
आपदा में संवेदना, उत्सव में संस्कृतिः यही सच्चे जनप्रतिनिधि की पहचान हैं तेघरा विधायक रजनीश कुमार
संवाददाता मुकेश कुमार बरौनी प्रखंड बीहट
जनसेवा केवल मंचों से दिए जाने वाले भाषणों का नाम नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जनता के बीच धरातल पर खड़े रहने का संकल्प है। इस बात को चरितार्थ कर रहे हैं तेघरा के वर्तमान विधायक। जिस समर्पण और दूरदृष्टि के साथ उन्होंने अपने क्षेत्र में आयोजित 'श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला' को एक भव्य और राजकीय गरिमा प्रदान करने में अपना अमूल्य योगदान दिया है, वह वास्तव में अनुकरणीय है।
एक ओर जहाँ उन्होंने सांस्कृतिक आस्था और लोक परंपराओं के इस पावन उत्सव को भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका के समय उनका मानवीय पक्ष खुलकर सामने आया। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकें करना, स्वयं जलमग्न क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी हालात का जायजा लेना और पीडितों के बीच मौजूद रहकरराहत सामग्री पहुँचाना यह दर्शाता है कि उनके लिए जनता का सुख-दुख सर्वोपरि हैविधायक जी ने यह साबित कर दिखाया है कि जीवन में आपदा और उत्सव दोनों के संतुलन को कैसे साधा जाता है। उन्होंने जहाँ एक तरफ बाढ़ पीड़ितों के आँसू पोंछने का अपना नैतिक दायित्व बखूबी निभाया, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और जन-आस्था की लौ को भी धुंधला नहीं होने दिया।
जनता के लिए 24×7 उपलब्ध जनप्रतिनिधि
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि विधायक जी की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी और सुलभता है। यदि कोई भी आम नागरिक उन्हें किसी समस्या के लिए फोन करता है, तो उनका त्वरित प्रयास रहता है कि उस काम का समाधान जल्द से जल्द हो। वे अपने समय का एक बड़ा हिस्सा सीधे जनता के बीच बिताते हैं।
इस बार तेघरा विधानसभा की जनता यह साफ महसूस कर रही है कि क्षेत्र को एक बेहद ईमानदार, कर्मठ और वादे का पक्का प्रतिनिधि मिला है। जो समय उन्होंने क्षेत्र की विकासयोजनाओं और जनसेवा में दिया है, उसी का परिणाम है कि आज जनता का भी उन्हें भरपूर सहयोग और स्नेह मिल रहा है। #BreakingNews