180 करोड़): हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में भारत सरकार की 27.92फीसदी हिस्सेदारी के ज़रिए पेमेंट किया गया। कर में पारदर्शिता वेदांता के बड़े एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ईएसजी) एजेंडा का मुख्य हिस्सा है। लगातार 11 सालों से बरकरार अपने स्वैच्छिक एवं सक्रिय डिस्क्लोजर के ज़रिए कंपनी का उद्देश्य हितधारकों का भरोसा बढ़ाना और कॉर्पोरेट प्रशासन के सर्वोच्च मानक सुनिश्चित करना है। वेदांता के कर सिद्धानत बी-टीम रिस्पॉन्सिबल टैक्स प्रिंसिपल और एक्सट्रैक्टिव इंडस्ट्रीज ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव के साथ करीब से जुड़े हुए हैं, जो ज़िम्मेदार कॉर्पोरेट नागरिकता के लिए इसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाते है.

Badgaon, Udaipur | Jun 27, 2026

MORE NEWS

हिंदुस्तान जिंक के ‘शिक्षा संबल’ कार्यक्रम में 2018 से अब तक 47,000़ विद्यार्थी हुए लाभान्वित

 ग्रीष्मकालीन रेजिडेंशियल व नॉन-रेजिडेंशियल कैंप में 1,600 छात्रों को मिला लाभ

 कार्यक्रम के तहत 76 में से 37 स्कूलों में 100 प्रतिशत बोर्ड परीक्षा परिणाम, कक्षा 12वीं का रिजल्ट 99.43 प्रतिशत

 

उदयपुर, 27 जून 2026 । विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी और चांदी के शीर्ष 10 उत्पादकों में शामिल हिन्दुस्तान जिं़क सीएसआर के तहत् अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘शिक्षा संबल’ के माध्यम से राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के 76 स्कूलों में छात्रों की शिक्षा को बेहतर बना रही है। वर्ष 2018 से अब तक इस पहल के जरिए 47,000 से अधिक छात्रों को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी पर खास ध्यान देते हुए निरंतर शैक्षणिक सहायता प्रदान की गई है।

छात्रों को व्यावहारिक सीख और भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से कंपनी ने हाल ही में 9वां समर कैंप आयोजित किया, जिसमें 1,600 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। इस कैंप में छात्रों को स्टेम  विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित, डिजिटल तकनीक, नवाचार, कला, खेल और अन्य गतिविधियों का अनुभव मिला। इस दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय, आईआईएसईआर जैसे संस्थानों के वालंटियर, कंपनी के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने भी योगदान दिया।

गर्मी की छुट्टियों में पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षा संबल के तहत एक महीने के रेजिडेंशियल और नॉन-रेजिडेंशियल समर कैंप अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, सलूम्बर और उदयपुर जिलों में आयोजित किए गये।

राजसमंद के गांव गवार्डी के छात्र भावेश मेनारिया ने अपना अनुभव साझा करतेह हुए कहा कि, “कैंप से पहले मैंने विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित और डिजिटल टूल्स के बारे में सिर्फ पढ़ा था। यहां प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स करने से मुझे समझ आया कि टेक्नोलॉजी असली जिंदगी की समस्याओं का समाधान कैसे दे सकती है।”

यह पहल छात्रों को जरूरी कौशल, आत्मविश्वास और व्यापक सोच विकसित करने में मदद करती है। शिक्षा संबल के माध्यम से छात्रों को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित, शिक्षा, डिजिटल ज्ञान, नेतृत्व विकास और करियर मार्गदर्शन से जोड़ा जा रहा है।

भीलवाड़ा की छात्रा प्रीति राव ने कहा कि, “कैंप में भाग लेने से मेरी कम्युनिकेशन, समस्या समाधान और डिजिटल स्किल्स बेहतर हुई हैं। यहां नई चीजें सीखने से मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।”

पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा संबल ग्रामीण राजस्थान में शिक्षा सुधार का एक मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। इसका असर वर्ष 26 के रिजल्ट में साफ दिखा जिसमें कक्षा 10 में 92.53 प्रतिशत एवं कक्षा 12 में 99.43 प्रतिशत परिणाम रहा। जहां पिछले 10 वर्षों में राजस्थान का औसत परिणाम लगभग 67.66 प्रतिशत रहा, वहीं शिक्षा संबल से जुड़े 37 स्कूलों ने 100 प्रतिशत परिणाम हासिल किया है और कुल मिलाकर अब यह स्तर लगभग 96 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

