
रात में सूरज की रोशनी वापस धरती पर लाने की तैयारी हो रही है।
अंतरिक्ष में रखा एक विशाल आईना अंधेरे के बाद भी किसी खास जगह को रोशन कर सकता है।
कैलिफोर्निया की स्टार्टअप रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल को इस साल जुलाई में अपने प्रयोगात्मक सैटेलाइट एरेंडिल-1 को लॉन्च करने की मंजूरी मिली है। इस सैटेलाइट में करीब 59×59 फीट यानी 18×18 मीटर का बेहद बड़ा और हल्का आईना लगाया जाएगा।
इसका काम सुनने में जितना अजीब लगता है, उतना ही दिलचस्प है। सैटेलाइट अंतरिक्ष में सूरज की रोशनी को पकड़कर उसे धरती के किसी चुने हुए इलाके की तरफ मोड़ने की कोशिश करेगा।
पहले परीक्षण में करीब 24 वर्ग किलोमीटर के इलाके पर रोशनी डालने की योजना है। कंपनी के मुताबिक यह रोशनी लगभग पूर्णिमा के चांद जितनी चमक वाली हो सकती है और करीब पांच मिनट तक किसी जगह पर डाली जा सकती है।
इस तकनीक का एक बड़ा मकसद सोलर फार्म को रात में भी कुछ अतिरिक्त रोशनी देना है, ताकि सूरज डूबने के बाद भी सोलर पैनल बिजली बनाते रहें। भविष्य में इसका इस्तेमाल रात के समय आपदा राहत, खोज-बचाव और दूरदराज के इलाकों में रोशनी पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।
लेकिन इस आइडिया को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता भी बढ़ी है। खगोलविदों को डर है कि ऐसे चमकीले सैटेलाइट रात के आसमान को ज्यादा रोशन कर सकते हैं और टेलीस्कोप से होने वाली रिसर्च में परेशानी पैदा कर सकते हैं।
एक हालिया अध्ययन के मुताबिक बड़े पैमाने पर ऐसे मिरर लगाए गए तो रोशनी का असर आसपास के दर्जनों किलोमीटर तक दिखाई दे सकता है।
यानी यह सिर्फ अंतरिक्ष का आईना नहीं है, बल्कि ऊर्जा और रात के प्राकृतिक अंधेरे के बीच एक नया सवाल भी खड़ा कर रहा है।
स्रोत: एफसीसी और एयरोस्पेस रिपोर्ट
अगर रात में भी सूरज की रोशनी मिल सके, तो आप इसका सबसे अच्छा इस्तेमाल किस काम के लिए करेंगे?
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Bihar, India | Aug 22, 2026