*पिता महाराज दशरथ के निधन का समाचार सुन भावुक हुए श्रीराम, भरत ने सिर पर रखीं प्रभु की खड़ाऊं*
*श्री बिहारी रामलीला समाज की 130वीं रामलीला में श्रीराम-भरत मिलाप का भावपूर्ण मंचन, भाई के प्रति प्रेम, त्याग और मर्यादा ने दर्शकों को किया भावविभोर*
सतना। श्री बिहारी रामलीला समाज द्वारा सुभाष पार्क मैदान में आयोजित 130वें वर्ष की रामलीला में चित्रकूट में प्रभु श्रीराम और भरत के मिलाप का अत्यंत भावुक एवं हृदयस्पर्शी मंचन किया गया। श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के वनगमन के बाद चित्रकूट पहुंचे भरत जी ने जब प्रभु श्रीराम को अपने पिता महाराज दशरथ के बैकुंठ लोक सिधारने का समाचार सुनाया, तो वे गहरे दुःख में डूब गए। पिता के वियोग की पीड़ा और परिवार पर आए इस संकट ने वातावरण को भावुक कर दिया।
मंचन के दौरान भरत जी ने प्रभु श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजपाट संभालने का आग्रह किया। उन्होंने अपने बड़े भाई के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि अयोध्या की प्रजा अपने राजा की प्रतीक्षा कर रही है। पिता महाराज दशरथ के निधन के बाद अयोध्या का राजसिंहासन सूना है। इस पर प्रभु श्रीराम ने भरत जी को समझाया कि पिता महाराज दशरथ द्वारा दिए गए वचन और आज्ञा का पालन करना अब और भी आवश्यक हो गया है। रघुकुल की मर्यादा और पिता के वचन की रक्षा के लिए चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण करना उनका धर्म है।
भरत ने सिर पर रखीं प्रभु श्रीराम की खड़ाऊं
प्रभु श्रीराम को अयोध्या वापस लौटने के लिए मनाने में असफल होने पर भरत जी ने उनकी खड़ाऊं अपने सिर पर धारण की और उन्हें अयोध्या ले जाने का संकल्प लिया। उन्होंने निर्णय किया कि प्रभु श्रीराम की खड़ाऊं ही अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान होंगी और वे स्वयं उनके प्रतिनिधि के रूप में राज्य का दायित्व निभाएंगे। श्रीराम और भरत के बीच हुए संवाद ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस प्रसंग ने भाई के प्रति अगाध प्रेम, समर्पण, त्याग और मर्यादा का अनुपम संदेश दिया।
स्थानीय कलाकार जीवंत कर रहे रामायण के प्रसंग
श्री बिहारी रामलीला समाज के प्रचार-प्रसार प्रमुख श्याम लाल गुप्ता ‘श्यामू’ ने बताया कि 130 वर्षों से निरंतर संचालित श्री बिहारी रामलीला समाज की विशेषता यह है कि रामायण के विभिन्न प्रसंगों का सजीव चित्रण करने वाले सभी कलाकार स्थानीय हैं। कलाकार अपनी प्रतिभा और अभिनय के माध्यम से प्रभु श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों को जीवंत कर रहे हैं।
गहोई वैश्य समाज के पदाधिकारी एवं गणमान्यजन रहे उपस्थित
इस अवसर पर श्री बिहारी रामलीला समाज के महंत बृजेंद्र कुमार दुबे, सहमहंत शैलेंद्र कुमार दुबे, समन्वयक पं. हरि प्रकाश गोस्वामी, अध्यक्ष रविशंकर गौरी एवं महामंत्री राजेश चतुर्वेदी ‘पालन’ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में अतिथि के रूप में गहोई वैश्य पंचायत महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती अर्चना बड़ेरिया, उपाध्यक्ष कल्पना कटारे, श्रीमती ममता मोर, छाया अरुसिया, सारिका गुप्ता, शीतल कुचया एवं रिंकी कुचया नीता सोनी शामिल हुईं।
इसके साथ ही गहोई वैश्य पंचायत के अध्यक्ष संजय बड़ेरिया, संजय गुप्ता, मनोज कटारे, राजेश बड़ेरिया, राजकिशोर जुडेले, कमलेश सेठिया, दिनेश चौदहा, सचिव धीरेंद्र अरुसिया, विनोद खागर, सुनील कुदरया, हर्ष गुप्ता, संस्कार गुप्ता, संजय अग्रवाल (इटमा वाले), अंशुली रैकवार, गणेश कुशवाहा, जय प्रकाश केसरवानी, दीपक अग्रवाल एवं रुचिका संजय अग्रवाल नीमा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
सुभाष पार्क मैदान में आयोजित रामलीला के इस भावपूर्ण प्रसंग ने श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के आदर्शों, भरत के त्याग और भाइयों के अटूट प्रेम का संदेश दिया।
Raghurajnagar Nagareey, Satna | Oct 13, 2026