चित्तौड़गढ़ की छात्रा हंशिका वर्मा ने कहा कि, “इस कार्यक्रम से मुझे उन विषयों में मदद मिली जिनमें मैं कमजोर थी। यहां मिली गाइडेंस और स्टडी मटेरियल से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा।”

उदयपुर के छात्र मोहित मीणा, जो अब आईआईएसईआर पुणे में पढ़ाई कर रहे हैं, ने कहा कि, “शिक्षा संबल ने मेरी पढ़ाई की नींव मजबूत की। इसी वजह से आज मैं एक अच्छे संस्थान में पढ़ पा रहा हूं।”

हिंदुस्तान जिंक, वेदांता समूह की कंपनी, अपने सामाजिक विकास कार्यों के जरिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर लगातार काम कर रही है। 4,100 से अधिक गांवों में अपनी पहुंच के साथ कंपनी 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और 2030 तक सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हिंदुस्तान जिंक के ‘शिक्षा संबल’ कार्यक्रम में 2018 से अब तक 47,000़ विद्यार्थी हुए लाभान्वित ग्रीष्मकालीन रेजिडेंशियल व नॉन-रेजिडेंशियल कैंप में 1,600 छात्रों को मिला लाभ कार्यक्रम के तहत 76 में से 37 स्कूलों में 100 प्रतिशत बोर्ड परीक्षा परिणाम, कक्षा 12वीं का रिजल्ट 99.43 प्रतिशत उदयपुर, 27 जून 2026 । विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी और चांदी के शीर्ष 10 उत्पादकों में शामिल हिन्दुस्तान जिं़क सीएसआर के तहत् अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘शिक्षा संबल’ के माध्यम से राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के 76 स्कूलों में छात्रों की शिक्षा को बेहतर बना रही है। वर्ष 2018 से अब तक इस पहल के जरिए 47,000 से अधिक छात्रों को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी पर खास ध्यान देते हुए निरंतर शैक्षणिक सहायता प्रदान की गई है। छात्रों को व्यावहारिक सीख और भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से कंपनी ने हाल ही में 9वां समर कैंप आयोजित किया, जिसमें 1,600 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। इस कैंप में छात्रों को स्टेम विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित, डिजिटल तकनीक, नवाचार, कला, खेल और अन्य गतिविधियों का अनुभव मिला। इस दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय, आईआईएसईआर जैसे संस्थानों के वालंटियर, कंपनी के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने भी योगदान दिया। गर्मी की छुट्टियों में पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षा संबल के तहत एक महीने के रेजिडेंशियल और नॉन-रेजिडेंशियल समर कैंप अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, सलूम्बर और उदयपुर जिलों में आयोजित किए गये। राजसमंद के गांव गवार्डी के छात्र भावेश मेनारिया ने अपना अनुभव साझा करतेह हुए कहा कि, “कैंप से पहले मैंने विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित और डिजिटल टूल्स के बारे में सिर्फ पढ़ा था। यहां प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स करने से मुझे समझ आया कि टेक्नोलॉजी असली जिंदगी की समस्याओं का समाधान कैसे दे सकती है।” यह पहल छात्रों को जरूरी कौशल, आत्मविश्वास और व्यापक सोच विकसित करने में मदद करती है। शिक्षा संबल के माध्यम से छात्रों को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित, शिक्षा, डिजिटल ज्ञान, नेतृत्व विकास और करियर मार्गदर्शन से जोड़ा जा रहा है। भीलवाड़ा की छात्रा प्रीति राव ने कहा कि, “कैंप में भाग लेने से मेरी कम्युनिकेशन, समस्या समाधान और डिजिटल स्किल्स बेहतर हुई हैं। यहां नई चीजें सीखने से मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।” पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा संबल ग्रामीण राजस्थान में शिक्षा सुधार का एक मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। इसका असर वर्ष 26 के रिजल्ट में साफ दिखा जिसमें कक्षा 10 में 92.53 प्रतिशत एवं कक्षा 12 में 99.43 प्रतिशत परिणाम रहा। जहां पिछले 10 वर्षों में राजस्थान का औसत परिणाम लगभग 67.66 प्रतिशत रहा, वहीं शिक्षा संबल से जुड़े 37 स्कूलों ने 100 प्रतिशत परिणाम हासिल किया है और कुल मिलाकर अब यह स्तर लगभग 96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। चित्तौड़गढ़ की छात्रा हंशिका वर्मा ने कहा कि, “इस कार्यक्रम से मुझे उन विषयों में मदद मिली जिनमें मैं कमजोर थी। यहां मिली गाइडेंस और स्टडी मटेरियल से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा।” उदयपुर के छात्र मोहित मीणा, जो अब आईआईएसईआर पुणे में पढ़ाई कर रहे हैं, ने कहा कि, “शिक्षा संबल ने मेरी पढ़ाई की नींव मजबूत की। इसी वजह से आज मैं एक अच्छे संस्थान में पढ़ पा रहा हूं।” हिंदुस्तान जिंक, वेदांता समूह की कंपनी, अपने सामाजिक विकास कार्यों के जरिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर लगातार काम कर रही है। 4,100 से अधिक गांवों में अपनी पहुंच के साथ कंपनी 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और 2030 तक सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Badgaon, Udaipur | Jun 28, 2026

