
अनुगूंज से उद्घोष’ विशेष सत्र में विदिशा के 19 मूक-बधिर प्रतिभागियों ने की ऑनलाइन सहभागिता
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साइन लैंग्वेज वीक के अवसर पर विधिक अधिकार, शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और साइबर सुरक्षा की दी गई जानकारी
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मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा साइन लैंग्वेज वीक के अवसर पर श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों एवं किशोरों के लिए ‘अनुगूंज से उद्घोष’ विषय पर विशेष ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, विदिशा की ओर से 19 मूक-बधिर प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से सक्रिय सहभागिता की। सायं 5 बजे आयोजित विशेष सत्र में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री शेख सलीम ने भी मूक-बधिर प्रतिभागियों के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों एवं किशोरों को उनके विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता, शिक्षा, कैरियर के अवसर, शासकीय योजनाओं, भावनात्मक सशक्तिकरण एवं डिजिटल सुरक्षा के संबंध में जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों में आत्मविश्वास बढ़ाने तथा उन्हें उपलब्ध अवसरों एवं अधिकारों के प्रति सजग बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
विशेष ऑनलाइन सत्र के दौरान विशेषज्ञों द्वारा विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016, विधिक सहायता एवं हेल्पलाइन, भावनात्मक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन, कला एवं रचनात्मक क्षेत्रों में उपलब्ध अवसर, शिक्षा एवं वैकल्पिक कैरियर, शासकीय योजनाओं, छात्रवृत्ति एवं आरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर उपयोगी जानकारी प्रदान की गई। प्रतिभागियों को बच्चों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम तथा साइबर सुरक्षा एवं ऑनलाइन माध्यमों से जुड़े संभावित जोखिमों के संबंध में भी जागरूक किया गया।
कार्यक्रम को अधिक प्रभावी और सहभागी बनाने के लिए साइन लैंग्वेज के माध्यम से समूह गतिविधियों एवं संवाद का आयोजन किया गया। इससे मूक-बधिर प्रतिभागियों ने सहज रूप से कार्यक्रम की गतिविधियों में भाग लेते हुए अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में इस बात पर बल दिया गया कि दिव्यांग बच्चों एवं किशोरों को समान अवसर, सुरक्षित वातावरण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
कार्यक्रम में माननीय न्यायमूर्ति श्री अल्पेश वाई. कोगजे, मुख्य न्यायाधिपति, उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश एवं मुख्य संरक्षक, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने मुख्य वक्तव्य में दिव्यांग एवं श्रवण बाधित बच्चों के अधिकारों, आत्मनिर्भरता, समान अवसर तथा समाज की मुख्यधारा में उनकी प्रभावी भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे बच्चों एवं किशोरों के अधिकारों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर एवं सहयोग उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल, न्यायाधीश, उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश तथा न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधीश, उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा भी विशेष संबोधन किया गया। ‘अनुगूंज से उद्घोष’ कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सुनने और बोलने की क्षमता में बाधा किसी व्यक्ति की प्रतिभा, अधिकारों और संभावनाओं की सीमा नहीं है। विधिक जागरूकता, शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी सुरक्षा और समान अवसरों के माध्यम से मूक-बधिर बच्चों एवं किशोरों को सशक्त बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सकता है। #Vidisha