
डीएपी के विकल्प के रूप में टीएसपी, अन्नदाता एवं एनपीके उर्वरकों का करें उपयोग
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कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को दी रबी फसलों में संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह
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रबी फसलों की बेहतर पैदावार एवं मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए किसान डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में ट्रिपल सुपर फास्फेट (टीएसपी), अन्नदाता (20ः20ः0ः13) एवं एनपीके (12ः32ः16) उर्वरकों का उपयोग कर सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. किरार तथा केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. यू.एस. धाकड़ एवं डॉ. एस.के. जाटव ने किसानों को गेहूं, चना, मटर, मसूर एवं सरसों सहित अन्य रबी फसलों में संतुलित उर्वरक उपयोग के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
फसलवार उर्वरक उपयोग की दी जानकारी
गेहूं फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 100ः60ः40 किलोग्राम नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति के लिए किसान निम्न विकल्पों में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं।
पहला विकल्प 5 बैग यूरिया, 7 बैग एसएसपी एवं 1 बैग पोटाश।
दूसरा विकल्प 4 बैग यूरिया एवं 3 बैग एनपीके (12ः32ः16)।
तीसरा विकल्प 3 बैग यूरिया, 6 बैग अन्नदाता (20ः20ः0ः13) एवं 1 बैग म्यूरेट ऑफ पोटाश।
चना, मटर एवं मसूर फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर 20:60:20 किलोग्राम नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश की आवश्यकता होती है। इसके लिए निम्न विकल्प बताए गए हैं।
पहला विकल्प 1 बैग यूरिया, 7 बैग एसएसपी एवं 30 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश।
दूसरा विकल्प 3 बैग एनपीके (12:32:16)।
तीसरा विकल्प 2 बैग अन्नदाता (20:20:0:13), 5 बैग एसएसपी एवं 30 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश।
सरसों फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 40:20:20 किलोग्राम नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश की आवश्यकता होती है। इसके लिए किसान निम्न विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं।
पहला विकल्प 2 बैग यूरिया, 3 बैग एसएसपी एवं 30 किलोग्राम पोटाश।
दूसरा विकल्प 2 बैग यूरिया एवं 1 बैग एनपीके (12:32:16)।
तीसरा विकल्प 1 बैग यूरिया, 2 बैग अन्नदाता (20:20:0:13) एवं 30 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश।
टीएसपी में डीएपी के समान फास्फोरस की मात्रा
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि जिले में ट्रिपल सुपर फास्फेट (टीएसपी) उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इसमें लगभग 46 प्रतिशत फास्फोरस होता है, जबकि डीएपी में लगभग 46 प्रतिशत फास्फोरस एवं 18 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। इस प्रकार टीएसपी, डीएपी के स्थान पर फास्फोरस की पूर्ति का विकल्प हो सकता है। हालांकि, टीएसपी में नाइट्रोजन नहीं होती, इसलिए नाइट्रोजन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए यूरिया या अन्य उपयुक्त नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक का उपयोग करना आवश्यक है।
किसान फसल की आवश्यकता एवं मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का चयन करें। डीएपी के विकल्प के रूप में टीएसपी के साथ यूरिया एवं आवश्यकतानुसार म्यूरेट ऑफ पोटाश का उपयोग किया जा सकता है। उर्वरकों की मात्रा निर्धारित करते समय उनमें उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
जैव उर्वरकों के उपयोग की भी दी सलाह
वैज्ञानिकों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के साथ जैव उर्वरकों के समुचित उपयोग की सलाह दी। दलहनी फसलों में राइजोबियम तथा गेहूं में एजोटोबैक्टर का उपयोग करने के साथ सभी फसलों में पीएसबी, केएसबी एवं जेडएसबी जैसे जैव उर्वरकों का उपयोग करने की अनुशंसा की गई। इससे पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने तथा मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि वे रबी फसलों में उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें तथा फसल की आवश्यकता, मृदा परीक्षण एवं कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार उर्वरक प्रबंधन अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त करें।
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