जगदीश मंदिर में ज्येष्ठ  महास्नान 
 जगदीश मंदिर  में भगवान का महास्नान बड़ी धूमधाम और भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हो गया। मंदिर में 108 घड़ों से भगवान का अभिषेक किया गया। 501 लीटर पंचामृत से विशेष अभिषेक के साथ जल, केसर, चंदन, गुलाबजल तथा सुगंधित द्रव्यों से भगवान को स्नान कराया गया।

जगदीश मंदिर में ज्येष्ठ महास्नान जगदीश मंदिर में भगवान का महास्नान बड़ी धूमधाम और भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हो गया। मंदिर में 108 घड़ों से भगवान का अभिषेक किया गया। 501 लीटर पंचामृत से विशेष अभिषेक के साथ जल, केसर, चंदन, गुलाबजल तथा सुगंधित द्रव्यों से भगवान को स्नान कराया गया।

Badgaon, Udaipur | Jun 28, 2026

राजसमंद में पहली बार आयोजित 'रंगनायक–2026' का भव्य समापन, प्रतिभागियों ने नाट्य प्रस्तुतियों से जीता दर्शकों का दिल

टीम संस्था, उदयपुर द्वारा आयोजित एक माह की ग्रीष्मकालीन रंगमंच कार्यशाला 'रंगनायक–2026' का भव्य समापन राजसमंद के कांकरोली स्थित विश्व भारती सोसायटी हॉल में हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने शानदार नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने अभिनय कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने भरपूर सराहा।
कार्यशाला के निर्देशक सुनील टांक ने बताया कि पिछले कई वर्षों से 'रंगनायक' का आयोजन उदयपुर में होता आ रहा था, लेकिन इस वर्ष पहली बार इसे राजसमंद में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य उदयपुर के साथ-साथ आसपास के शहरों के बच्चों एवं युवाओं को भी रंगमंच प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करना था।
लगभग एक माह तक चली इस कार्यशाला में जूनियर वर्ग (7 से 17 वर्ष) के 76 तथा सीनियर वर्ग (18 वर्ष से अधिक) के 21 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रंगमंच की मूलभूत एवं उन्नत तकनीकों से व्यावहारिक रूप से अवगत कराया गया। कार्यशाला की शुरुआत विभिन्न थिएटर गेम्स एवं अभ्यासों से हुई, जिसके बाद अभिनय के सिद्धांत, मंच एवं कैमरा अभिनय, इम्प्रोवाइजेशन, बॉडी लैंग्वेज, वॉयस एंड स्पीच, एक्सप्रेशन, इमोशन बिल्डिंग, इमेजिनेशन तथा नवरस सहित अभिनय के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह में प्रतिभागियों ने दो नाटकों का मंचन किया। जूनियर वर्ग के बच्चों ने सामाजिक संदेश पर आधारित नाटक 'आओ बड़ों, तुम्हे सिखाए' का भावपूर्ण मंचन किया, जबकि सीनियर वर्ग के प्रतिभागियों ने मनोवैज्ञानिक विषय पर आधारित नाटक 'साया' प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। दोनों नाटकों का लेखन एवं निर्देशन सुनील टांक ने किया।
नाटकों की मंच सज्जा वरिष्ठ रंगकर्मी शैलेन्द्र शर्मा तथा वेशभूषा वरिष्ठ नाट्यकर्मी रामेश्वर गौर द्वारा तैयार की गई। कार्यशाला के सफल संचालन में पूजा लोढ़ा, पूजल मंडोत, हर्षिल कवड़िया एवं डॉ. सोनम जैन का विशेष सहयोग रहा।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि डीवाईएसपी शिप्रा राजावत ने कार्यशाला एवं नाट्य प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों और युवाओं के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति क्षमता को भी सशक्त बनाती हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे सृजनात्मक आयोजनों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
समारोह के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए सुनील टांक ने कहा कि टीम नाट्य संस्था भविष्य में भी राजसमंद सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में इस प्रकार की रंगमंचीय 
कार्यशालाओं का आयोजन करती रहेगी।

