#बालाघाट
बलराम तालाब बना किसान की खुशहाली का आधार, मत्स्य पालन से हर साल हो रही 80 हजार रुपये की अतिरिक्त आय
जल संरक्षण की पहल से बदली खेती की तस्वीर, सिंचाई के साथ आय बढ़ाने का मिला नया अवसर
जल संरक्षण के प्रयास जब किसानों की मेहनत से जुड़ते हैं, तो वे न केवल खेती को नई दिशा देते हैं, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसका उदाहरण जिले के बिरसा विकासखंड के ग्राम अजगरा के कृषक श्री चमरूसिंह इतवारी मरकाम हैं। कभी वर्षा पर निर्भर रहकर खेती करने वाले इस किसान के लिए सिंचाई हेतु पर्याप्त पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती थी। कृषि विभाग के सहयोग से वर्ष 2022-23 में उनके खेत में बलराम तालाब का निर्माण कराया गया। इस तालाब ने जहां जल संरक्षण को बढ़ावा दिया, वहीं मत्स्य पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर भी प्रदान किया। आज इस पहल से किसान को प्रतिवर्ष लगभग 80 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
वर्षा पर निर्भर खेती से बढ़ी मुश्किलें
ग्राम अजगरा निवासी कृषक श्री चमरूसिंह इतवारी मरकाम के पास 1.214 हेक्टेयर कृषि भूमि है। वे परंपरागत रूप से खेती-किसानी करते आ रहे थे। लेकिन अनियमित वर्षा और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कृषि उत्पादन बढ़ाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित कृषि भूमि में बेहतर उत्पादन प्राप्त करना और खेती के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। वर्षा पर निर्भरता के कारण कृषि कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करना भी आसान नहीं था।
बलराम तालाब ने दिखाई नई राह
किसान की इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग द्वारा उन्हें जल संरक्षण और कृषि विकास के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विभाग के सहयोग से वर्ष 2022-23 में उनके खेत में बलराम तालाब का निर्माण कराया गया। इस तालाब का उद्देश्य वर्षा जल का संग्रहण कर सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाना और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना था।
बलराम तालाब के निर्माण से खेत में वर्षा जल को संरक्षित करने का अवसर मिला। इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार हुआ और कृषि कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिली। तालाब ने किसान को खेती के साथ-साथ आय बढ़ाने वाली अन्य गतिविधियों को अपनाने का अवसर भी दिया।
मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष 80 हजार रुपये की आय
बलराम तालाब का उपयोग केवल जल संरक्षण और सिंचाई तक सीमित नहीं रहा। किसान ने तालाब में मत्स्य पालन की गतिविधि भी अपनाई। इससे उन्हें कृषि के साथ आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिला। मत्स्य पालन के माध्यम से श्री मरकाम को प्रतिवर्ष लगभग 80 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
इस पहल ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि खेत में उपलब्ध जल संसाधनों का समुचित उपयोग कर खेती के साथ सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे सीमित कृषि भूमि से बेहतर लाभ प्राप्त करने की संभावनाएं विकसित हुई हैं।
जल संरक्षण से आर्थिक सशक्तीकरण की ओर
श्री चमरूसिंह इतवारी मरकाम की यह सफलता दर्शाती है कि जल संरक्षण के लिए किए गए प्रयास किसानों के लिए बहुआयामी लाभ प्रदान कर सकते हैं। बलराम तालाब के माध्यम से वर्षा जल का संग्रहण, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को अपनाने का अवसर मिला है।
कृषि विभाग के सहयोग से शुरू हुई यह पहल खेती को अधिक उपयोगी बनाने और किसान की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई है। यह उदाहरण अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक है कि जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर कृषि के साथ सहायक गतिविधियों को अपनाया जाए, तो आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा सकते हैं।
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2 views | Balaghat, Madhya Pradesh | Oct 19, 2026