
पंचायत विकास में अब स्वास्थ्य और पोषण भी बनेगा प्राथमिकता
बेगूसराय। पंचायतों का विकास अब केवल सड़क, नाली और भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। स्वस्थ मां, स्वस्थ बच्चा, पोषण, स्वच्छता और बीमारी से बचाव जैसे मुद्दे भी ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। ‘विकसित पंचायत, विकसित बेगूसराय’ के लक्ष्य को साकार करने के उद्देश्य से पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियों को स्वास्थ्य एवं पोषण आधारित विकास को लेकर प्रशिक्षण दिया गया।
जिला पंचायत संसाधन केंद्र, कंकौल में ग्राम पंचायत विकास योजना एवं सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय गैर-आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, मुखिया, पंचायत सचिव तथा प्रखंड एवं पंचायत कार्यपालक सहायकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. गोपाल मिश्रा, जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. संजय सिंह, सदर प्रखंड प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिवाकर, नोडल पदाधिकारी प्रवीण कुमार एवं रवि कुमार सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
प्रशिक्षण के दौरान पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रतिनिधि ज्ञानोदय प्रकाश एवं दीपक मिश्रा ने ‘स्वस्थ ग्राम’ थीम के तहत पंचायतों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करते समय गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की निगरानी, संस्थागत प्रसव तथा मां एवं नवजात शिशु की समुचित देखभाल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय पोषण माह, एनीमिया मुक्त भारत एवं टीबी मुक्त भारत अभियान में पंचायतों की सक्रिय भागीदारी पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल, मच्छर नियंत्रण तथा विभिन्न बीमारियों की रोकथाम को लेकर पंचायत स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण में ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) को प्रभावी स्वास्थ्य मंच के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े कार्यक्रमों को गांव के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी एवं जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी ने पंचायत प्रतिनिधियों से जीपीडीपी में ‘स्वस्थ ग्राम’ थीम को शामिल कर निर्धारित संकेतकों के आधार पर ठोस एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने का आग्रह किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ ग्राम निर्माण के लिए सामूहिक शपथ दिलाई गई। अधिकारियों ने कहा कि पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और बीमारी की रोकथाम को विकास योजनाओं से जोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।