राजसमंद में पहली बार आयोजित 'रंगनायक–2026' का भव्य समापन, प्रतिभागियों ने नाट्य प्रस्तुतियों से जीता दर्शकों का दिल टीम संस्था, उदयपुर द्वारा आयोजित एक माह की ग्रीष्मकालीन रंगमंच कार्यशाला 'रंगनायक–2026' का भव्य समापन राजसमंद के कांकरोली स्थित विश्व भारती सोसायटी हॉल में हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने शानदार नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने अभिनय कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने भरपूर सराहा। कार्यशाला के निर्देशक सुनील टांक ने बताया कि पिछले कई वर्षों से 'रंगनायक' का आयोजन उदयपुर में होता आ रहा था, लेकिन इस वर्ष पहली बार इसे राजसमंद में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य उदयपुर के साथ-साथ आसपास के शहरों के बच्चों एवं युवाओं को भी रंगमंच प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करना था। लगभग एक माह तक चली इस कार्यशाला में जूनियर वर्ग (7 से 17 वर्ष) के 76 तथा सीनियर वर्ग (18 वर्ष से अधिक) के 21 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रंगमंच की मूलभूत एवं उन्नत तकनीकों से व्यावहारिक रूप से अवगत कराया गया। कार्यशाला की शुरुआत विभिन्न थिएटर गेम्स एवं अभ्यासों से हुई, जिसके बाद अभिनय के सिद्धांत, मंच एवं कैमरा अभिनय, इम्प्रोवाइजेशन, बॉडी लैंग्वेज, वॉयस एंड स्पीच, एक्सप्रेशन, इमोशन बिल्डिंग, इमेजिनेशन तथा नवरस सहित अभिनय के विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया गया। समापन समारोह में प्रतिभागियों ने दो नाटकों का मंचन किया। जूनियर वर्ग के बच्चों ने सामाजिक संदेश पर आधारित नाटक 'आओ बड़ों, तुम्हे सिखाए' का भावपूर्ण मंचन किया, जबकि सीनियर वर्ग के प्रतिभागियों ने मनोवैज्ञानिक विषय पर आधारित नाटक 'साया' प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। दोनों नाटकों का लेखन एवं निर्देशन सुनील टांक ने किया। नाटकों की मंच सज्जा वरिष्ठ रंगकर्मी शैलेन्द्र शर्मा तथा वेशभूषा वरिष्ठ नाट्यकर्मी रामेश्वर गौर द्वारा तैयार की गई। कार्यशाला के सफल संचालन में पूजा लोढ़ा, पूजल मंडोत, हर्षिल कवड़िया एवं डॉ. सोनम जैन का विशेष सहयोग रहा। समापन समारोह में मुख्य अतिथि डीवाईएसपी शिप्रा राजावत ने कार्यशाला एवं नाट्य प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों और युवाओं के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति क्षमता को भी सशक्त बनाती हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे सृजनात्मक आयोजनों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए सुनील टांक ने कहा कि टीम नाट्य संस्था भविष्य में भी राजसमंद सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में इस प्रकार की रंगमंचीय कार्यशालाओं का आयोजन करती रहेगी।

Badgaon, Udaipur | Jun 27, 2026

यौमे आशुराह पर उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, दरगाह गंजे शहीदा पर हुए धार्मिक आयोजन

