
आत्म व परमात्म तत्व की प्रधानता को समझें तथा शरणं ले-आचार्य श्री रामलालजी म.सा.
बीकानेर। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्य श्री रामलालजी म.सा. ने छबीली घाटी के सेवा सदन में पर्युषण पर्व के पांचवें दिन शनिवार को प्रवचन में कहा कि आत्म व परमात्म तत्व की प्रधानता को समझें तथा उसकी शरण लें।
उन्होंने कहा कि सभी तीर्थंकरों व मोक्ष प्राप्त करने वाली पुण्य आत्माओं ने आत्म व परमात्म तत्व की शरण लेकर साधना, आराधना व भक्ति कर उदार किया। कैवल्य ज्ञान प्राप्त तीर्थंकरों की देशना और संदेश जीव मात्र के कल्याण के लिए है, इसमें किसी वर्ग, जाति व समुदाय का भेद नहीं है। तीर्थंकरों तथा चारित्र आत्माओं की देशना व उनके बताए मार्ग पर चलकर संयम, सत्य, अहिंसा आदि नियमों की पालना कर साधना, आराधना व भक्ति करने वाले कल्याण के पात्र होते है।
उन्हांने कहा कि धर्म आध्यात्म के मार्ग में दलाली पाप व नरक के कर्म बंधन को बांधती है। धर्म के नाम या पाप पुण्य का डर दिखाकर धन वसुलना, झूठे चमत्कार दिखाकर खुद को भगवान का सीधा दूत या प्रतिनिधि बताना, ज्ञान, ध्यान और मुक्ति केे मार्ग को महंगे अनुष्ठानों और शुल्कों से जोड़ने वाले कार्य धर्म-अध्यात्म की दलाली में आते है। उन्होंने कहा कि धर्म-आध्यात्मिक मार्ग में किसी बिचौलिए के बिना, अपने भीतर झांकते हुए आत्म व परमात्म स्वरूप को पहचानते हुए सुदेव, सुगुरु की शरण लेकर आंतरिक शुद्धि के साथ सच्ची साधना करें। चारित्र आत्माओं ने बताया कि धर्म में दलाली से जैन दर्शन के अनुसार (कर्म सिद्धांत) गोत्र कर्म बंध होता है। आत्मा द्वारा कर्म को आकर्षित और संग्रहित करने की प्रक्रिया को ही गोत्र कर्म बंध कहा जाता है। गोत्र कर्म आत्मा को संसार में एक विशिष्ट कुल या वंश में जन्म लेने के लिए बाध्य करता है।
आचार्य प्रवर के सान्निध्य में रिकार्ड तपस्याएं
आचार्य प्रवर व उपाध्याय प्रवर की प्रेरणा व आशीर्वाद से अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी संघ व श्री साधुमार्गी सेवा समिति के मंत्री सुरेश बच्छावत ने बताया कि चारित्र आत्माओं की प्रेरणा से श्रावक-श्राविकाएं ’’पचखाण से निर्वाण’’, नई उमंग,नए संकल्प के साथ पर्युषण पर्व में देश-प्रदेश साधुमार्गी जैन संघ के मुनि व साध्वीवृंद के सान्निध्य में हजारों श्रावक-श्राविकां एक से 31 दिन की तपस्याएं रहे है। इनमें उपवास, एकासन, एकल ठाणा, आयंबिल, नीवीं , दया व्रत, बेला, तेला के साथ 15 सितम्बर तक सामूहिक 9 की तपस्या करने वाले साधकों की संख्या सैकड़ों में है।
साधुमार्गी सेवा समिति के कार्याध्यक्ष सुरेन्द्र दस्साणी व अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद ने बताया कि रश्मि दस्साणी ने 12 की तपस्या का तथा समिति के सह मंत्री नवीन कोठारी सहित अनेक श्रावक श्राविकाओं ने तीन दिन (तेले) 5-6 दिन की तपस्या का संकल्प (पचखान) लिया। सभी तपस्वी व बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं आध्यात्मिक उत्थान के लिए पचखान से निर्वाण के नियमों का पालन कर रहे है। प्रतिदिन भी ज्ञान, साधना, तप, रस परित्याग, यतना, इंद्रिय विजय व विविध पचखान ले कर पर्युषण पर्व की साधना कर रहे है।
’’लोच में क्या सोच’’
पर्युषण पर्व के दौरान छबीली घाटी में हाथों से बाल को उतारने का अस्थाई केन्द्र बनाया गया है। ’’लोच में क्या सोच’’ संकल्प के तहत प्रतिदिन स्थानीय व बाहर से आए श्रावक बालों का लोच करवा रहे है। साधुमार्गी जैन संघ के अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने बताया कि मध्य प्रदेश से लोच के अनुभवी सैलून मास्टर संक्रमण से बचाते हुए राख व अन्य पारम्परिक सामग्री का उपयोग करते हुए नियमित श्रावकों के बालों का हाथों से लोच कर रहे है। उन्होंने बताया कि प्रतिक्रमण सीखों अभियान के तहत ’’प्रतिक्रमण’’ की पुस्तक में छोटे व बड़े प्रतिक्रमण की एक विधि है जो इस पुस्तक में प्रकाशित है।
’पर्युषण के रंग ज्ञान ध्यान के संग
चातुर्मास समर्पण-26 के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि ’पर्युषण के रंग ज्ञान ध्यान के संग अभियान के तहत शनिवार को नाम कर्म पर प्रतियोगिता हुई, जिसमें 108 श्रावक-श्राविकाओं ने हिस्सा लिया रविवार को प्रवचन के बाद 20 मिनट की गोत्र कर्म पर स्पर्द्धा होगी। आयुष्य कर्म पर शुक्रवार को हुई प्रतियोगिता में समता बांठिया प्रथम, कोमल सुखलेचा, तन्मय दुग्गड़ द्वितीय तथा शशि कला सेठिया, जया गोलछा व अक्षिता ललवानी समान अंकों से तृतीय रहेगी। प्रतियोगिताएं 15 सितम्बर तक चलेगी। अंचल व राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को नकद राशि, ट्रॉफी, धार्मिक पुस्तकें व प्रशिस्त पत्र प्रदान किया जाएगा। वरिष्ठ श्रावक सुशील बछावत ने विशेष शिविर व सेवा केन्द्र में चरित्र आत्मा के सान्निध्य में चलने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी तथा बाहर से आने वाले श्रावक-श्राविकाओं का स्वागत किया।