
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर प्रदर्शनकारी छात्र साहिल की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली है। हालांकि मामला अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया है। छात्र का आरोप है कि पैलेट गन के छर्रे लगने से उसकी आंख की रोशनी चली गई।
राहुल गांधी केस दर्ज कराने के लिए शुक्रवार दोपहर करीब 12.30 बजे से संसद मार्ग में धरना दे रहे थे। उन्होंने कहा था कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती, वे हटेंगे नहीं। इसके बाद 5.30 बजे पुलिस ने FIR लिखना शुरू किया था।
राहुल ने साहिल को लगे छर्रे दिखाकर कहा था- 'पैलेट गन चलने के सबूत हैं। ये छर्रे साहिल के शरीर से निकले हैं। अगर पुलिस ने गन नहीं चलाई तो किसने चलाई है। पुलिस कह रही है कि उन्हें FIR नहीं करने के ऊपर से निर्देश हैं।'
राहुल के साथ प्रियंका गांधी, अधीर रंजन चौधरी, सलमान खुर्शीद और जयराम रमेश भी मौजूद थे। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्र साहिल घायल हो गए थे।
राहुल गांधी जिस पीड़ित साहिल को लेकर थाने पहुंचे है, उसने 14 अगस्त को एक शिकायत लिखी थी, उसमें 7 अहम पॉइंट लिखे हैं…
गंभीर चोट और आंख की रोशनी जाना: प्रदर्शन के दौरान 19 वर्षीय छात्र साहिल पर सुरक्षाबलों (दिल्ली पुलिस, RAF / CRPF) पर पैलेट गन से 5 से 6 बार फायरिंग की गई। इसके कारण साहिल की दाहिनी आंख की रोशनी 1% से भी कम बचने की संभावना डॉक्टर ने जताई है।
एम्स में हुई सीटी स्कैन की जांच के अनुसार, साहिल के शरीर (गर्दन, चेहरे, जबड़े और दाहिनी आंख के गड्ढे) में 200 से अधिक छर्रे फंसे हुए हैं, जिन्हें नस के पास होने के कारण निकाला नहीं जा सकता।
डॉक्टरों का रिकॉर्ड: शिकायत में साफ लिखा है कि इलाज करने वाले एम्स के डॉक्टर ने अपनी पर्ची और मेडिकल रिकॉर्ड में यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया है कि ये चोटें पैलेट गन लगने के कारण ही आई हैं।
साहिल ने लिखा है कि उसका सपना दिल्ली पुलिस में भर्ती होने का था, लेकिन इस चोट के बाद अब उसे वह नौकरी कभी नहीं मिल सकती और उसकी पढ़ाई भी रुक गई है। उसके पिता विकलांग हैं और वह घर का सबसे बड़ा बेटा है।
जब साहिल की मां और वकील 14 अगस्त 2026 को कनॉट प्लेस थाने शिकायत देने गए, तो पुलिस अधिकारियों (इंस्पेक्टर बाबू लाल और एएसआई बलविंदर) ने मामला क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर होने का हवाला देकर शिकायत लेने और रिसीविंग देने से मना कर दिया। उन्हें अलग-अलग थानों (संसद मार्ग और आर.के. पुरम क्राइम ब्रांच) के चक्कर कटवाए गए।