उदयपुर। पैगम्बरे इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला की याद में यौमे आशुराह के अवसर पर अम्बावगढ़ पहाड़ी स्थित दरगाह गंजे शहीदा सरकार (अम्बावगढ़ वाले बाबा) पर शुक्रवार को कुरआन ख्वानी, दुआए आशूराह, रोजा इफ्तार और जूलुसे हुसैनी सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन इल्मी व बरेलवी सुन्नी मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी उदयपुर के तत्वावधान में किया गया।
सोसायटी के मोहसिन हैदर ने बताया कि यौमे आशुराह के मौके पर दरगाह परिसर में दिनभर धार्मिक गतिविधियां आयोजित की गईं। नमाज-ए-जुम्मा और नमाज-ए-असर के बाद मौलाना बाबुल हुसैन ने दुआए आशूराह पढ़ाई। इसके पश्चात शाम 4 बजे कुरआन ख्वानी का आयोजन हुआ, जिसमें शहर के अनेक आलिमों, इमामों और अकीदतमंदों ने शिरकत करते हुए कलाम-ए-पाक की तिलावत की। बाद में सामूहिक फातिहा ख्वानी भी की गई।
मगरिब की नमाज से पूर्व दरगाह पर मौजूद सैकड़ों रोजेदारों ने रोजा इफ्तार किया। वहीं शहर के सिलावटवाड़ी स्थित बीच की मस्जिद (मस्जिद हुज्जतुल इस्लाम) से हजरत मौलाना मुसन्ना जहांगीरी की सदारत में जूलुसे हुसैनी निकाला गया। जुलूस सिलावटवाड़ी और नई पुलिया मार्ग से होते हुए दरगाह पहुंचा। इस दौरान अकीदतमंदों ने हम्द, नात और मनकबत पेश कर हजरत इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत अर्पित किया।
दरगाह पहुंचने पर नातख्वानी, तकरीर, सलातो-सलाम और फातिहा ख्वानी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अब्दुल हुसैन खान, शेख जाकिर हुसैन, वहीद अहमद शेख, अनीस अब्बासी, मोहसिन हुसैन अजहरी, मेहमूद खान, नईम अहमद, इस्हाक मोहम्मद, इरफान मंसूरी, अनवर मंसूरी, अब्दुल कादिर छीपा, आबिद खान, हबीब नबी खान, समीर भाई, अमजद रजा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

यौमे आशुराह पर उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, दरगाह गंजे शहीदा पर हुए धार्मिक आयोजन उदयपुर। पैगम्बरे इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला की याद में यौमे आशुराह के अवसर पर अम्बावगढ़ पहाड़ी स्थित दरगाह गंजे शहीदा सरकार (अम्बावगढ़ वाले बाबा) पर शुक्रवार को कुरआन ख्वानी, दुआए आशूराह, रोजा इफ्तार और जूलुसे हुसैनी सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन इल्मी व बरेलवी सुन्नी मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी उदयपुर के तत्वावधान में किया गया। सोसायटी के मोहसिन हैदर ने बताया कि यौमे आशुराह के मौके पर दरगाह परिसर में दिनभर धार्मिक गतिविधियां आयोजित की गईं। नमाज-ए-जुम्मा और नमाज-ए-असर के बाद मौलाना बाबुल हुसैन ने दुआए आशूराह पढ़ाई। इसके पश्चात शाम 4 बजे कुरआन ख्वानी का आयोजन हुआ, जिसमें शहर के अनेक आलिमों, इमामों और अकीदतमंदों ने शिरकत करते हुए कलाम-ए-पाक की तिलावत की। बाद में सामूहिक फातिहा ख्वानी भी की गई। मगरिब की नमाज से पूर्व दरगाह पर मौजूद सैकड़ों रोजेदारों ने रोजा इफ्तार किया। वहीं शहर के सिलावटवाड़ी स्थित बीच की मस्जिद (मस्जिद हुज्जतुल इस्लाम) से हजरत मौलाना मुसन्ना जहांगीरी की सदारत में जूलुसे हुसैनी निकाला गया। जुलूस सिलावटवाड़ी और नई पुलिया मार्ग से होते हुए दरगाह पहुंचा। इस दौरान अकीदतमंदों ने हम्द, नात और मनकबत पेश कर हजरत इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत अर्पित किया। दरगाह पहुंचने पर नातख्वानी, तकरीर, सलातो-सलाम और फातिहा ख्वानी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अब्दुल हुसैन खान, शेख जाकिर हुसैन, वहीद अहमद शेख, अनीस अब्बासी, मोहसिन हुसैन अजहरी, मेहमूद खान, नईम अहमद, इस्हाक मोहम्मद, इरफान मंसूरी, अनवर मंसूरी, अब्दुल कादिर छीपा, आबिद खान, हबीब नबी खान, समीर भाई, अमजद रजा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

Badgaon, Udaipur | Jun 27, 2026

गुलाब बाग के सौंदर्यीकरण में निगम का अनूठा नवाचार, पुरानी मूर्तियां बनीं आकर्षण का केंद्र

