जिला शिक्षा कार्यालय में बच्चों की किताबों पर जमी धूल, सीढ़ियों के पास पर्दे के पीछे रखी पुस्तकें
स्कूलों तक पहुंचने के बजाय कार्यालय में रखी किताबें खा रहीं फांक, जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जहानाबाद : बच्चों को पढ़ाई के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली किताबें जिला शिक्षा कार्यालय में ही धूल फांक रही हैं। कार्यालय परिसर में सीढ़ियों के पास पर्दा लगाकर बड़ी संख्या में किताबों को रखा गया है। लंबे समय से रखी इन किताबों पर धूल जम गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन पुस्तकों को समय पर विद्यालयों तक पहुंचाकर विद्यार्थियों के बीच वितरित किया जाना था, वे कार्यालय में किस कारण से पड़ी हुई हैं।
जिला शिक्षा कार्यालय में आने-जाने वाले लोगों की नजर सीढ़ियों के पास पर्दे के पीछे रखी किताबों पर पड़ रही है। किताबों को इस तरह खुले स्थान में रखने से उनके खराब होने की आशंका भी बनी हुई है। कई किताबों पर धूल की परत दिखाई दे रही है। शिक्षा विभाग की ओर से प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए किताबें भेजी जाती हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो। लेकिन कार्यालय परिसर में किताबों का इस तरह रखा होना विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।
विद्यालयों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी
सरकार की ओर से बच्चों की पढ़ाई को सुचारु रखने के उद्देश्य से स्कूलों के लिए किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। इन पुस्तकों को संबंधित विद्यालयों तक पहुंचाकर विद्यार्थियों के बीच वितरण किया जाना चाहिए। किताबें यदि समय पर स्कूलों तक नहीं पहुंचती हैं तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। खासकर सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले वैसे बच्चे, जो पाठ्य पुस्तकों के लिए विभागीय व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं, उनके लिए समय पर किताब मिलना जरूरी है।
सीढ़ियों के पास बनाया गया अस्थायी भंडारण स्थल
जिला शिक्षा कार्यालय में किताबों को रखने के लिए अलग से व्यवस्थित भंडारण की व्यवस्था है या नहीं, यह भी सवालों के घेरे में है। सीढ़ियों के पास पर्दा लगाकर किताबों को रखने से यह स्पष्ट होता है कि पुस्तकों को फिलहाल अस्थायी तौर पर वहां रखा गया है। लेकिन कितने दिनों से किताबें वहां रखी हैं और इन्हें संबंधित स्कूलों तक क्यों नहीं भेजा गया, इसका जवाब विभागीय अधिकारियों से अपेक्षित है।
धूल से किताबों के खराब होने की आशंका
किताबें लंबे समय तक धूल और नमी वाले स्थान पर पड़ी रहें तो उनके खराब होने की आशंका रहती है। सरकारी राशि से उपलब्ध कराई गई इन पुस्तकों का उद्देश्य बच्चों तक पहुंचाना है। ऐसे में यदि किताबें कार्यालय में ही पड़ी रह जाती हैं तो सरकारी संसाधन का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाएगा। स्थानीय लोगों ने विभाग से किताबों का भौतिक सत्यापन कराने और उन्हें जल्द से जल्द संबंधित विद्यालयों तक पहुंचाने की मांग की है।
जिम्मेदार अधिकारी दें स्थिति स्पष्ट
कार्यालय परिसर में रखी किताबें किस कक्षा और विषय की हैं, कितने विद्यालयों के लिए भेजी गई हैं और उनका वितरण कब तक किया जाना है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किताबें विद्यालयों तक पहुंचाने में देरी क्यों हुई। अब देखना है कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और कार्यालय में धूल फांक रही किताबें कब तक बच्चों के हाथों तक पहुंचती हैं।