उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का प्रतीक 'नंदा देवी राजजात यात्रा' अपनी अनूठी परंपराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस ऐतिहासिक यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और दिव्य हिस्सा 'चौसिंग्या खाडू' (चार सींगों वाला विशेष मेढ़ा) होता है, जिसे स्थानीय मान्यताओं के अनुसार माता नंदा का संदेशवाहक माना जाता है। गढ़वाली भाषा में 'चौ' का अर्थ चार, 'सिंग' का अर्थ सींग और 'खाडू' का तात्पर्य भेड़ या मेढ़े से है।यह दिव्य मेढ़ा पूरी यात्रा के दौरान सबसे आगे चलकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का मार्गदर्शन करता है और रास्ता दिखाता है। हैरत की बात यह है कि यात्रा के दौरान होने वाले भारी शोर-शराबे या आस-पास के अन्य जानवरों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता। पूरी तरह शांत भाव से चलने वाला यह खाडू रात के समय भी मां नंदा की मूर्ति के समीप ही विश्राम करता है।"उत्तराखंड की हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए Nandi News Uttarakhand को Follow करें।"
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