उदयपुर। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना की पहल पर ऐतिहासिक गुलाब बाग उद्यान के सौंदर्यीकरण की दिशा में एक अभिनव कदम उठाया गया है। वर्षों से उपेक्षित और क्षतिग्रस्त पड़ी जानवरों की पुरानी मूर्तियों का पुनरुद्धार कर उन्हें नया स्वरूप दिया गया है। मरम्मत और आकर्षक रंग-रोगन के बाद ये मूर्तियां अब पर्यटकों और शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं।
नगर निगम द्वारा किए गए इस कार्य में अधिशाषी अभियंता अखिल गोयल एवं कनिष्ठ अभियंता मोनिका चौधरी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। निगम आयुक्त के निर्देशन में शेर, बाघ सहित विभिन्न वन्य जीवों की मूर्तियों की मरम्मत कर उन्हें प्राकृतिक रंगों से सजाया गया है। लंबे समय से टूट-फूट और फीके पड़ चुके रंगों के कारण ये मूर्तियां अपनी पहचान खो चुकी थीं, लेकिन अब इनके पुनर्संरक्षण से गुलाब बाग का पुराना वैभव लौटता नजर आ रहा है।
गुलाब बाग उद्यान ऐतिहासिक रूप से अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्य जीवों की आकर्षक प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। पुनर्जीवित की गई मूर्तियां उद्यान की सुंदरता में चार चांद लगा रही हैं। बच्चे, युवा और पर्यटक इन मूर्तियों के साथ फोटो खिंचवाकर यादगार पल संजो रहे हैं।
उद्यान में भ्रमण करने वाले वरिष्ठ नागरिकों ने नगर निगम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इन मूर्तियों को देखकर पुराने दौर का गुलाब बाग याद आ जाता है, जब यह उद्यान अपनी विशिष्ट पहचान और आकर्षण के लिए जाना जाता था।

#LakeCityNews #Udaipur #GulabBagh #NagarNigamUdaipur #AbhishekKhanna #HeritageConservation #Tourism #UdaipurNews #RajasthanNews #LakeCityNewsRajasthan

गुलाब बाग के सौंदर्यीकरण में निगम का अनूठा नवाचार, पुरानी मूर्तियां बनीं आकर्षण का केंद्र उदयपुर। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना की पहल पर ऐतिहासिक गुलाब बाग उद्यान के सौंदर्यीकरण की दिशा में एक अभिनव कदम उठाया गया है। वर्षों से उपेक्षित और क्षतिग्रस्त पड़ी जानवरों की पुरानी मूर्तियों का पुनरुद्धार कर उन्हें नया स्वरूप दिया गया है। मरम्मत और आकर्षक रंग-रोगन के बाद ये मूर्तियां अब पर्यटकों और शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। नगर निगम द्वारा किए गए इस कार्य में अधिशाषी अभियंता अखिल गोयल एवं कनिष्ठ अभियंता मोनिका चौधरी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। निगम आयुक्त के निर्देशन में शेर, बाघ सहित विभिन्न वन्य जीवों की मूर्तियों की मरम्मत कर उन्हें प्राकृतिक रंगों से सजाया गया है। लंबे समय से टूट-फूट और फीके पड़ चुके रंगों के कारण ये मूर्तियां अपनी पहचान खो चुकी थीं, लेकिन अब इनके पुनर्संरक्षण से गुलाब बाग का पुराना वैभव लौटता नजर आ रहा है। गुलाब बाग उद्यान ऐतिहासिक रूप से अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्य जीवों की आकर्षक प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। पुनर्जीवित की गई मूर्तियां उद्यान की सुंदरता में चार चांद लगा रही हैं। बच्चे, युवा और पर्यटक इन मूर्तियों के साथ फोटो खिंचवाकर यादगार पल संजो रहे हैं। उद्यान में भ्रमण करने वाले वरिष्ठ नागरिकों ने नगर निगम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इन मूर्तियों को देखकर पुराने दौर का गुलाब बाग याद आ जाता है, जब यह उद्यान अपनी विशिष्ट पहचान और आकर्षण के लिए जाना जाता था। #LakeCityNews #Udaipur #GulabBagh #NagarNigamUdaipur #AbhishekKhanna #HeritageConservation #Tourism #UdaipurNews #RajasthanNews #LakeCityNewsRajasthan

Badgaon, Udaipur | Jun 27, 2026