
भारत में एलन मस्क की स्टारलिंक की एंट्री की कहानी फिर से गर्म हो गई है।
इस बार बात सिर्फ इंटरनेट की नहीं, बल्कि सीधे मोबाइल फोन तक सैटेलाइट कनेक्शन पहुंचाने की है।
स्पेसएक्स की स्टारलिंक ने भारत में अपने अगली पीढ़ी के जेन-2 सैटेलाइट नेटवर्क के लिए दोबारा मंजूरी मांगी है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने भारत के स्पेस रेगुलेटर इन-स्पेस के सामने नया आवेदन दिया है।
इस प्रस्ताव में भारत के लिए करीब 30 हजार लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट शामिल हैं। ये सैटेलाइट करीब 340 से 615 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करने की योजना में हैं। पूरी दुनिया के लिए स्पेसएक्स करीब 42 हजार जेन-2 सैटेलाइट की योजना बना रहा है।
लेकिन इस बार सबसे दिलचस्प चीज है डायरेक्ट-टू-डिवाइस तकनीक।
इसका मकसद ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जिसमें आने वाले समय में संगत मोबाइल फोन और दूसरे डिवाइस सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकें। यानी जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है, वहां सैटेलाइट कनेक्टिविटी एक नया रास्ता दे सकती है।
स्टारलिंक के लिए भारत में यह पहला प्रयास नहीं है। भारत ने जुलाई 2025 में उसकी जेन-1 कॉन्स्टेलेशन के 4,408 सैटेलाइट को मंजूरी दी थी, जबकि पहले जेन-2 आवेदन में कुछ तकनीकी और स्पेक्ट्रम से जुड़ी शर्तों को लेकर दिक्कत आई थी। अब कंपनी बदले हुए प्रस्ताव के साथ फिर लौटी है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि स्टारलिंक तुरंत पूरे भारत में सेवा शुरू कर देगी। सैटेलाइट नेटवर्क के लिए रेगुलेटरी मंजूरी, स्पेक्ट्रम और सिक्योरिटी से जुड़े कई चरण अभी बाकी हैं।
अगर यह योजना पूरी तरह मंजूर हो जाती है, तो दूरदराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों और कमजोर इंटरनेट वाले क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का तरीका काफी बदल सकता है।
स्रोत: रॉयटर्स की 20 अगस्त रिपोर्ट
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Bihar, India | Aug 22, 2026